भीमा कोरेगांव हिंसा / महाराष्ट्र पुलिस ने जांच से जुड़े दस्तावेज एनआईए को देने से इनकार किया

1 जनवरी 2018 को पुणे के भीमा कोरेगांव में हिंसा हुई थी-फाइल

1 जनवरी 2018 को पुणे के भीमा कोरेगांव में हिंसा हुई थी-फाइल

दो साल पुराने भीमा-कोरेगांव हिंसामामले की जांच महाराष्ट्र पुलिस कर रही थी, 24 जनवरी को केंद्र ने इसकी जांच एनआईए को सौंप दीमहाराष्ट्र के गृहमंत्री ने कहा- राज्य सरकार की बिना अनुमति के केंद्र ने एनआईए को जांच सौंपी, यह संविधान के खिलाफ

पुणे. भीमा कोरेगांव हिंसा मामले की जांच करने पहुंचीं राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को पुणे पुलिस ने जांच से जुड़े दस्तावेज सौंपने से मना कर दिया। एनआईए की टीम सोमवार रातपुणे पहुंची थी। वहीं, इस मामले में राज्य के गृहमंत्री अनिल देशमुख ने कहा है कि केंद्र सरकार की तरफ से कोई आधिकारिक सूचना नहीं दी गई है। ऐसे में केंद्रीय जांच एजेंसी के साथ सहयोग करना संभव नहीं है।

24 को केंद्र ने एनआईए को सौंपी थी जांच

24 जनवरी को केंद्र ने दो साल पहले हुई भीमा कोरेगांव हिंसा की जांच एनआईए को सौंप दी थी। तभी से इस मामले पर राज्य और केंद्र सरकार के बीच खींचतान चल रही है। देशमुख ने यह भी कहा कि जब तक केंद्र से इस मामले में कोई औपचारिक बात नहीं होती तब तक पुलिस एनआईए की मदद नहीं करेगी। भीमा कोरेगांव मामले की जांच एनआईए को सौंपने से पहले राज्य सरकार से एक बार भी केंद्र ने नहीं पूछा।

गृहमंत्री ने बताया था संविधान के खिलाफ

इसके पहले 25 जनवरी को देशमुख ने राज्य की अनुमति के बिना मामले की जांच एनआईए को सौंपने कोसंविधान के खिलाफ बताया था।पिछले दो साल से भीमा कोरेगांव से जुड़े सभी मामलों की जांच महाराष्ट्र पुलिस कर रही थी। महाराष्ट्र सरकार ने 23 जनवरी कोभीमा कोरेगांव मामले की समीक्षा की थी। इसके अगले दिन ही केंद्र ने जांच एनआईए को सौंप दी। देशमुख ने बताया था कि समीक्षा बैठक में मामले में कुछ केस वापस लेने और जांच एसआईटी से कराए जाने पर चर्चा हुई थी।

वहीं, पूर्व सीएम फडणवीस नेमामले की जांच एनआईए को सौंपे जाने को केंद्र का सही कदम बताया था। उन्होंने कहा था, ‘यह सही फैसला है। क्योंकि मामला सिर्फ महाराष्ट्र तक सीमित नहीं है। यह पूरे देश में बढ़ रहा है। जांच से देशभर में फैले अर्बन नक्सलियों का खुलासा होगा।

मामले में 19 आरोपी
भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में अरुण थॉमस फेरेरिया, रोना जैकब विल्सन, सुधीर प्रल्हाद धवले समेत 19 आरोपी हैं। पुलिस द्वारा अदालत में कुछ महीने पहले पेश की गई ड्राफ्ट चार्जशीट के मुताबिक, आरोपी पूर्व पीएम राजीव गांधी की हत्या की तरह ही रोड शो के दौरान पीएम मोदी की हत्या की साजिश रच रहे थे। आरोपियों में मानवाधिकार वकील, शिक्षाविद और लेखक शामिल हैं। पुलिस ने इनका संबंध प्रतिबंधित सीपीआई (माओवादी), कबीर कला मंच (केकेएम) से बताया है।

पुणे में ऐसे हुई थी हिंसा
31 दिसंबर 2017 को यलगार परिषद सम्मेलन का आयोजन किया गया था। इसमें दिए गए भड़काऊ भाषणों के कारण अगले दिन 1 जनवरी 2018 को पुणे जिले के भीमा कोरेगांव युद्ध स्मारक के निकट हिंसा हुई थी। इसमें एक युवक की जान चली गई थी। साथ ही करोड़ों की सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान हुआ था।

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