अयोध्या विवाद / सुप्रीम कोर्ट आज सुनाएगी फैसला; मोदी ने कहा- फैसला किसी की हार-जीत नहीं, यह सद्भावना की परंपरा को बल दे

सीजेआई रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ सुबह 10.30 बजे फैसला सुना सकती है

40 दिन तक सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद 16 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा था

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा- अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट का जो भी फैसला आएगा, वो किसी की हार-जीत नहीं होगा

उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, दिल्ली और कर्नाटक में सभी स्कूल-कॉलेज बंद रहेंगे

DG News
Nov 09, 2019, 12:32 AM

नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट की 5 सदस्यीय संविधान पीठ शनिवार को अयोध्या विवाद पर फैसला सुनाएगी। न्यूज एजेंसी के मुताबिक, अदालत ने इसकी शेड्यूलिंग कर ली है।सुबह 10.30 बजे चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली बेंच फैसला सुना सकती है। बेंच ने 40 दिन तक हिंदू और मुस्लिम पक्ष की दलीलें सुनने के बाद 16 अक्टूबर को फैसला सुरक्षित रख लिया था।शिवसेना ने कहा- हमने सरकार से राम मंदिर के निर्माण को लेकर कानून बनाने का अनुरोध किया था लेकिन सरकार ने ऐसा नहीं किया। अब जब सुप्रीम कोर्ट का फैसलाआएगा तो सरकार को इसका श्रेय नहीं लेना चाहिए। फैसले के मद्देनजरउत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, दिल्ली और कर्नाटक में सभी स्कूल-कॉलेज बंद रहेंगे।
इससे पहलेसुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव आरके तिवारी, डीजीपी ओमप्रकाश सिंह समेत कई वरिष्ठ अफसरों से मुलाकात की। इस दौरान चीफ जस्टिस ने अयोध्या केस में फैसला आने से पहले प्रदेश की सुरक्षा तैयारियों को लेकर चर्चा की।संविधान पीठ की अध्यक्षता कर रहे चीफ जस्टिस रंजन गोगोई 17 नवंबर को रिटायर होंगे।
ये फैसला भारत की शांति, एकता और सद्भावना को और बल दे:प्रधानमंत्री मोदी
मोदी ने कहा- अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट का जो भी फैसला आएगा, वह किसी की हार-जीत नहीं होगा। देशवासियों से मेरी अपील है कि हम सब की यह प्राथमिकता रहे कि ये फैसला भारत की शांति, एकता और सद्भावना की महान परंपरा को और बल दे।
‘देश की न्यायपालिका के मान-सम्मान को सर्वोपरि रखते हुए समाज के सभी पक्षों ने, सामाजिक-सांस्कृतिक संगठनों ने, सभी पक्षकारों ने बीते दिनों सौहार्दपूर्ण और सकारात्मक वातावरण बनाने के लिए जो प्रयास किए, वे स्वागत योग्य हैं। कोर्ट के निर्णय के बाद भी हम सबको मिलकर सौहार्द बनाए रखना है।’
‘अयोध्या पर कल सुप्रीम कोर्ट का निर्णय आ रहा है। पिछले कुछ महीनों से सुप्रीम कोर्ट में निरंतर इस विषय पर सुनवाई हो रही थी, पूरा देश उत्सुकता से देख रहा था। इस दौरान समाज के सभी वर्गों की तरफ से सद्भावना का वातावरण बनाए रखने के लिए किए गए प्रयास बहुत सराहनीय हैं।’
सुरक्षाबलों की 47 कंपनियां अभी भी तैनात
अयोध्या विवाद पर फैसला आने के मद्देनजर उत्तर प्रदेश में तीन दिन स्कूल-कॉलेज बंद रहेंगे। 12 नवंबर को कार्तिक पूर्णिमा का अवकाश है।
अयोध्या जिले को चार जोन- रेड, येलो, ग्रीन और ब्लू में बांटा गया है, जिनमें 48 सेक्टर बनाए गए हैं। विवादित परिसर, रेड जोन में स्थित है।
अयोध्या पुलिस के मुताबिक, सुरक्षा योजना ऐसी बनाई गई है, जिससे एक आदेश पर पूरी अयोध्या को सील किया जा सके। फिलहाल वहां सुरक्षाबलों की 47 कंपनियां तैनात हैं।
सोशल मीडिया पर किसी भी सम्प्रदाय के खिलाफ भड़काऊ कंटेंट के प्रसार पर नजर रखने के लिए जिले के 1600 स्थानों पर 16 हजार वॉलंटियर तैनात किए।
अयोध्या के डीएम अनुज झा ने कहा- प्रशासन ने तैयारियां पूरी कर ली हैं। फैसले के बाद स्कूलों के खुलने के संबंध में भी बातचीत की जा चुकी है।
रेलवे पुलिस (आरपीएफ) ने सभी जोन कार्यालयों को प्लेटफॉर्म, स्टेशन और यार्ड पर खास निगरानी रखने को कहा है।
भीड़भाड़ वाले 78 स्टेशनों पर सुरक्षा बढ़ाने को कहा गया है, जिनमें मुंबई, दिल्ली, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश के स्टेशन शामिल हैं।
आरपीएफ ने अपने सभी कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द कर दी हैं। रेलगाड़ियों में भी अतिरिक्त बल तैनात करने की बात कही है।
दिल्ली पुलिस ने जिला पुलिस उपायुक्तों और हाउस स्टेशन अफसरों को सामुदायिक संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने का निर्देश दिए हैं।
मध्यप्रदेश के सभी सरकारी, निजी स्कूलों और कॉलेजों में कल छुट्‌टी की घोषणा की गई है। भोपाल के जिलाधिकारी ने जिले में धारा 144 लागू कर दी है।
सुरक्षा के मद्देनजर विभिन्न मामलों में 238 संवेदनशील पाइंट चिंन्हित किए गए हैं, जहां सुरक्षा के लिए फोर्स तैनात है। इनमें हिंदू व मुस्लिम धार्मिक स्थल, मंदिर मस्जिद आदि शामिल हैं। 
40 दिन तक सुनवाई के दौरान 6 प्रमुख बिंदुओं पर हिंदू-मुस्लिम पक्ष की दलीलें
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विवादित जमीन को 3 हिस्सों में बांटने के लिए कहा था

2010 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि अयोध्या का 2.77 एकड़ का क्षेत्र तीन हिस्सों में समान बांट दिया जाए।
एक हिस्सा सुन्नी वक्फ बोर्ड, दूसरा निर्मोही अखाड़ा और तीसरा रामलला विराजमान को मिले। हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में 14 याचिकाएं दाखिल की गई थीं।

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