किसान को अमरूद और मुनगा ने बनाया खेती को लाभ का धंधा

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सीहोर से सुरेश मालवीय की रिपोर्ट 8871288482

सीहोर । परंपरागत खेती के साथ ही फल और सब्जी की खेती से किसान दिनेश लोधी ने अपनी आमदानी बढ़ा ली है। जितना लाभ गेहूं, चना तथा सोयाबीन की खेती से होता था उससे कहीं अधिक लाभ फलों और सब्जी की खेती हो रहा है। जहांगीरपुर निवासी किसान दिनेश लोधी ने बताया कि मेरे परिवार में कुल तीन हेक्टेयर कृषि भूमि है। मेरे परिवार में हम चार भाई है और सभी पहले से परम्परागत रूप से गेहूं, चना व सोयाबीन की खेती करते थे। इस खेती में प्राकृतिक आपदा के दौरान बहुत नुकसान उठाना पढ़ता था। परंपरागत खेती से आय में लगातार कमी आने के कारण पलायन की स्थिति निर्मित हो गई थी।

दिनेश ने बताया कि किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग की आत्मा परियोजना के तहत आयोजित कृषक संगोष्ठी कार्यक्रम में सम्मलित हुआ। इस संगोष्ठी में शामिल होने के बाद मैंने पलायान का विचार त्याग दिया और नए ढंग से खेती करने का विचार किया। इस संगोष्ठी में आए कृषि विभाग के वैज्ञानिकों व अधिकारियों ने फसल विविधीकरण पर विस्तृत तकनीकी जानकारी प्राप्त की। मैंने कृषि फसलों के साथ-साथ उघानिकी फसलों विशेषरूप से बागवानी फसलो अमरूद, मौरिंगा की खेती करन तय किया और दो वर्ष पूर्व एक एकड़ रकबे में पिंक ताईवान नामक अमरूद के पौधे लगाए। इसके एक साल बाद दो एकड़ में वीएनआर के अमरूद व ओडीसी किस्म के मौरिंगा के पौधे लगाए। दिनेश ने बताया कि इस वर्ष मुझे एक एकड़ रकबे से दो लाख 40 हजार रुपये की अमरूद की फसल से आय प्राप्त हुई। अभी वर्तमान में चार एकड़ में कृषि फसले व 03 एकड़ में उद्यानिकी फसलों की खेती की जा रही है। आगले साल पूरे तीन हेक्टेयर भूमि पर उद्यानिकी फसलों की खेती करने का मन बनाया है।

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