बेटियों को पढ़ाने व आगे बढ़ाने के लिए सभी को उठानी होगी सख्त जिम्मेदारी – युवा कमिनियुकेटर अशी चौहान

DG NEWS SEHORE

सीहोर से सुरेश मालवीय की रिपोर्ट

सीहोर । राष्ट्रीय बालिका दिवस के मौके पर घर घर जाकर जागरुक करते हुए कहा कि अपनी सोच को बदलना पड़ेगा तभी बेटियों को बचाया जा सकता है। यह समझाईश युवा कम्यूनिकेटर आशी चौहान ने ग्रामीणों को दी। आशी चौहान ने कहा कि, शास्त्रों और भगवान में देवियों को पहला स्थान दिया जाता है। हम लोग चांद तक पहुंच गए है। लेकिन बच्चियों और महिलाओं को लेकर आज भी हमारे समाज की सोच पाताल में ही है। इसलिए हम लोगों जिम्मेदारी के साथ बेटियों को बचाना होगा। शहरों में तो हालात फिर भी ठीक है। लेकिन गांवों में अभी हालात खराब है। इसलिए सरकार को गांवों में ज्यादा जागरुकता अभियान चलाना चाहिए। आशी चौहान ने ग्रामीणों को समझाइश देते हुए कहा कि, घर की रौनक और शान होती हैं बेटियां। परिवार पर अपनी जान तो लुटाती ही हैं। किसी शायर ने क्या खूब लिखा है, बेटियां सब के मुक़द्दर में कहां होती हैं, घर खुदा को जो पसंद आए वहां होती हैं।
चाल सालों से ग्रामीणों को कर रही जागरुक: आपको बता दें कि, युवा कम्यूनिकेटर आशी चौहान पिछले चार सालों में प्रदेश के पिछड़े इलाकों में जाकर बेटियों के प्रति ग्रामीणों को जागरुक कर रही है। इसके साथ ही आशी चौहान बच्चियों को आत्मरक्षा के गुर सिखाने के साथ साथ विज्ञान के बारे में भी जानकारी देती है।
1941 के बाद से लगातार घट रही बेटियों की संख्या: आशी चौहान ने कहा सरकार के तमाम प्रयासों के बावजूद भी जिले में लिंगानुपात लगातार घट रहा है। वर्ष 2011 की गणना के अनुसार 1 हजार पुरुषों पर मात्र 896 महिलाएं हैं। हांलाकि वर्ष 1941 में लिंग अनुपात में कुछ सुधार हुआ था और महिलाओं की संख्या एक हजार पुरुषों के मुकाबले 979 पर आ गई थी लेकिन उसके बाद से यह संख्या लगातार घटती जा रही है। उन्होने जानकारी देते हुए बताया कि प्रदेश में सबसे कम लिंगानुपात वाले जिले भिंड 838, मुरैना 839, वालियर 862, दतिया 875, शिवपुरी 877, छतरपुर 884, सागर 896 है।

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