भारतीय मानक ब्यूरो ने ‘जलीय जीवों के लिए चारा (एक्वा फीड) पर भारतीय मानक’ विषय पर वेबिनार का आयोजन किया

भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) ने 17 फरवरी, 2022 को ‘एक्वा फीड पर भारतीय मानक’ विषय पर जागरूकता और कार्यान्वयन वेबिनार का आयोजन किया। इसमें उद्योग और सरकारी मत्स्य विभागों के 100 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया। निर्धारित महत्वपूर्ण आवश्यकताओं पर प्रकाश डालते हुए मछली के चारे पर वर्तमान भारतीय मानकों और योजनागत नए मानकों से संबंधित जानकारी साझा की गई। मसौदा मानकों की समीक्षा और टिप्पणी करने के लिए भी प्रतिभागियों को प्रोत्साहित किया गया, जो 15 मार्च 2022 तक व्यापक प्रसार में है। निर्माताओं को अपने उत्पादों पर मानक चिह्न (आईएसआई चिह्न) के उपयोग को लेकर बीआईएस प्रमाणन लेने के लिए भी जोर दिया गया। बीआईएस अनुरूपता मूल्यांकन योजना और लाइसेंस के आवेदन की प्रक्रिया के बारे में भी जानकारी दी गई।

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बीआईएस ने एक्वा फीड के लिए चार भारतीय मानक प्रकाशित किए हैं, जो निम्न सूचीबद्ध हैं :

I. आईएस 16150 (भाग 1) : 2014 मछली का चारा–विशिष्टता, भाग 1 तालाब की बड़ी मछली का चारा

II. आईएस 16150 (भाग 2) : 2014 मछली का चारा–विशिष्टता, भाग 2 कैटफिश का चारा

III. आईएस 16150 (भाग 3) : 2014 मछली का चारा–विशिष्टता, भाग 3 समुद्री केकड़ा (झींगे के जैसा) का चारा

IV. आईएस 16150 (भाग 4) : 2014 मछली का चारा–विशिष्टता, भाग 4 मीठे पानी में झींगा चारा

मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय के अनुरोध पर हम नई प्रजातियों को शामिल करते हुए एक्वा फीड के लिए नए भारतीय मानक विकसित करने की प्रक्रिया में हैं।

I. पंगेसियस मछली के लिए मछली का चारा

II. सर्वाहारी मछली के लिए मछली का चारा

III.मांसाहारी मछलियों के लिए मछली का चारा

IV. मछली के पॉलीकल्चर (बहुशस्यल) के लिए मछली का चारा

देश में जलीय कृषि तेजी से प्रगति कर रही है और इसी वजह से इस क्षेत्र में सरकारों द्वारा नई पहल/योजनाएं शुरू की जा रही हैं। भारतीय मानकों के कार्यान्वयन से एक्वा फीड की सर्वोत्तम गुणवत्ता सुनिश्चित होगी और इससे जलीय कृषि उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार होगा। एक्वा फीड की बढ़ी हुई गुणवत्ता व सुरक्षा से निर्माताओं को बेहतर कीमत मिलेगी और उपभोक्ताओं को पारिस्थितिकी तंत्र के समग्र स्वास्थ्य को बढ़ाने वाले सुरक्षित उत्पाद प्राप्त हो सकेंगे। मानकों का उपयोग देश में आयात किए जा रहे मछली के चारे की गुणवत्ता को नियंत्रित करने के लिए भी किया जा सकता है।

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