सीता जैसी नारी भी जब आदर्शों की सूली झूल गई कर प्रणाम इस दुनिया को इस धरती में

सीता जैसी नारी भी जबआदर्शों की सूली झूल गईकर प्रणाम इस दुनिया कोइस धरती में वह समा गई। शीर्षक :- अबला_ नहीं सबला हूंविधा – कविता

शीर्षक :- अबला_ नहीं सबला हूंविधा – कविता सीता जैसी नारी भी जबआदर्शों की सूली झूल गईकर प्रणाम इस दुनिया कोइस धरती में वह समा गई।। उठो जागो है ‘…

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