तीसरी लहर से बचाव के लिए अभिभावकों को जागरूक होना पड़ेगा, बच्चों में डर का वातावरण ना फैलाएं- अखिलेश धाकड़

कोरोना की तीसरी लहर से बचाव विषय पर परिचर्चा संपन्न

24, जुलाई, शनिवार। मनासा/ नीमच। गोंडवाना समय। तहसील विधिक सेवा समिति मनासा द्वारा आयोजित ऑनलाइन गूगल परिचर्चा “कोरोना काल के दौरान किए गए सेवा कार्य एवं तीसरी लहर से बचाव के लिए उपाय” विषय पर आयोजित की गई, जिसमें वक्ता के रूप में मनासा से अभिभाषक श्री रमेश मूंदड़ा, क्षेत्रीय अध्यक्ष लायंस क्लब, नीमच से डॉ. मनीष यादव, आरएमओ, जिला चिकित्सालय एवं कोविड वार्ड इंचार्ज, पुणे से सामाजिक कार्यकर्ता एवं इंजीनियर सुश्री गीतांजली चौधरी, भोपाल से डॉ. अशोक कुमार व्यास, राज्य समन्वयक, राज्य शिक्षा केन्द्र, श्री मनीष पांडेय, प्रथम व्यवहार न्यायाधीश (कनिष्ठ खंड) एवं अंत में श्री अखिलेश धाकड़, अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश महोदय के द्वारा संबोधित किया गया परिचर्चा का संचालन एवं आभार प्रदर्शन मानव अधिकार कार्यकर्ता एवं पैरालीगल वॉलेंटियर श्री कमलाशंकर विश्वकर्मा द्वारा किया गया।
परिचर्चा को संबोधित करते हुए अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री अखिलेश धाकड़ ने बताया कि तीसरी लहर के लिए बचाव के लिए अभिभावकों को जागरूक होना पड़ेगा, बच्चों के मन मे भय का वातावरण न बनायें क्योंकि किसी भी बीमारी से लड़ने के लिए मानसिक रूप से मजबूत होना बहुत आवश्यक है। आपदा के समय प्रशासन तो अपना कर्तव्य करता ही है उसके साथ साथ हमें भी हर तरह से तैयार रहना होगा और केवल सरकार के ऊपर ही निर्भर नहीं रहना चाहिए ताकि कोरोना की तीसरी लहर के दौरान हम अपने आपको एवं परिवार को सुरक्षित रख सकें।
परिचर्चा के दौरान अधिवक्ता श्री रमेश मूंदड़ा ने कहा कि आपदा के समय हमारे अड़ोसी पड़ोसी का भी ख्याल रखना चाहिए क्योंकि रिश्तेदार नातेदार हम से काफी दूर रहते हैं और कई बार उन्हें सूचना पहुंचने में भी देर लग जाती है इसलिए हमें हमारे आस पड़ोस में रहने वाले की भी चिंता करनी है। हमेशा मास्क लगाकर रखना चाहिए हैंड सेनीटाइजर साथ में रखना चाहिए हम इन सब चीजों को कई बार गंभीरता से नहीं लेते हैं जिसके कारण समस्याएं आती है।
कार्यक्रम में पुणे महाराष्ट्र से इंजीनियर सुश्री गीतांजली चौधरी ने भी संबोधित किया और बताया उन्होंने कोविड काल के दौरान कई लोगों की मदद की और बताया उन्होंने 1 किट तैयार किया है जिसमें की कोरोना मरीज को इमरजेंसी के समय लगने वाली सभी चीजें उस किट में उपलब्ध है जैसे कि पल्स ऑक्सीमीटर, ग्लूकोमीटर, बीपी इंस्ट्रूमेंट, थर्मल गन, नेबुलाइजर, ऑक्सीजन सिलेंडर और भी प्राथमिक रूप से लगने वाले उपकरण एवं दवाइयां इस किट में समाहित है। कई बार अस्पताल ले जाते समय ही मरीज को प्राथमिक सुविधाएं नहीं मिलने से उसकी मृत्यु हो जाती है। इस कीट के द्वारा गंभीर मरीजों को तत्काल मदद मिल सकती है।
परिचर्चा को जिला चिकित्सालय नीमच के कोरोना वार्ड प्रभारी डॉक्टर मनीष यादव ने भी संबोधित करते हुए कहा कि कोरोना काल के दौरान अस्पताल के सभी कर्मचारियों एवं चिकित्सकों ने बहुत ही तन्मयता और लगन से मरीजों की सेवा की एवं अपने परिवार की चिंता को भूलाकर कई लोग जी-जान से मरीजों को बचाने में जुटे रहे। आने वाली तीसरी लहर से बचने के लिए जो सावधानियां रखनी चाहिए उन पर भी प्रकाश डाला।
परिचर्चा को संबोधित करते हुए राज्य शिक्षा केंद्र भोपाल के समन्वयक डॉ. अशोक व्यास ने बताया कि स्कूल में जाते समय बच्चों को हमेशा मास्क लगाकर रखने एवं हैंड सेनीटाइजर यूज करने की हमेशा मॉनिटरिंग करते रहना चाहिए एवं पालकों को अपने बच्चों को यह भी बताना जरूरी है कि स्कूल में एक दूसरे से भोजन एवं पानी की बोतल शेयरिंग ना करें एवं कई बार बच्चे किताबें एवं नोट्स भी शेयर करते हैं। इसके समाधान हेतु शासन के द्वारा पहली से लेकर 12वीं तक की सभी पुस्तकें ऑनलाइन उपलब्ध कराई गई हैं जिनका उपयोग छात्रों के द्वारा किया जा सकता है।
परिचर्चा में व्यवहार न्यायाधीश श्री मनीष पांडे द्वारा कोविड ड्यूटी पर तैनात अस्पताल कर्मियों एवं डॉक्टरों के साथ कई बार मरीज के परिजनों दुर्व्यवहार किया जाता है जिसमें सजा का प्रावधान भी है, इसके अलावा विधि संबंधी अन्य नियमों पर प्रकाश डाला।

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