कवि हरिवंश राय बच्चन जी की प्रेरणादायक कविता

शत्रु ये अदृश्य है विनाश इसका लक्ष्य है कर न भूल, तू जरा भी ना फिसलमत निकल, मत निकल, मत निकल हिला रखा है विश्व

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