दो बेटियों ने अंतिम संस्कार कर मां की अंतिम इच्छा पूरी की

DG NEWS SEHORE

सीहोर से सुरेश मालवीय की रिपोर्ट 8871288482

सीहोर । भारतीय समाज की मान्य परम्पराओं और रिवाजों से परे हटकर नगर के कस्बे निवासी दो सगी बहनों ने अपनी मां की अंतिम इच्छा को पूर्ण करने के लिए उनकी मृत्यु के बाद अंतिम संस्कार से लेकर तर्पण तक की सभी रस्मे निभाकर अपने साहस और दृण विश्वास से सभी को चकित कर दिया। कस्बे से अपनी मां की अंतिम यात्रा में दो सगी बहने कंधो पर अपनी मां का पार्थिव देह उठाकर चल रही थी, तो यह ग़मगीन दृश्य देखने वालो की आंखों में बरबस आंसू छलक रहे थे। सीहोर के कस्बे के छीपापुरा निवासी संजय खत्री की धर्मपत्नी संतोष खत्री का लम्बी बीमारी के चलते निधन हो गया। स्वर्गीय संतोष खत्री विवाह के बाद से अपनी मुखरता के लिए अपने समाज में एक अलग स्थान रखती थी, वह जेंडर भेद की सख्त विरोधी रही। इसलिए उन्होंने अपनी दोनों पुत्रियों 25 साल की वर्षा खत्री और 16 साल की अनुष्का खत्री की पुत्र की तरह परिवरिश की और वह दोनों बेटियों को आफ़ीसर बनाने की हसरत लिए उन्हें बेहतर पढ़ाई का माहौल दे रही थीं। इसी दौरान उन्हें अचानक केंसर हो गया, उन्होंने इस बीमारी को हराने के लिए जी तोड़ मेहनत की मगर आखिरकार वह जिन्दगी की जंग हार गई और उनका 27 जुलाई को निधन हो गया।

मां चाहती थी की बिटियां ही दे मुखाग्नि

कैंसर जैसी लाइलाज बीमारी के दौरान उन्होंने अपनी बेटियों से संकल्प लिया कि अगर उनका निधन हो जाए तो मेरी दोनों शेर दिल पुत्रियां अपनी मां को न केवल मुखाग्नि दे अपितु सभी रीति रिवाज पूरे करे ताकि समाज को एक संदेश मिले और समाज में जेंडर भेद की परम्परा का उन्मूलन हो। जब गंभीर बीमारी के चलते जिंदगी की जंग हारी संतोष खत्री की अंतिम यात्रा उनके निज आवास से उठी तो मान्य परम्पराओं से परे उनकी आंखों की तारा कहलाने वाली दोनों पुत्रियां 25 साल की वर्षा खत्री और 16 साल की अनुष्का खत्री की पुत्र की तरह ही अपनी मां की अर्थी को पूरे समय कंधा देकर श्मशान तक लाई। दोनों बेटियों ने अपनी मां को मुखाग्नि दी। भारतीय समाज की मान्य परंपराओं और रिवाजो से परे हटकर नगर के कस्बे निवासी दो सगी बहनों ने अपनी मां की अंतिम इच्छा को पूर्ण करने के लिए उनकी मृत्यु के बाद अंतिम संस्कार से लेकर तर्पण तक की सभी रस्मे निभाकर अपने साहस और दृण विश्वास से सभी को चकित कर दिया है।

पूरे रिवाज पुत्रियों ने ही किए संपन्ना

अपनी मां की अंतिम इच्छा को पूर्ण करने के लिए इन दोनों बेटियों ने मुखाग्नि के बाद तीसरे में मां की अस्थियों का संचय किया और उनका तर्पण नर्मदा जाकर पूरे विधि विधान से किया। इस दौरान मरणोपरांत की जाने वाली सभी धार्मिक क्रियाएं कन्धा देना, मुखाग्नि, अस्थि संचय से लेकर तर्पण जो की भैरुंदा तहसील के नीलकंठेश्वर नर्मदा घाट पर किया गया सभी इन दोनों बेटियों द्वारा किया गया

Leave a Reply