हिंदी लेखिका संघ मध्यप्रदेश की फागोत्सव काव्य गोष्ठी संपन्न



भोपाल से संतोष योगी की खबर 24 मार्च को हिंदी लेखिका संघ की फागोत्सव, होली गीत और पारम्परिक लोकगीत प्रस्तुति के रूप में लेखिका संघ की अध्यक्ष अनीता सक्सेना के निर्देशन में ज़ूम मीट पर संपन्न हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रही उषा जायसवाल ने होली की शुभकामनाएँ देते हुए सभी की प्रस्तुतियों की सराहना की और कार्यक्रम में होली और भांग के गीतों संग झूमने की बात कही। मुख्य अतिथि के रूप में मोटिवेशनल स्पीकर, काउंसलर, लोकगीत गायिका और ‘मंजिलें’ संस्था की निदेशक दीपा श्रीवास्तव ने कार्यक्रम की भूरि-भूरि प्रशंसा की और स्वयं भी होली गीत और लोकगीत की प्रस्तुति से सभी का मन मोह लिया। विशिष्ट अतिथि की भूमिका निभाते हुए लोककला की संवाहक और कला साहित्य व संगीत को समर्पित संस्था ‘त्रिवेणी’ की संस्थापक ऋतुप्रिया खरे ने भी कार्यक्रम में ‘अवध’ से शामिल होते हुए राम और रामभक्त हनुमान के बीच होली के प्रसंग को गीत के माध्यम से प्रस्तुत करते हुए कार्यक्रम में चार चाँद लगा दिये।
कार्यक्रम का सञ्चालन नविता जौहरी और महिमा श्रीवस्तव वर्मा ने संगीतमय और रोचक काव्य पँक्तियों के साथ किया। सरस्वती वंदना करुणा श्रीवास्तव ने प्रस्तुत की एवं आभार ज्ञापन महिमा श्रीवास्तव वर्मा ने दिया।
कार्यक्रम में शामिल एकल और समूह प्रस्तुतियों में अवधी, बुन्देली, राजस्थानी, मालवी,मराठी हिंदी आदि भाषाओँ के होली गीत और लोक गीत शामिल थे। प्रस्तुतियाँ इस प्रकार रहीं ;
लीना बाजपेयी, नीलिमा पालीवाल और सखियों ने ऐसे कलियुग पे जाऊँ बलिहारियाँ, होली खेलें सुघड़ नारियाँ
नविता जौहरी ने ’म्हारी जिंदगाणी धूल मा मिला दी’ गाकर प्रस्तुति दी और उनका साथ महिमा श्रीवास्तव वर्मा ने मूक अभिनय से दिया।
आशा सक्सेना ने होली खेलन हम आईं रे, होली क्यों ना खेलें
नमिता सेनगुप्ता ने- होली नहीं नीक लागे बलम फगुआ बन के अइयो
हंसा श्रीवास्तव ने- राधा संग होली खेले नंदलाल
मधुलिका सक्सेना और शेफ़ालिका श्रीवास्तव ने ‘आज सखियाँ नहीं मोरे संग में, कन्हैया जू ने घेर लइ मधुबन में,’
उषा चतुर्वेदी और साथियों ने ‘मेरे बलमा बड़ो जलैया, दुख कासे कहूँ मोरी मैया
महिमा श्रीवास्तव वर्मा ने ‘सिया निकले अवधिया की ओर होलिया खेले रामलला’
मोनी माथुर ने पहने कुरते पर पतलून आधा फागुन आधा जून’
पुष्पा शर्मा ने ‘मोरी रंग दे रंगरेजवा ऐसी चुनरी’
करुणा श्रीवास्तव ने ‘कैसे खेलन जायें कान्हा संग होरी’
सरिता बघेला और साथियों ने ‘भर पिचकारी मारे कान्हा रोकें सखियाँ’
साधना श्रीवास्तव ने ‘रंग मत डारे रे साँवरिया, म्हारो गुज़र मारे रे
श्यामा गुप्ता, राधारानी चौहान, आशा सिन्हा कपूर और कुसुम श्रीवास्तव ने
सुधा दुबे, मंजू श्रोती और साथियों ने ‘मन डारे अटा पर काय ठाडी
दामिनी खरे ने ‘एक दिनां होली पे हमने छक के पीली भांग’
संध्या शर्मा ने लोकगीत गाकर और
शोभा भिसे और साथियों ने मराठी होली गीत की नृत्यमय प्रस्तुति दी ।

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