सड़क परिवहन मंत्रालय ने अगले 2-3 वर्षों के लिए 7 लाख करोड़ रुपये की बुनियादी ढांचा परियोजनाएं बनाई

केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी ने निवेशकों से आग्रह किया है कि वे आगे बढ़ कर बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में साहसपूर्वक निवेश करें। यह क्षेत्र राजमार्ग, मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क, वेसाइड सुविधाओं, रोपवे सहित कई परिसंपत्ति वर्गों तथा वेयरहाउसिंग ज़ोन और बहुत कुछ में निवेश के विविध अवसर प्रदान करता है।

मुंबई में आज राजमार्ग, परिवहन और रसद में निवेश के अवसरों पर राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुएश्री गडकरी ने कहा, “सड़क क्षेत्र में रिटर्न की आंतरिक दर बहुत अधिक है और इसलिए इसकी आर्थिक व्यवहार्यता के बारे में चिंता करने की कोई आवश्यकता नहीं है”।

श्री गडकरी ने कहा कि पहले भूमि अधिग्रहण के मुद्दों के कारण परियोजनाएं ठप हो जाती थीं। लेकिन हमने तय किया है कि 90 प्रतिशत भूमि अधिग्रहण पूरा होने और पर्यावरण मंजूरी प्राप्त होने से पहले परियोजना का आवंटन नहीं किया जाए। सड़क ढांचागत परियोजनाओं को गति देने के लिए अपने मंत्रालय द्वारा उठाए गए कई अन्य कदमों का हवाला देते हुए मंत्री महोदय ने कहा, “आप अपना विश्वास 110 प्रतिशत बनाए रखें।”

उन्होंने भारतमाला कार्यक्रम के तहत आने वाली परियोजनाओं के कई लाभों के बारे में भी बताया। “सड़क मार्ग से मुंबई से दिल्ली की यात्रा का समय एक वर्ष के भीतर 48 घंटे से घटकर 12 घंटे रह जाएगा; सड़क परियोजनाओं और मल्टीमॉडल बुनियादी ढांचा परियोजनाओं से रसद लागत कम होगी और विनिर्माण को बढ़ावा मिलेगा, निर्यात में वृद्धि होगी और अर्थव्यवस्था को बढ़ने में मदद मिलेगी।” उन्होंने कहा कि भारतमाला परियोजना राष्ट्रीय राजमार्ग विकास के लिए प्रमुख कार्यक्रम है, जिसमें संबद्ध बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के विकास के साथ-साथ माल ढुलाई और यात्री परिवहन की दक्षता में सुधार पर ध्यान केंद्रित किया गया है।

राष्ट्रीय सम्मेलन में निवेशकों और अन्य हितधारकों को बताया गया कि केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने अगले 2-3 साल में ही 7 लाख करोड़ रुपयों की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को निष्पादित करने की योजना बनाई है।

केंद्रीय मंत्री ने सरकार की वाहन स्क्रैपिंग नीति के लाभों के बारे में भी बताया। “इससे प्रदूषण कम होगा, कर राजस्व में सुधार होगा, ऑटोमोबाइल क्षेत्र के विकास में मदद मिलेगी, निर्यात को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार भी पैदा होंगे।”

उन्होंने कहा, “यह सभी के लिए फायदे की स्थिति है, जिसमें बड़े पैमाने पर निवेश आ सकता है।” वाहन-बेड़े के स्वैच्छिक आधुनिकीकरण नीति का उद्देश्य अनुपयुक्त और प्रदूषणकारी वाहनों को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने के लिए एक पारिस्थितिकी तंत्र बनाना है। इस नीति के तहतअगले 5 वर्षों में देश भर में लगभग 50-70 पंजीकृत वाहन स्क्रैपिंग सुविधाएं स्थापित की जाएंगी ताकि सुरक्षित तरीके से अनुपयुक्त वाहनों को स्क्रैप करने की अपेक्षित मांग पूरी की जा सके।

