वैक्सीन की प्रथम डोज आंशिक सुरक्षा, दूसरी डोज मतलब पूरी सुरक्षा



वैक्सीनेशन का शत-प्रतिशत लक्ष्य प्राप्त करने प्रदेश में मुख्यमंत्री श्री Shivraj Singh Chouhan की पहल पर 25 एवं 26 अगस्त को दो दिवसीय अभियान चलाया जाएगा।

कोरोना के विरूद्ध पूरी तरह से रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित करने के लिए वैक्सीनेशन काफी कारगर साबित हो रहा है

वैज्ञानिक तथ्य कहते हैं कि वैक्सीन की दोनों डोज समय पर लग जाने से व्यक्ति के कोरोना संक्रमित होने की संभावना 93 प्रतिशत तक घट जाती है।

साथ ही अस्पताल में भर्ती मरीजों की मृत्यु की संभावना भी नगण्य हो जाती है। प्रदेशवासियों को कोरोना संक्रमण से बचाने के लिये संवेदनशील राज्य सरकार लक्षित समूह को वैक्सीन का सुरक्षा कवच देने के लिए कटिबद्ध है।

कोरोना संक्रमण की पहली और दूसरी लहर ने विश्व के अधिकांश देशों को अपनी चपेट में ले लिया था। कोरोना काल में अनेकों ने अपनी जान भी गंवाई। कोरोना के साथ लड़ाई में भारत ने कम समय में स्वदेशी वैक्सीन तैयार कर एक अनूठा उदाहरण पूरे विश्व के सामने प्रस्तुत किया।

वैक्सीन का निर्माण जितनी तेजी से किया गया, उतनी ही रफ्तार से प्रदेशों में वैक्सीन पहुँचाई भी गई। इसके बाद प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार ने “सबको वैक्सीन-नि:शुल्क वैक्सीन” मंत्र देकर वैक्सीन तक सभी की पहुँच सुनिश्चित की।

वैक्सीन की उपलब्धता के साथ उसके उपयोग में मध्यप्रदेश पूरे राष्ट्र में अग्रणी रहा।

वैक्सीन के द्वितीय डोज का महत्व

कोरोना महामारी से बचाव के तौर पर रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित करने के लिए कोविड-19 के दोनों डोज लगवाना अत्यन्त आवश्यक है।

कोविड-19 टीके का प्रथम डोज मनाव शरीर में आंशिक सुरक्षा प्रदान करता है, जिसके लगने के बाद भी संक्रमित होने का खतरा बना रहता है। वैक्सीन का द्वितीय डोज समयावधि में लगवाने से वैक्सीन की एफिकेसी सर्वाधिक रहती है।

प्रदेश में अभी दो प्रकार की वैक्सीन कोविशील्ड और कोवैक्सीन लगाई जा रही है। चिकित्सकीय एवं वैज्ञानिक आधार पर कोविशील्ड वैक्सीन की प्रथम डोज लेने के 84 दिन बाद द्वितीय डोज और कोवैक्सीन की प्रथम डोज लेने के 28 दिन बाद द्वितीय डोज लेना जरूरी है।

वैक्सीन की द्वितीय डोज लगने के 2 से 3 सप्ताह बाद ही शरीर में कोरोना बीमारी के विरूद्ध प्रतिरोधक क्षमता पूर्ण रूप से विकसित होती है। साथ ही शरीर एक से अधिक प्रकार की एंटीबॉडी तैयार करता है जो कोरोना और उसके अन्य वेरिएंट के विरूद्ध बचाव करने में सहायक होती है।

कोरोना से बचाव के लिए वैक्सीनेशन सिर्फ सरकार की ही नहीं, समाज की जिम्मेदारी भी है। हर नागरिक को स्व-प्रेरणा से आगे आकर सरकार द्वारा दिए जा रहे वक्सीन के सुरक्षा कवच को अपनाना होगा।

यह अतिश्योक्ति नहीं होगी कि मध्यप्रदेश में वैक्सीनेशन के लिए चलाए गए प्रथम टीकाकरण महाअभियान में राष्ट्रीय स्तर पर जो सफलता मिली, उसमें जन-भागीदारी की महत्ता को नकारा नहीं जा सकता है। प्रदेश में अभियान का दूसरा चरण 25 एवं 26 अगस्त को होने जा रहा है।

प्रथम महाअभियान की तरह इस महाअभियान में भी राज्य सरकार के प्रयासों के साथ जनता की भागीदारी भी बहुत जरूरी होगी। यूं तो वैक्सीनेशन की दोनों डोज लगवा लेने के बाद काफी हद तक कोरोना संक्रमण का प्रभाव कम हो जाता है। इसके बावजूद भी सजग और सर्तक रहने की आवश्यकता है।

कोरोना वायरस के प्रति अनुकूल व्यवहार को अपनाते रहना होगा, जिसमें मास्क लगाना, हाथों को समय-समय पर सेनेटाइज करना, ज्यादा भीड़-भाड़ न करना और न ही उसमें शामिल होने जैसी गतिविधियों को अपनाते रहना होगा। तभी हम अपने आपको और समाज को कोरोना वायरस से बचा पाएंगे।

राज्य सरकार ने कोरोना संक्रमण को खत्म करने के लिये जो भगीरथी प्रयास किये वह किसी से छिपे नहीं हैं। कोरोना की जाँच से लेकर उपचार की जो व्यवस्थाएँ की गई, उससे प्रदेश में कोरोना संक्रमण को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सका है।

वैक्सीन का सुरक्षा कवच हर नागरिक को मिल जाए, यह प्रयास राज्य की संवेदनशील सरकार ने किया है। इन प्रयासों में आम नागरिक के साथ स्वयंसेवी संस्थाओं, कोरोना वॉलेंटियर्स, शहरी-ग्रामीण जन-प्रतिनिधियों के साथ समाज के हर वर्ग को आगे आकर अभियान में सहयोग करना होगा।

वैक्सीनेशन के आंकड़ों पर यदि नजर डाले तो हम पायेंगे कि मध्यप्रदेश में वैक्सीनेशन के लिए लक्षित समूह की संख्या 5 करोड़ 49 लाख है, जिसके विरूद्ध अब तक प्रदेश में 4 करोड़ से अधिक लोगों को वैक्सीन के डोज लगाए जा चुके हैं।

इनमें से वैक्सीन की दूसरी डोज 65 लाख से अधिक लोगों को लग चुकी है। वैक्सीनेशन का लक्ष्य पूरा करने के लिये मध्यप्रदेश में टीकाकरण महाअभियान का दूसरा चरण 25 अगस्त से प्रांरभ किया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य वैक्सीन के दूसरे डोज का कव्हरेज बढ़ाना भी है।

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