सोशल मीडिया का असामाजिक उपयोग प्रतिबंधित हो????

देश के दो बड़े राजनीतिक दल इन दिनों एक टूलकिट को लेकर हमले और बचाव के खेल खेलरहे हैं | ऐसे में आज भोपला से सोशल मीडिया पर हुई एक कलाकारी ने भारत को सोशल मीडिया पर विचार के लिए मजबूर कर दिया | पहले कलाकारी फिर आगे की बात |भोपाल से एक अच्छी पहुँच रखने वाले व्यक्ति की पोस्ट ने सबको हिला दिया | भोपाल से प्रेषित इस पोस्ट का सार यह था “ कर्नाटक के रायचूर जिले में सड़क चौडीकरण के दौरान हटाये गये एक धार्मिक स्थल के नीचे से एक अन्य धर्म का ३ मंजिला धर्म स्थल निकला है|” पोस्ट संवेदनशील तरीके से लिखी गई थी, उसके साथ जो चित्र पोस्ट किये गये थे वे जरुर बेमेल लग रहे थे, थोडा विचार करने पर यह कौतुहल बनता था इतना बड़ा भव्य भवन इतना सुरक्षित कैसे निकला ?
कुछ मित्रों ने इस घटना की सत्यता का पता लगाया तो जो तथ्य सामने आये उससे समाज में अशांति  फ़ैल सकती थी | यह चित्र और घटना रायचूर कर्नाटक की नहीं बल्कि दो साल पुरानी और किसी अन्य राज्य की है | पोस्ट करने वाले सज्जन भोपाल में भवन निर्माण की सलाह  देते है | उनकी पेठ वाया नागपुर दिल्ली तक है और उन्हें सरकार ने पद से नवाज़ा भी है | ऐसे व्यक्ति ऐसी पोस्ट सोशल मीडिया पर डाले और अपने बचाव में यह कहें कि” मैं १०० – १५० पहले भी डाल चुका हूँ, तब आपति नहीं की |”ऐसा व्यवहार सामान्य नहीं है| “ऐसी पोस्ट जिससे सामाजिक सद्भाव बिगड़ने से हर कोई परहेज करता है और यदि आप उस विषय की जानकारी रखने का दावा करते हैं तो लिखने के पहले उसकी सत्यता परखना जरूरी है |
आज के वर्तमान भारतीय परिप्रेक्ष्य में यदि फेसबुक के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग से कोई पूछे कि आपने जिस मंशा या जिस उपयोग को सोचकर फेसबुक जैसे सोशल प्लेटफॉर्म का निर्माण किया था, उस पर हम भारतीय कितना खरा उतरते हैं? तो मेरा अनुमान है कि उनका जवाब हमें खुश करने वाला तो कतई नहीं होगा कि फेसबुक नाम क्यों रखा गया इस सोशल साइट का? इससे जुड़े व्यक्ति अपने विचार रख सकें, क्योंकि व्यक्ति के विचार उसका चेहरा बन सकने की काबिलियत रखते हैं। आज इस घटना में यह सब नहीं हुआ | अगर बात बिगडती तो ?
आजकल जिस तरह सोशल मीडिया का इस्तेमाल अधिकतर भारतीय लोग करते हैं उसकी कल्पना तो कभी भी नहीं की होगी जुकरबर्ग ने।  हम बहुत हद तक अधीर और नकारात्मक होते जा रहे हैं। सोशल मीडिया पर दूसरे के फटे में टांग डाल देना आम बात है। किसी के पक्ष-विपक्ष में अपनी राय रखते-रखते आप इतने उग्र हो जाते हैं कि आप भद्रता की सीढ़ियों से कितना नीचे लुढ़क गए, ये आपको ही भान नहीं होता। आजकल जहां देखिए वहां नरेन्द्र  मोदी और राहुल गांधी के फोटो बनाकर उन पर अश्लील कमेंट कर रहे हैं। प्रत्युत्तर में उनके समर्थक भी ऐसा ही कर रहे हैं। इस सब में आप उन लोगों के पद की गरिमा को भी भूल जाते हैं, जो संविधान ने उन्हें दी है।

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