श्री गडकरी ने कहा कि भारत में ऑटोमोबाइल उद्योग का आकार 7.5 लाख करोड़ रुपये का है वह अगले 5 वर्षों में दोगुना होकर 15 लाख करोड़ रुपये का हो जाएगा। इलेक्ट्रिक वाहनों के बारे में बोलते हुए उन्होंने कहा, “हम फ्लेक्स इंजन पर एक एडवाइजरी जारी कर रहे हैं, दो-तीन वर्षों में, हमारे वाहन इलेक्ट्रिक वाहनों में परिवर्तित हो जाएंगे। इलेक्ट्रिक वाहनों की रनिंग कॉस्ट पेट्रोल से चलने वाले वाहनों के समान या उससे कम होगी।” उन्होंने इथेनॉल जैसे वैकल्पिक ईंधन पर भी जोर दिया और महाराष्ट्र परिवहन विभाग को पुणे में इथेनॉल से चलने वाले ऑटो रिक्शा शुरू करने के लिए कहा जहां पहले से ही तीन इथेनॉल वितरण स्टेशन मौजूद हैं। श्री गडकरी ने कहा कि “वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देने से अंततः स्क्रैपिंग उद्योग को भी मदद मिलेगी।”

संपत्ति मुद्रीकरण रोडमैप के बारे में बोलते हुएश्री गडकरी ने मुंबई-पुणे राजमार्ग का उदाहरण दियाजिसने राज्य और सरकार को ऊंची दर का रिटर्न दिया है। उन्होंने बताया कि “रिलायंस ने परियोजना के लिए 3,600 करोड़ रुपये की बोली लगाई थी। हालांकि हमने इसे एमएसआरडीसी के माध्यम से 1,600 करोड़ रुपयों में बनाने का फैसला किया। बाद में महाराष्ट्र सरकार ने इसे 3,000 करोड़ रुपये में मुद्रीकृत किया और अभी हाल ही में उसी परियोजना को फिर से 8000 करोड़ रुपये में मुद्रीकृत किया गया है।”

सड़क परिवहन मंत्रालय के सचिव श्री गिरिधर अरमाने ने बताया कि गति शक्ति कार्यक्रम के माध्यम से एकीकृत योजना और सभी बुनियादी सुविधाओं के समन्वित कार्यान्वयन को बढ़ावा मिल रहा है। “हम बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में आ रही बाधाओं को समझने के लिए रसद प्रभावशीलता का वैज्ञानिक अध्ययन कर रहे हैं। बाधाओं को दूर करने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने देश भर में 120 भीड़भाड़ वाले बिंदुओं की पहचान की है; शहरों में भीड़ कम करने के लिए रिंग रोड और बाइपास बनाए जा रहे हैं। सभी राज्यों की राजधानियों को कम से कम फोर-लेन राष्ट्रीय राजमार्गों से जोड़ने के बादअब हम देश के सभी महत्वपूर्ण आर्थिक केंद्रों को जोड़ने वाले एक्सप्रेसवे बनाने की योजना बना रहे हैं।”

सचिव महोदय ने बताया कि कैसे बेहतर नीतियों और निर्णय लेने से परिणामों में ठोस सुधार हुआ है। “ठेकेदारों के काम को सुविधाजनक बनाने के लिएहमने उन सभी प्रावधानों को हटा दिया हैजिनसे विवाद होता है और ठेकेदारों को बहुत तकलीफ और नुकसान होता है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने ठेकेदारों और अन्य कंपनियों के प्रबंध निदेशकों के साथ बैठक की और ईमानदार बातचीत के आधार पर राजमार्ग निर्माण में आने वाली समस्याओं का समाधान किया है। इसके परिणामस्वरूप पिछले साल 37 किलोमीटर प्रति दिन का रिकॉर्ड सड़क निर्माण हुआ है।

राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की अध्यक्षअलका उपाध्याय ने बताया कि प्राधिकरण ‘प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय योजना’ के तहत एकीकृत बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण के अनुरूप कई सुविधाओं और संबद्ध बुनियादी ढांचे का विकास कर रहा है। “नया जोर एमएमएलपी जैसे संबद्ध राजमार्ग पहलों के विकास और राजमार्गों के साथ रोपवे, फाइबर केबल तथा अन्य बुनियादी ढांचे की परियोजनाओं के माध्यम से अंतिम मील कनेक्टिविटी बनाने पर है। भारत माला परियोजना के हिस्से के रूप में लगभग 8,400 अत्याधुनिक ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे बनाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ये कॉरिडोर राष्ट्रीय राजमार्गों के बुनियादी ढांचे का चेहरा बदल देंगे और अर्थव्यवस्था में 5 ट्रिलियन डॉलर का योगदान करेंगे।

मुंबई में आज के राष्ट्रीय सम्मेलन में संभावित निवेशकों, उद्योग जगत के नेताओं और विशेषज्ञों ने भाग लिया।

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