पांच पौधों से की वर्टिकल गार्डन की शुरुआत, आज ज्यादा से ज्यादा पौधों की कर रहीं देखभाल

शुध्द वातावरण के साथ गार्डन में उगाई गई सब्जियों का किया जा रहा उपयोग वर्टिकल गार्डनिंग की तरफ आकर्षित हो रहे शहर के युवा, छतों या आंगन पर उगा रहे सब्जियां

DG NEWS BHOPAL

संवाददाता सुरेश मालवीय 8871288482

भोपाल । आज से समय में स्वस्थ्य रहना, स्वच्छ वातावरण और शुध्द खाना इंसान के लिए चुनौती बन गया है। ऐसे में अब धीरे-धीरे लोग अपने घरों की छत पर वर्टिकल गार्डनिंग की ओर बढ़ रहे हैं। ऐसे में इन वर्टिकल गार्डनिंग के जरिये लोगों को स्वच्छता वातावरण के साथ-साथ ताजी सब्जियां मिल रही है। अपनी घर के पास जगह पर वर्टिकल गार्डनिंग कर रहीं आशी चौहान का कहना है कि, आजकल बाजार में केमिकल युक्त सब्जियों की भरमार है। जल्द और वजनदार उगाने के चक्कर में सब्जियों में तमाम तरह के इंजेक्शन लगाए जा रहे है। जिससे इसका सीधा असर हमारे स्वास्थ्य पर पड़ता है। ऐसे में हम लोगों ने अपने घर पर कम स्पेस में ही वर्टिकल गार्डनिंग करने के साथ ही सब्जियों को भी उगा रहें है। साथ ही फूले के जरिये आसपास के वातावरण को भी महका रहें हैं। आज हमारे पास ज्यादा से ज्यादा पौधे हैं। साथ ही हम अपने गार्डन में उगाई जा रही सब्जियों का भी सेवन कर रहें हैं।

जून में की थी शुरुआत: आशी चौहान ने बताया कि, कोरोना की दूसरी लहर के चलते लॉकडाउन में किसी भी तरह का मैं सोशल वर्क नहीं कर पा रही थी। इसके साथ ही सोशल मीडिया पर सब्जी वालों द्वारा सीवेज के पानी से सब्जी धोने के वीडियो देखकर मैं पूरी तरह से सहम गई थी। ऐसे में हमने घर पर सब्जी उगाने और गार्डनिंग करने मन बनाया। इसके बाद हमने ग्वालियर कृषि विवि के प्रोफेसर अवधेश भार्गव से संपर्क कर वर्टिकल गार्डन के साथ ही सब्जी उगाने को लेकर जानकारी मांगी।

पांच पौधों से की थी शुरुआत: प्रोफेसर भार्गव की सलाह के बाद हमने चार इमली स्थित नर्सरी से तीन फूल (गैंदा, गुलाब, चंपा) के पौधे साथ ही हरि मिर्ची, और बेगन के बीज लेकर आए। इसके बाद हमने अपनें आंगन पर 100 वर्गफीट में गार्डनिंग की शुरुआत की। शुरआत में पांच में एक भी पौधा जीवित नहीं रह पाया। जिससे बहुत निराशा हुई। इसके बाद एक बार फिर से ग्वालियर कृषि विवि संपर्क किया गया तो, प्रोफेसर भार्गव ने बताया कि, गार्डनिंग के लिए पौधों को पानी देने के अलावा कीटाणुओं से बचाने के लिए समय समय पर कीटनाशक देना भी जरुरी है। तभी पौधे जीवित रह सकते है। आज हमारे पास ज्यादा जीवित पौधें हैं।

किचिन वेस्ट से बनाई खाद: इन पेड़ों की खाद देने के लिए किचिन से निकलने वाली खादी सबसे वेस्ट है। एक तो इसमें किसी तरह का कैमिकल नहीं होता। साथ ही यह हमे घर में ही आसानी से उपलब्ध हो जाती है। इसके साथ ही गोबर की भी खाद का इस्तेमाल किया गया है। इसके साथ ही इन पौधों की समय समय पर कटाई करने से अपने मनमाफिक इनको शेव दिया जा सकता है।

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