सेवादल कांग्रेस के द्वारा रविदास मंदिर में किया गया गुरु पुर्णिमा उत्सव का आयोजन

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गुरु को भगवान से भी श्रेष्ठ माना जाता है, गुरु ही भगवान तक पहुंचने का मार्ग बताते हैं-राकेश राय

सीहोर से सुरेश मालवीय की रिपोर्ट 8871288482

सीहोर । सेवादल कांग्रेस जिला सीहोर के अध्यक्ष नरेन्द्र खंगराले के द्वारा डॉ.अम्बेडकर नगर स्थित अनुसूचित जाति बाहुल्य वार्ड क्रं. 11 के संत रविदास मंदिर पर समाज के गुरु महात्मा गौतम बुद्ध बौद्धीसत्व संत सिरोमणी रविदास, संत कबीरदास, महात्मा ज्योतिराव फुले, संविधान निर्माता पूज्य डॉ.बाबा साहेब अम्बेडकर के चित्र पर माल्यार्पण एवं मोमबत्ती जलाकर खीर प्रसादी वितरण कर गरु पुर्णिमा के दिन को उत्सव के रुप में मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष डॉ. बलवीर तोमर के द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मध्यप्रदेश कांग्रेस सेवादल के प्रदेश सचिव पूर्व नपाध्यक्ष राकेश राय थे तथा कार्यक्रम की अध्यक्षता क्षेत्रीय पार्षदश्रीमति आरती नरेन्द्र खंगराले द्वारा की गई। कार्यक्रम के विशेष अतिथि जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सीताराम भारती, प्रीतम दयाल चौरसिया, दर्शन सिंह वर्मा, डॉ.अनीस खान, राजाराम बड़ेभाई, सुरेश साबू , राजीव गुजराती थे। कार्यक्रम में पधारे अतिथियों का जिला सेवादल कांग्रेस के अध्यक्ष नरेन्द्र खंगराले, ब्लाक कांग्रेस सेवादल के अध्यक्ष मांगीलाल टिमरई के द्वारा पुष्पमालाओं से स्वागत किया गया।
इस अवसर पर डॉ. बलवीर तोमर ने कहा कि गुरुपुर्णिमा के दिन शिष्य अपने गुरु की विशेष पूजा अर्चना करता है और यथाशक्ति दक्षणादान पुष्प, वस्त्र आदि भेट करता है। शिष्य इस दिन अपने सारे अवगुणों को गुरु के चरणों में अर्पित कर अपना सारा भार गुरु को दे देता है। उन्होने आगे बताया कि अपने गुरु से प्रार्थना करके शिष्य सदैव अपनी अज्ञानता और अहंकार को दूर करने की गुरुजी से प्रार्थना करता है, क्योंकि गुरु के बिना ज्ञान की कल्पना भी नही की जा सकती है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राकेश राय ने कहा कि गुरु पुर्णिमा को हिन्दु, जैन और बौद्धधर्म के अनुयाई उत्सव के रुप में मनाते हैं। गुरु को भगवान से भी श्रेष्ठ माना जाता है। क्योंकि गुरु ही भगवान तक पहुंचने का मार्ग बताता है। गुरु की महत्वता का वर्णन करते हुए संत कबीर ने कहा था कि गुरु गोविन्द दोऊ खड़े काके लागू पाये, बलहारी गुरु आपकी गोविन्द दिया बताय अर्थात गुरु और गोविन्द (भगवान) एक साथ खड़े हो तो किसे प्रणाम करना चाहिये। गुरु को अन्यथा गोविन्द को। ऐसी स्थिति में गुरु के श्रीचरणों में शीश झुकाना उत्तम है। जिनके ज्ञान रुपी प्रसाद गोविन्द के दर्शन करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। अध्यक्षता कर रही क्षैत्रीय पार्षद आरती नरेन्द्र खंगराले ने बताया कि ज्ञान बौद्ध कराती है हमें गुरुकुल की ज्ञान रुपी परम्परा। इसलिये हमारे देश को विश्व गुरु कहा जाता है। विशेष अतिथि सीताराम भारती ने कहा कि गुरु पुर्णिमा पर्व गुरुजनों को समर्पित है। इस दिन महाभारत के रचियता माहर्षि व्यास का जन्मदिन भी मनाया जाता है। कार्यक्रम के आयोजक नरेन्द्र खंगराले ने कहा कि भगवान बुद्ध, बौद्धीसत्व संत शिरोमणि रविदास जी महाराज, संत कबीर महात्मा ज्योतिराव फूले, संविधान निर्माता, डॉ.बाबा साहेब अम्बेडकर समाज के गुरु एवं दार्शनिक अध्यात्मिक विचारक और शिक्षक के रुप में प्रतिष्ठित हैं। बौद्ध धर्म के संस्थापक महात्मा गौतम बुद्ध ने बौद्धगया में ज्ञान प्राप्त करने के बाद आज के दिन अपना पहला उपदेश दिया था। उन्होने अपने पहले उपदेश में (जिसे अब धर्म चक्र परिवर्तन सुत्त कहा जाता है) अपने सर्वाधिक अनुशासित पांच शिष्यों को दिया था। जिन्हें सामूहिक रुप से पंच वर्कि के रुप में जाना जाता है। इसलिये बौद्ध धर्म के अनुयाईयों के लिये आषाढ़ पुर्णिमा तिथि का बहुत महत्व हैं। महात्मा गौतम बुद्ध के इन उपदेशों में मानव जीवन के लिये जरुरी सबक बताया गया है।
कार्यक्रम का संचालन सुनील दुबे के द्वारा किया गया। अंत में आभार व्यक्त धन्नालाल परचौले द्वारा किया गया। इस मौके पर प्रमुख रुप से राजेन्द्र नागर, पंकज शर्मा, श्यामलाल महोबिया, पन्नालाल खंगराले, सुरेन्द्र कचनेरिया, गंगाराम परसैया, शोभाराम अहिरवार, मुन्नालाल निरंजन, मोहन ठेकेदार, भंवरलाल सूर्यवंशी, देवबकस खेलवाल, हरिराम सूर्यवंशी, रतन पुरविया, घनश्याम जाटव, सुरेश महोबिया, मुन्नालाल मालवीय, मदनलाल मालवीय, बाबूलाल मालवीय, दयाराम गवाटिया, सूरज मंगरोलिया, सोनू मालवीय, अर्जुन जाटव, कमल सूर्यवंशी, बद्री दसवंत, अनिल गवाटिया, मोहन खेलवाल, हेमराज सूर्यवंशी, भंवरलाल मंगरोलिया, राजकुमार सेन, मीरा रैकवार, कौशल्या सेन, आशा गुप्ता आदि प्रमुख रुप से उपस्थित थे।

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