अमानक चना काण्ड: अधिकारियो ने अपने पाप धोने के लिए किया व्यापारियो को चूना लगाने का प्रयास,लेकिन फैला रायता

बी.एल शाक्य, ब्यूरो चीफ

शिवपुरी। खबर प्रशासन को बदनाम करने वाली आ रही हैं,कि भ्रष्टाचार करने वाले अधिकारियो द्धवारा अपने पाप धोने के लिए सीधे-सीेधे धोखाधडी करने का प्रयास किया हैं। अभी तक आपने सुना होगा कि किसी आम आदमी ने धोखाधडी कर सरकारी पैसा खा लिया,या किसी अधिकारी ने भ्रष्टाचार करके पैसा डकारा हैं,लेकिन यह खबर हैं भ्रष्टाचार के काण्ड से जुडते हुए भ्रष्ट अधिकारियो के द्धवारा अपने पापो को उतारने के प्रयास में व्यपारियो से धोखाधडी करने का प्रयास किया हैं,लेकिन इसमें वह पूरे सफल नही हो सके।
खबर जिले में हुए समर्थन मूल्य घोटाले के काण्ड से जुडी है। इस महाघोटाले का सबसे बडा अध्याय कोलारस के श्रीजी वेयर में रचित हुआ हैं। इस पूरे मामले को समझने के लिए थोडा पीछे चलना होगा,इस श्रीजी वेयर को कलेक्टर के आदेश से 1 जून को सील्ड अमानक चना और अन्य जींस खरीदने के आरोप में सील किया गया। आरोप गंभीर थे कि इस श्रीजी वेयर में जो बेहटा सोसाइटी द्धवारा चना खरीदी की गई थी उसमें कंकड और सिंध की रेत मिलाई गई थी।
कोलारस एसडीएम आशीष तिवारी ने स्वयं श्रीजी वेयर हाउस पर बेहटा सोसायटी के संचालको द्धवारा चने में सिंध की रेत मिला चना तुलाते हुए पकडा था। इसके बाद ही इस चने में रेत काण्ड का खुलासा हुआ और मीडिया की सुर्खिया बना। बताया जा रहा है कि करीब 3380 क्विटंल चने को कलेक्टर के द्धवारा नियुक्त टीम ने जांच कर अमानक घोषित किया था।
बताया जाता हैं कि नेफेड ने 27156 क्विटंल चने को अमानक घोषित कर दिया था। और कहा कि इस अमानक चने का भुगतान नेफेड नही करेगी,यह पत्र विधिवत कलेक्टर शिवपुरी अनुग्रह पी को जारी किया गया। कोलारस के श्रीजी बेयर हाउस में ही लगभग 3380 क्विटल चना अमानक रखा गया इसकी बोली पिछले 10 अक्टूबर को कोलारस के स्थानीय व्यापारियो द्धवारा लगाई और इस अमानक चने को 3525 में खरीदा गया। 

इसमे प्रशासन को लगभग 1095 रू प्रति क्विटल का नुकसान हुआ और प्रशासन को लगभग 40 लाख का घाटा हुआ। अब 40 लाख के घाटे को कौन पूरा करेंगा। इस कारण बोली को कलेक्टर ने स्वीकृत न करते हुए अस्वीकृत कर दिया। 
इस घोटोले के कई कर्ताधर्ता ने जिले से अपना ट्रासफंर कराकर बचने का प्रयास किया।। चूकि नेपेड ने चने के भुगतान को लेकर हाथ खडे ​कर दिए हैंं ओर जिला प्रशासन को इस चने का भुगतान किसानो को करना हैं। इसलिए ​काण्ड के कर्ताधर्ता अधिकारियो ने इस भ्रष्टाचार के पाप धोने के लिए व्यापारियो को चूना की रणनीति तैयार की। 
बताया जा रहा हैं कि 11 नंबवर को पुन:​श्रीजी वेयर हाउस में रखे चने सहित अमानक जिंसो को पुन:एनबीएससी कंपनी से आनलाईन टेंडर लगबाकर बोली के लिए कॉल किया गया। फर्क इतना आया कि पहले बोली मे स्थानीय स्तर के व्यापारियो को बुलाया गया था,लेकिन इस बोली में कोलारस के व्यापारियो को दूर रख इस अमानक चने को मानक बताकर ईटेंडर कॉल किया और देश भर के व्यापरियो से बोली लगवाई गई। बताया गया हैं कि इस चने को देखने के लिए 9 नंबवर को देश भर से व्यापारी देखने भी आए थे। अब व्यापारियो का आरोप हैं कि यह चना हमे दिखाया नही गया।  
बताया जा रहा हैं कि श्रीजी वेयर आउस के कर्ताधर्ताओ ने 3386 क्विंटल चना,416 क्विटल मसूर और 77 क्विंटल सरसों की बोली लगवाई गई। वही सरकार ने इस माल को,चना 4620 रुपये,सरसों 4200 रूपये,मसूर 4400 रुपये खरीदा गया। 

यह तो सब ठीक था लेकिन आज जिन व्यापारियो ने इस माल को खरीदा वह इस माल को लेने आज श्रीजीबेयर हाउस पहुंचे। जब उन्होने इस चने सहित बाकी जिंसो को देखा तो व्यापारियो ने माल लेने से मना कर दिया ओर कहा कि हमे फ्रेस माल दिखाकर इस चने की बोली लगवाई थी।
और आज आके इस माल को चैक किया तो व्यापारी भी चौक गए यह माल इस रेट में लेने योग्य नही था हमारे साथ 420 की गई हैं। अब व्यपारियो के द्धवारा अपने द्धवारा बोली लगाने से पूर्व जमा किए गए 5 प्रतिशत रकम को वापस करने की डिमांड करने की खबर आ रही हैं। 
इस मामले में अपने राम का कहना हैं कि जिले में हुआ यह अमानक चना घोटाला अभी भी अधिकारियो की गले का फांस बना हुआ है। पहले अमानक चना बताकर व्यपारियो को बोली लगवाई गई,लेकिन इस बोली में प्रशासन को 40 लाख का नुकसान हो रहा था और इतनी बडी रकम को कैसे मैनेज किया जाएगा यह सवाल बडा बन रहा था और इधर किसानो का भुगतान करने प्रेशर बड रहा था। 
इस कारण इस माल को खपाने के लिए इस काण्ड में फंसे अधिकारियो ने अपने पाप धोने के लिए व्यापारियो को चूना लगाने के लिए अधिकारियो ने साफ दिखाकर कंकड पत्थर वाला चना ठीकाने लगाने की पूरी रणनीति तैयार की थी। रणनीति सफल होते भी दिख रही थी बिना किसी अडचनो के बोली भी संपन्न हो गई। रेट में अनुमानित मिल गए,लेकिन माल उठाने के समय में पुन:रायता फैल गया। 

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