मैहर दर्शन के बाद बनाया था सतना में ठगी का प्लान

नाम बदलकर बैठे थे ठग, गाडि़यों में थी फर्जी नंबर प्लेट, आर्टिफिशियल गैलरी के ठगों को पुलिस ने किया खुलासा, बनारस में आलीशान बंगले में रह रहा था मास्टर माइंड, रिमांड पर लिए गए बनारस से पकड़े गए दोनों आरोपी, ठगों का साथ देने वाले को भेजा गया जेल

After Maihar Darshan, the plan of cheating in Satna was made

सतना. आर्टिफिशियल गैलरी के ठगों को गिरफ्तार करते हुए पुलिस ने मंगलवार को इस मामले का खुलासा कर दिया। जिले के सैकड़ों लोगों से लाखों की ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफास करते हुए एसपी रियाज इकबाल ने बताया कि ठगी का मास्टर माइंड मैहर में दर्शन करने आया था। वहीं से इसके दिमाग में माला कारोबार के नाम पर ठगी का प्लान आया। इस गिरोह ने जब सतना में डेरा जमाया तो एक स्थानीय व्यक्ति को साथ में लिया। इसी की मदद से करोबार बढ़ाया और फिर ठग रकम बटोर कर भाग निकले। ठगी में शामिल दो आरोपियों को बनारस से पुलिस पकड़ कर लाई है जबकि एक केा सतना से ही गिरफ्तार किया गया है। अब दो नामजद आरोपियों की पुलिस को तलाश है। कार्रवाही के बाद तीनों आरोपियों को अदालत में पेश कर दिया गया। जहां से दो आरोपियों को दो दिन के पुलिस रिमांड पर भेजा जबकि एक आरोपी का जेल वारंट अदालत ने बना दिया।
यह है मामला
फरियादी विजय कुमार द्विवेदी पुत्र रामदयाल द्विवेदी निवासी ग्राम पोड़ी थाना नागौद हाल महादेवा की रिपोर्ट पर थाना सिविल लाइन पुलिस ने आइपीसी की धारा 420, 34 का मामला कायम कर विवेचना में लिया था। शिकायत थी कि आर्टिफिशियल गैलरी से नाम से मोती माला का कारोबार करने वाले लोगों ने सैकड़ों व्यक्तियों की रकम जमा कराई और कारोबार से जुड़े लोग एक साथ भाग निकले। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज करने हुए इस मामले में राजेश तिवारी, राहुल जायसवाल, आदित्य समेत अन्य को आरोपी बनाया था।
एसपी ने बनाई थी टीम
एसपी ने बताया कि इस फर्जीवाड़े के आरोपियों का कोई सुराग पुलिस के पास नहीं था। विवेचना में जो तथ्य आए उनके आधार पर साइबर सेल पता लगाने में जुटा रहा। जब सुराग मिला तो थाना प्रभारी सिविल लाइन निरीक्षक अर्चना द्विवेदी के साथ एसआइ एनएन मिश्रा, रीना सिंह, थाना प्रभारी नादन देहात एसआइ भूपेन्द्रमणि पाण्डेय,साइबर सेल प्रभारी एसआइ अजीत सिंह, साइबर सेल के प्रधान आरक्षक दीपेश, आरक्षक संदीप तिवारी, अजीत सिंह, विपेन्द्र मिश्राकी टीम बनाई। ठीक के सभी सदस्यों को अलग अलग टास्क दिए गए। इनमें एक टीम स्थानीय स्तर पर काम कर रही थी तो दूसरी टीम एसआइ भूपेन्द्र मणि के साथ बनारस में ठगों की टोल लेने पहुंची।
यह आरोपी पकड़े गए
बनारस में पुलिस को काफी मेहनत करना पड़ी। जब आरोपियों की तस्वीर लेकर पुलिस टीम गली मोहल्लों में घूमी तो ठगी के मास्टरमाइंड का ठिकाना पता चल गया। एेसे में सतर्कता के साथ पुलिस ने आरोपी राजेश तिवारी पुत्र सीताराम तिवारी (50) निवासी ग्राम बथरा खुर्द थाना चौबेपुर जिला वाराणसी उप्र को पकड़ा। राजेश ने बनारस के पॉश इलाके में अपना बंगला बना रखा है। उसके परिवार का रहन सहन ऊंचे दर्जे का है। इसके बाद बनारस से ही आरोपी राहुल उर्फ गोपाल मिश्रा पुत्र छविनाथ मिश्रा (27) निवासी ग्राम इटमा थाना चोलापुर जिला वाराणसी उप्र को गिरफ्तार किया गया। तीसरे आरोपी दुष्यंत सिंह पुत्र राम अवतार सिंह (60) निवासी करही खुर्द थाना उचेहरा जिला सतना हाल धवारी को पकड़ा गया। अब इसी मामले में फरार आरोपी पवन सिंह पुत्र स्व. शिवाधार सिंह निवासी ग्राम बथरा खुर्द थाना चौबेपुर जिला वाराणसी व आदित्य राज ठाकरे निवासी रत्नागिरी महाराष्ट्र की तलाश पुलिस को है। एडीपीओ संदीप कुमार ने बताया कि आरोपी राजेश व गोपाल की दो दिन के लिए पुलिस रिमांड स्वीकृत की गई है।
