देश का ढांचा कलेक्टर और ʼʼमांʼʼ

देश यानि अपने भारत के बारे में देश विदेश के अख़बार जो कुछ लिख रहे हैं किसी से छिपा नहीं है | सरकार राजनीतिक दल और  सामाजिक संगठनो के बाद हमेशा से प्रशसनिक अमले की भूमिका महत्वपूर्ण रही है | देश का ढांचा ही कुछ ऐसा है, ७० साल की आज़ादी के बाद आज देश में प्रशासन और खास तौर पर उसका मुखिया “कलेक्टर” स्वतंत्र चेतना से काम करने को आजाद नहीं है | उसे हर निर्णय के लिए राजनीतिक आकओं की और  देखना होता है | देश के मीडिया में दो कलेक्टरों की कहानी इन दिनों चर्चित है एक महाराष्ट्र के नंदुरबार जिले में कार्यरत कलेक्टर डॉ राजेंद्र भारुड की, तो दूसरी मध्यप्रदेश के बड़े शहर और जिले में कार्यरत कलेक्टर मनीष सिंह की |
दोनों की प्रुस्थ्भूमि में भी अंतर है | डॉ राजेन्द्र भारूड एक अवैध शराब बनाने बेचने और उससे बच्चों का पेट पालने वाली मां कमला के बेटे है और एम् बी बी एस के बाद आई ए एस बने हैं | दूसरे मध्यप्रदेश के इंदौर में तैनात मनीष सिंह सेवा निवृत आई ए एस मोती सिंह के बेटे हैं |
पहले डॉ राजेन्द्र भारुड – महाराष्ट्र के आदिवासी जिले नंदुरबार के जिलाधिकारी डॉ राजेंद्र भारुड की चर्चा महाराष्ट्र ही नहीं बल्कि देश में हो रही है। इसकी वजह यह है कि उन्होंने कोरोना महामारी के खतरे को भांपते हुए दिसंबर २०२० से ही इससे निपटने की तैयारियां शुरू कर दी थीं। नंदुरबार जिला प्रशासन की तरफ से यह दावा भी किया गया था कि अब जिले में ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं है। बेड, वेंटीलेटर्स सब कुछ पर्याप्त मात्रा में मौजूद है।
राजनीति को शायद यही बात अखर गई अब जिलाधिकारी और जिला प्रशासन के इस दावे को गलत बताते हुए नंदुरबार की भाजपा सांसद डॉ. हिना गावित ने कहा है कि गलत आंकड़े जिलाधिकारी की तरफ से पेश किए गए हैं। गावित ने कहा कि नंदुरबार जिले को जितनी ऑक्सीजन की जरूरत है उसका आधा भी जिले में नहीं बन रहा है। उन्होंने कहा कि तीन में से दो आक्सीजन प्लांट अभी पूरी तरह से शुरू भी नहीं हो पाये  है।
इसके अलावा उन्होंने जिलाधिकारी पर एक बड़ा आरोप भी लगाया है गावित ने कहा कि सीएसआर फंड की तरफ से नंदुरबार जिले को 4000 रेमडेसिविर इंजेक्शन गरीब जनता को मुफ्त में देने के लिए मिले थे। लेकिन जिलाधिकारी ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए 1000 इंजेक्शन स्थानीय शिवसेना नेता चंद्रकांत रघुवंशी के एनजीओ बेचने के लिए दिया है।
डॉ राजेंद्र भारुड की इस मामले में सफाई भी आई है कलेक्टर डॉ. राजेंद्र भारुड ने कहा कि जो भी आरोप लगाए गए हैं वो सब गलत हैं। सारा काम नियमों के तहत हुआ है। अभी तक किसी भी व्यक्ति की शिकायत नहीं आई है। शायद सांसद महोदया को किसी ने गलत जानकारी उपलब्ध करवाई है।मामले देश में ऐसे ही चलते हैं | हर जन हितकारी निर्णय और कार्य की कुंजियाँ कलेक्टर के माध्यम से राजनितीग्य अपने हाथों में रखना चाहते हैं |
 इंदौर मध्यप्रदेश में क्या हुआ ? डाक्टरों के काम करने के घंटे और कार्यप्रणाली कलेक्टर मनीष सिंह तय करने लगे, तो दो डाक्टरों ने इस्तीफे दे दिए और कलेक्टर को हटाने की मांग को लेकर स्वास्थ्य विभग के सारे कर्मचारी हड़ताल पर चले गये | चूँकि कलेक्टर बड़े अफसर हैं  और बड़े लोगों से उनके रसूख है, इस कारण मामले को रफादफा करने में बड़े और भारी लोग लगे | इंदौर शहर मोह अफसरों को यूँ ही नहीं होता | नगर निगम आयुक्त से लेकर अपना सारा कार्यकाल रसूखदार लोग इंदौर में ही बिताना पसंद करते हैं |
आज पूरी दुनिया मां को याद कर रही है, उन्हें नमन कर रही है  | ऐसे में डॉ राजेन्द्र भारुड की मां कमलादेवी के लिए किसी शायर की लिखी ये पंक्तियां याद आ रही हैं :-
खुदा का काम था “मोहबत” वो मां करने लगी.
खुदा का काम था ‘हिफाजत” वो भी मां करने लगी .
खुदा का काम था ‘बरकत” वो भी माँ करने लगी
देखते ही देखते खुदा के सामने कोई और”परवर दिगार” हो गया |
“मा” के सामने ही खुदा “बेरोजगार” हो गया |
दुनिया की सारी “मां” को प्रणाम |

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