शासन के गरीबों वाले राशन पर सेल्समैनो का चल रहा है खेल

मनासा:—-शासन के राशन का किस तरह चल रहा है खेल लंबे समय से जिम्मेदार अनजान किया फिर जानबूझकर नजरें झुका कर निकल जाते हैं राशन के वितरण की दुकानों के सामने से गरीब को शासन से मिलने वाली सामग्री पर भी खेल जो सीधा सीधा सरकार की योजनाओं पर पलीता लगाने से कम काम नहीं है

नहीं मिलती है उपभोक्ताओं को राशन दिए जाने वाली सामान की पर्ची

नीमच जिले मैं या देख सकते हैं कि तहसील क्षेत्र हो या ग्रामीण क्षेत्रो में यदि हम नजर डालें है तो राशन से मिलने वाले सामान कि उपभोक्ता को किसी भी उचित मूल्य के दुकानदार द्वारा उसको मिलने वाले सामान की पर्ची नहीं दी जाती है इसका क्या कारण है यदि उपभोक्ता को पर्ची दी जाए तो उससे यह स्पष्ट हो जाता है की उपभोक्ता को कितनी सामग्री मिलना है और दुकानदार के द्वारा क्या क्या सामग्री ली गई है और उसे क्या क्या मिल रहा है इस कारण दुकानदार द्वारा उसे पर्ची नहीं दी जाती है कई उपभोक्ताओं को गेहूं चावल के अलावा बाकी कोई सामग्री दुकानदारों द्वारा उपभोक्ताओं को नहीं दी जाती है जिसको लेकर आए दिन बहुत सी दुकानों पर विवाद के नजारे भी सार्वजनिक रूप से दिखाई देते हैं कई दुकानदारों के द्वारा सामग्री कम आने का कहकर टाल दिया जाता है जिसकी शिकायत भी उपभोक्ताओं द्वारा शासन सहित खाद्य विभाग के जिम्मेदारों तक पहुंचाई जाती है सवाल खड़ा होता है कि इतना सब कुछ होने के बाद भी जिम्मेदारों अधिकारियों का अनजान बना रहना भी कई शंकाओं को जन्म देता है जिसकी चर्चा आम जन द्वारा सार्वजनिक रूप से कहीं जाती है कि सब मिलीभगत का खेल है आमजन द्वारा कहीं जाने वाली बात यदि सत्य है तो फिर शासन में बैठे लोग आम उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा को लेकर कितने जागरूक हैं इसका अंदाजा भी आसानी से लगाया जा सकता है कि कितने महीनों से उपभोक्ता को दुकानदारों द्वारा पर्ची नहीं दी जा रही है पर्ची नहीं मिलने की शिकायत मनासा के ही उपभोक्ता व सामाजिक कार्यकर्ता नरेंद्र राठौड़ द्वारा 1 वर्ष पहले से नीचे से लेकर ऊपर तक के अधिकारियों से लेकर सीएम हेल्पलाइन पर भी की गई है मगर आज दिन तक शिकायतकर्ता को शासन प्रशासन के आला अधिकारी संतोष नहीं कर पा रहे हैं ऐसा क्या है कि इस सवाल पर जवाब देने में अधिकारी पीछे क्यों हट रहे हैं यह भी एक सवाल है

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