आईओडब्ल्यू के पास नहीं है स्टॉफ, कैसे करें मरम्मत, जर्जर आवासों में रह रहे रेलकर्मी

न्यू यार्ड क्षेत्र के 1500 आवास बदहाली के कगार पर

आईओडब्ल्यू के पास नहीं है स्टॉफ, कैसे करें मरम्मत, जर्जर आवासों में रह रहे रेलकर्मी

इटारसी. यू यार्ड में बने चार दशक से ज्यादा पुराने 1500 रेलवे आवास है, जोकि पूरी तरह जर्जर हो चुके हैं। सालों से मेंटनेंस न हो पाने से कर्मचारी और उनका परिवार इन जर्जर मकानों में रहने को मजबूर है। कभी छत से प्लास्टर गिर रहा, तो दीवारों में क्रेक आ गया। ऐसे में कभी भी कोई बड़े हादसे से इंकार नहीं किया जा सकता है।
इटारसी का न्यू यार्ड स्थित रेलवे के आवास पूरी तरह बदहाल हो चुके हैं। फिर भी कर्मचारी इसमें रहने को मजबूर है। इन जर्जर आवासों से परेशान और हादसे के डर से कई कर्मचारी तो इन आवासों को छोड़कर शहर के अन्य इलाके में निजी या किराए के आवास में शिफ्ट हो गए है। 60 फीसदी वो तकनीकी और रनिंग स्टॉफ है, जो 20 से 30 घंटे काम करके थके हारे आते हैं, तो उन्हें इन जर्जर आवासों में जीवजतुंओं से लेकर टूटे प्लास्टर या क्रेक हो चुके दीवारों के बीच रहने को मजबूर होना पड़ रहा है।

मरम्मत करने कई बार किए गुहार
इन आवासों में अधिकतर गार्ड, चालक, परिचालक, गैंगमेन, सीएनडब्ल्यू, सिग्नलिंग समेत अधितक तकनीकी स्टॉफ परिवार के साथ रहते हैं, जो ड्यूटी में भी चैन से नहीं रह पाते हैं। इस दौरान उन्हें चिंता रहती है कि जर्जर आवास में रहने वाला परिवार सुरक्षित है या नहीं। इन आवासों की मरम्मत कराने कई बार रेलवे के स्थानीय वरिष्ठ अधिकारियों खासकर आईओडब्ल्यू तक से गुहार कर चुके। कई कर्मी अपनी गुहार कर्मचारी यूनियनों के प्रतिनिधियों से लगा चुके हैं, लेकिन इनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है।

रात्रि में गिरता है प्लास्टर, नहीं हुई पुताई
रनिंग ड्यूटी करने वाले कर्मियों ने बताया कि ये आवास इतने जर्जर है कि अभी भी कई बार रात्रि में सोते समय कमरे में प्लास्टर गिरता रहता है। ऐसे में रात्रि में डर के मारे नींद उड़ जाती है। सबसे अधिक परेशानी बारिश में होता है, तब तो पता नहीं, कब मकान ढह जाएं। वही कई सालों से पुताई नहीं हुई है। कुछ कर्मचारी 3-4 साल में एकाध बार अपने खर्च से ही पुताई करवा रहे हैं।

यूनियन की मांग की भी अनदेखी
यूनियन के पदाधिकारियों का कहना है कि कर्मचारी, रेलवे के स्थानीय प्रबंधन से अनेकों बार गुहार लगा चुके हैं। प्रबंधन भी भोपाल के वरिष्ठ अधिकारियों को स्थिति से अवगत करा दिया है, पर कर्मियों की कोई सुनवाई नहीं हो पाई। यूनियन के पदाधिकारियों का कहना है कि भोपाल मंडल से कई वरिष्ठ अधिकारी जंक्शन का दौरा करने आते है, लेकिन वे इन आवासों की तरफ देखने तक नहीं आते हैं।

ये है स्थिति
वर्तमान में न्यू यार्ड के क्षेत्र में लगभग 1500 रेलवे आवास है। इसमें से लगभग 90 फीसदी आवास जर्जर हो चुके हैं। 300 आवास खाली पड़े हैं, जिसके कर्मी निज आवासों में शिफ्ट हो चुके है। वही 200 मकान ऐसे है, जिसमें अवैध रूप से अतिक्रमण है। स्थानीय अधिकारी भी इन्हें नहीं हटवा पा रहा है।

नहीं हो रहा मेंटनेंस
बताया जाता है कि रेलवे के इन मकानों का मेंटनेंस करीब एक दशक से बंद है। इसकी वजह इटारसी के आईओडब्ल्यू विभाग के पास स्टॉफ नहीं होना है। प्लबंर हो या बढ़ई तक नहीं है। यहां तक कि विभाग के पास आवास की मरम्मत तक के लिए बजट नहीं है। इस वजह से मेंटनेंस नहीं हो पा रहा है।

वर्जन
इटारसी के बदहाल पड़े रेलवे आवासों की मरम्मत वर्षों से नहीं हो रही है। हमने इनकी मरम्मत के लिए आईओडब्ल्यू से कहा, तो अधिकारियों ने स्टॉफ की कमी बताई। ऐसे में इन आवासों में रहने वाली कर्मचारियों के साथ कोई हादसा होगा, तो क्या रेल प्रबंधन इसकी जिम्मेदारी लेने को तैयार है?
– प्रीतम तिवारी, प्रवक्ता पश्चिम रेलवे मजदूर महासंघ इटारसी।

इटारसी जंक्शन रेलवे का 100 साल से भी पुराना जंक्शन है। निश्चित ही आवास भी कम से कम चार दशक पुराने होंगे। हमने कर्मियों की ओर से इन आवासों की स्थिति से वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत करा दिया है।
– राजीव चौहान, अधीक्षक रेलवे स्टेशन इटारसी जंक्शन।

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