मध्य प्रदेश / एमपीपीएसी परीक्षा में पूछे गए विवादित सवाल पर बवाल, जयस के साथ धरने पर बैठा भील समाज

भील समाज के लोग दोषियों पर कार्रवाई की मांग करते हुए धरने पर बैठे।

12 जनवरी को एमपीपीएससी परीक्षा की दूसरी पाली में भील जनजाति को लेकर अमर्यादित सवाल पूछा गया थामामले में हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की गई है, जिस पर 30 जनवरी को कोर्ट में सुनवाई होनी है

इंदाैर.एमपीपीएससी की परीक्षा में भील जाति और समुदाय को लेकर पूछे गए विवादित सवाल पर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा। इस मामले में हाइकोर्ट में 30 जनवरी को सुनवाई हाेगी। दूसरी ओर इसे लेकर आदिवासी समाज से जुड़े लोग जयस के साथ मिलकर मंगलवार को पुलिस कंट्रोल रूम पहुंचे और यहां डीआईजी के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में आदिवासी समाज के लोगों ने पेपर सेट करने वालों के खिलाफ अपराधिक मुकदमा दर्ज करने की मांग की। साथ ही विरोध स्वरूप जयस और भील समाजने पुलिस कंट्रोल रूम परिसर पर धरना भी दिया।

भील जनजाति की आपराधिक प्रवृत्ति का कारण?
एमपी पीएससी परीक्षा की दूसरी पाली के प्रश्नपत्र में आदिवासी समाज की भील जनजाति को लेकर गलत व अमर्यादित टिप्पणी की गई। परीक्षा में गद्यांश से जुड़ा सवाल पूछा गया। सवाल में लिखा था कि भील जनजाति की आपराधिक प्रवृत्ति का कारण यह है कि वे सामान्य आय से देनदारियां पूरी नहीं कर पाते। धन उपार्जन की आशा में अनैतिक कामों में भी संलिप्त हो जाते हैं।

सीएम कमलनाथ ने ट्वीट कर कहा- “मैंने जीवनभर आदिवासी समुदाय, भील जनजाति व इस समुदाय की सभी जनजातियों का बेहद सम्मान और आदर किया है। मैंने इस वर्ग के उत्थान और हित के लिए जीवन पर्यन्त कई कार्य किए हैं। मेरा इस वर्ग से शुरू से जुड़ाव रहा है। मेरी सरकार भी इस वर्ग के उत्थान व भलाई के लिए निरंतर कार्य कर रही है।” मुख्यमंत्री ने आगे कहा- मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा 12 जनवरी 2020 को आयोजित मध्यप्रदेश राज्य सेवा परीक्षा 2019 के प्रारंभिक परीक्षा में भील जनजाति के संबंध में पूछे गए प्रश्नों को लेकर मुझे काफ़ी शिकायतें प्राप्त हुई है। इसकी जांच के आदेश दे दिए गए हैं।

पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान ने ट्वीट कर कहा- “भील एक स्वाभिमानी, परिश्रमी और कर्मठ जनजाति है। टंट्या भील जैसे अमर और महान क्रांतिकारी को इसी जनजाति ने जन्म दिया। ये अत्यंत भोले-भाले लोग हैं। भील जनजाति पर इस तरह की अपमानजनक टिप्पणी करना अत्यंत निंदनीय है। मैं प्रदेश सरकार से मांग करता हूँ कि जिसने भी यह प्रश्नपत्र बनाया है, उसके यह विचार हैं, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाए, साथ ही साथ यह अंश किसी पुस्तक से लिए गए हैं तो सरकार उस पुस्तक पर भी प्रतिबंध लगाए और लेखक के खिलाफ कार्रवाई करे।”

पेपर सेट करने वाले और मॉडरेटर को नोटिस जारी किया गया : एमपीपीएससी
एमपीपीएससी के चेयरमैन प्रो. भास्कर चौबे ने कहा कि आयोग की अपनी सीमाएं हैं, नियमों के तहत जो भी कार्रवाई होगी वो की जाएगी। यह एक विशेष मामला है इसे एमपी पीएससी ने मान लिया है। आयोग चेयरमैन ने बताया कि एक आदमी पेपर सेट करता है फिर मॉडरेटर उसे चेक करता है, फिर वह प्रेस में छपने जाता है। मामले में पेपर सेट करने वाले और मॉडरेटर दोनों को नोटिस जारी किया गया है। पश्नपत्र में आए गलत सवालों के संबंध में चौबे ने कहा कि आयोग की समिति द्वारा जांच की जाएगी।

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