विज्ञान प्रसारक सारिका घारू ने सूरज दा ढ़ाबा में बिना तंदूर ,चूल्हा एवं गैस के बनाया भोजन

DG NEWS SEHORE

सीहोर से सुरेश मालवीय की रिपोर्ट

सूरजधूप दी मैगी, धूप दी चाय बनाई सारिका घारू ने

सीहोर । बांस की टोकरी में मैगी बनी, मूंगफली को भूना गया इसके साथ लेमन टी भी टोकरी में ही बनाई गई ।इसमें न तो लाईटर और न ही माचिस की जरूरत पड़ी न गैस चुल्हा, बिना बिजली का हीटर या इंडक्शन चूल्हा ।यह सब किया गया नेशनल अवार्ड प्राप्त विज्ञान प्रसारक सारिका घारू ने सूरज का ढ़ाबा वैज्ञानिक कार्यक्रम में सारिका ने अपनी बाल वैज्ञानिक गतिविधियों में बांस की टोकरी में अंदर की ओर एल्युमिनियम फॉईल लगाकर इन्हें डिश का आकार दिया ।इसके केंद्र में बाहर से काला पेंट किये एक डिब्बे को रख कर इन्हें टोकरी सूर्य कुकर बनाया गया ।इनके काले डिब्बे में खाद्य सामग्री को मशाले एवं पानी मिलाकर रखा ।दूसरे कुकर में चाय की सामग्री को रखा गया तो तीसरे कुकर में मूंगफली के दाने को रखा गया ।लगभग 1 घंटे में तैयार थी- सूरजधूप दी मैगी ,धूप दी चाय । सारिका ने बताया कि सूर्य का प्रकाश अपने उच्च विकिरण के साथ लगभग 7 माह तक उपलब्ध रहता है बांस की टोकरी या अन्य घरेलू सामाग्री से कुकर तैयार करके इन दिनों प्रातः 8:00 से शाम 4:00 बजे के बीच 150 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान प्राप्त किया जा सकता है इनमें घरेलू भोजन का कुछ भाग बनाकर एलपीजी एवं अन्य कार्बनिक ईधन की बचत की जा सकती है । सारिका ने बताया कि सूरज दा ढ़ाबा घर के छत पर है बस जरूरत है उसे पहचानने की। कार्यक्रम का उद्देश्य आम लोगों को सूर्य की ऊर्जा के उपयोग के प्रति जागरूक करना है इस कार्यक्रम का आयोजन कोरोना कर्फ्यू के पूर्व में बच्चों को अपने घर पर ही वैज्ञानिक गतिविधियों प्रेरित करने किया गया।
कैसे बनाया- सूर्य के प्रकाश को एक स्थान पर केंद्रित करने के लिए एलुमिनियम फाईल का प्रयोग किया जाता है। यह रिफलेक्टर का काम करती है और टोकरी में आने वाले पूरे सूर्य प्रकाश को परावर्तित कर के बीच में रखे बर्तन पर केंद्रित कर देती है ।इस बर्तन को बाहर से काले रंग से रंगा जाता है काला रंग ऊष्मा का सबसे अच्छा अवशोषक होता है ।
टोकरी से तैयार कुकर केवल ₹110 में तैयार हो जाता है तथा आसानी से उपलब्ध सामग्री से बना है।

Leave a Reply