आरोपी ने बताई हकीकत
आरोपी राजेश तिवारी ने पूछताछ में पुलिस को बताया कि अगस्त- सितम्बर 2019 में मैहर दर्शन करने आया था। यहां दुकान पर माला कर रेट जाना तो कोई माला 60 रुपए की कोई 100 रुपए की थी। राजेश ने दिमाग लगाया कि माला की मंडी उसके इलाके के हड़हा सराय में है। वहां माला का रेट 5 से 10 रुपए है। एेसे में प्लान बनाते हुए राजेश अपने साथियों के साथ सतना आया और सिविल लाइन इलाके के एक होटल में रुक गया। बगहा में किराए से कमरा तलाशा तो २५ सौ रुपए महीने में रहने का ठिकाना हो गया। जब मकान मालिक ने आइडी व आधार कार्ड मांगा तो कई दिनों तक टहलाने के बाद वह कमरा छोड़ दिया। सितंबर महीने में अखबार में माला कारोबार से जुडऩे के लिए विज्ञापन जारी कराया। जब लोग आने लगे तो उन्हें कमाई का लालच दिया। जब ज्यादा लोग जुडऩे लगे तो ऑफिस बनाने के लिए बड़ी जगह की जरुरत पड़ी। एेसे में शुरूआती दौर से साथ में रहे सुपरवाइजर दुष्यंत सिंह ने मंदाकनी विहार कॉलोनी में दलजीत सिंह का मकान किराए से लिया। इसका किराया नाम पुष्पेन्द्र सिंह के नाम से तैयार हुआ था। दुष्यंत सिंह की पत्नी का बगहा के लोगों से अच्छा संपर्क होने से दुष्यंत ने तीन लाख रुपए जा किए और अपना कारोबार बढ़ाने लगा। आरोपी राजेश ने यह भी बताया कि उसके पास एमपी 09 एचई 1357 नंबर की कार थी जो आदित्य राज की थी। महाराष्ट निवासी आदित्य राज कम्प्यूटर का अच्छा जानकार था तो उसे साथ में रख लिया। इसके एवज में आदितय को हर राज दो हजार रुपए मिलते थे। राजेश ने एक नीले रंग की कार एमपी 09 सीडी 0371 रखी थी जो उसके साथी गोपाल मिश्रा की है। राजेश के साथ पवन सिंह, आदित्य राज और गोपाल एक ही घर में रहते थे।
फर्जी नंबर और पहचान
ठगी का कारोबार करने वाले आरोपियों ने शुरूआती दौर से ही अपनी पहचान गोपनीय रखी थी। सभी आरोपी यहां नाम बदल कर रह रहे थे। उन्होंने अपने निजी मोबाइल फोन को यहां स्थानीय स्तर पर उपयोग नहीं किया। फर्जी आइडी से नए फोन में सिमकार्ड लगाए और समय समय पर फोन बदलते रहे। गाडि़यों में भी फर्जी नंबर की प्लेअ लगाई गई थीं। ठगी के मास्टर माइंड राजेश के खिलाफ महाराष्ट में भी धोखाधड़ी और अमानत में खयानत के दो अपराध दर्ज हैं। पकड़े गए आरोपियों के कब्जे से पुलिस ने नीले रंग की सफारी गाड़ी यूपी 63 टी 7914 में लगाई गई एमपी 09 सीडी 0371 नंबर की फर्जी प्लेट बरामद की है। 4 मोबाईल फोन, सोने की एक चेन,सोने की 3 अंगूठी,सोने का एक ब्रेसलेट समेत कुछ दस्तावेज बरामद किए हैं।
सम्मान करने उमड़ी भीड़
शहर और देहात इलाके के सैकड़ों लोग आर्टिफिशियल गैलरी की ठगी का शिकार हुए हैं। जब इन्हें पता चला कि आरोपी पकड़े गए हैं तो अपना पैसा वापस मिलने की उम्मीद में सभी थाने पहुंच गए। इसके बाद पुलिस कंट्रोल रूम तक पीडि़त चले आए। जहां महिलाओं ने पुलिस टीम का बुके देकर सम्मान किया और आरोपियों को देखने के लिए इंतजार करते रहे। एसपी ने सभी को कहा कि उनसे आरोपियों की शिनाख्त परेड कराई जाएगी और प्रयास रहगा कि आरोपियों से रकम बरामद कर ली जाए। एसपी ने यह भी बताया कि आरोपी बेहद शातिर दिमाग हैं इन्होंने अपना पैसा जमा नहीं रखा है। एक हाथ से दूसरे हाथ में घुमाते रहे हैं इसलिए रकम बरामद करना मुश्किल का काम है।

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