विषय :- बिजली की कीमतों में वृद्धि को वापस लेने एवं बिजली संशोधन बिल 2021 रद्द करने बाबत

श्रीमान मुख्यमंत्री महोदय,
मध्यप्रदेश शासन भोपाल
द्वारा
श्रीमान जिला प्रबंधक महोदय,
पश्चिम मध्य क्षेत्र विधुत वितरण कंपनी लिमिटेड,
अशोकनगर


विषय :- बिजली की कीमतों में वृद्धि को वापस लेने एवं बिजली संशोधन बिल 2021 रद्द करने बाबत

महोदय,
आपको ज्ञात है कि देश की आम जनता महंगाई बेकारी से जूझ रही है और ऐसी स्थिति में सरकार बिजली के दामों में लगातार इजाफा करती आ रही है। कोरोना काल में भी जब आम आदमी रोटियों के लिए उदास था। बिजली कंपनियों ने बेतहाशा बिल आम परिवारों को थमाए इसी के साथ आज बिजली विभाग को लगातार निजीकरण, ठेके पर देने की प्रथा के कारण बिजली कर्मचारी भी परेशान है इसी के साथ उपभोक्ता भी परेशान है। आज के समय में बिजली हर परिवार की मूलभूत जरूरत बन गई है ऐसी स्थिति में भारत सरकार बिजली संशोधन बिल 2021 लागू कर रही है यह कदम घोर जनविरोधी है।
आजादी के बाद भारत में चुनी गई सरकारों ने घोषणा की थी कि प्रत्येक नागरिक को न्यूनतम संभव कीमत पर बिजली उपलब्ध कराई जाएगी। इसलिए यह कहा गया कि बिजली को एक जन कल्याणकारी सेवा माना जाएगा, ना कि एक खरीद-फरोख्त की वस्तु । लेकिन 1990 के दशक में अर्थव्यवस्था के वैश्वीकरण के बाद, बिजली को एक वस्तु में परिवर्तित करने और निजी व्यापारियों के लिए बिजली क्षेत्र में प्रवेश करने के लाभ के लिए एक क्षेत्र बनाने की प्रक्रिया शुरू की गई थी । बिजली विधेयक 2003 ने बिजली उत्पादन क्षेत्र को स्वतंत्र बिजली उत्पादक (आईपीपी) नामक निजी निवेशकों के लिए खोल दिया और इस तरह बिजली की दरों में समय-समय पर भारी बढ़ोतरी के साथ -साथ इस तरह की अत्यावश्यक सेवा के संपूर्ण निजीकरण और व्यवसायीकरण के लिए व्यापक कानून तैयार करने का मार्ग प्रशस्त किया। यह जगजाहिर है कि बिजली आधुनिक सभ्यता की प्रगति का एक महत्वपूर्ण घटक है। लेकिन यह पता चला है कि केंद्र सरकार हाल ही में लोकसभा में “बिजली एक्ट – 2003 संशोधन विधेयक- 2021” पारित करने की कोशिश कर रही है, जो कि बिजली क्षेत्र में और अधिक उदारीकरण लाकर आम जनता को बर्बादी की तरफ ले जाएगा। विधेयक में अन्य बातों के साथ-साथ बिजली वितरण को तीन टीयरों में विभाजित करने का प्रस्ताव है। वितरण लाइसेंसधारी, उप- वितरण लाइसेंसधारी और फ्रेंचाइजी जो सभी निजी हाथों में होंगे। हमारे विचार में, यदि यह विधेयक पारित हो जाता है, तो टैरिफ को और बढ़ाया जाएगा, जिससे आम उपभोक्ताओं पर वित्तीय बोझ पड़ेगा और उनका उत्पीड़न होगा। इजारेदारी पूंजीवाद के युग में , यह सत्ता के द्वारा सरकारी बिजली वितरण को पूंजीपति घरानों के हाथों में सौंपने की एक चाल मात्र है। बिल, जैसा कि समझ आ रहा है, बिजली वितरण लाइसेंस के बदले लोड – डिस्पैच सेंटर और बिजली वितरण कंपनियों की स्थापना करना चाहता है। यह सामान्य बिजली उपभोक्ताओं को अधिक बिलिंग, कनेक्शन की प्रकृति,आदि के संबंध में किसी भी विवाद के मामले में कानूनी सहायता प्राप्त करने से वंचित करेगा। विदेश में तथाकथित ‘क्रॉस सब्सिडी’ खत्म करने, आम आदमी के लिए बिजली शुल्क बढ़ाने ,उपभोक्ताओं को प्रीपेड मीटर लेने के लिए मजबूर करने का भी प्रस्ताव है, जिन्हें ‘पूर्व भुगतान गारंटी’ के रूप में लेने के लिए, और अपरंपरागत सौर ऊर्जा के उत्पादन और उपयोग पर प्रतिबंध लगाने का भी प्रस्ताव है। यह विधेयक देश की बिजली को विदेशी में विदेशों में बेचने के लिए ‘cross-border trade’ नामक एक नया प्रावधान भी प्रस्तुत करने जा रहा है, जो अस्वीकार है, क्योंकि यह भारतीय जनता के हित के खिलाफ है।
बिजली क्षेत्र के कर्मचारियों और आम उपभोक्ताओं दोनों में बिल के विरोध की आवाज पहले से ही पूरे भारत में जोरों पर है हम आपसे आशा करते हैं की सभी उपभोक्ताओं के साथ-साथ बिजली क्षेत्र के कर्मचारियों के हित में इस घोर जन विरोधी विधेयक को रद्द करेंगे और बिजली का निजीकरण ठेकेदारी प्रथा पर रोक लगाते हुए बिजली के बढ़े हुए वृद्धि दरों को कम करेंगे महोदय से निवेदन है कि आप आम जनता के हितों को सोचते हुए कदम उठाएंगे।

हमारी मांगे हैं:

1 बिजली को एक जन कल्याणकारी सेवा के रूप में माना जाना चाहिए, ना की एक खरीद-फरोख्त की वस्तु के रूप में। बिजली के बढ़े हुए दाम वापस लिए जाए।

2 जनविरोधी “बिजली अधिनियम 2003 को निरस्त किया जाए और इसका संशोधन विधेयक 2021” तत्काल वापस लिया जाए।

3 प्रीपेड स्मार्ट मीटर पर रोक लगाई जाए।

4 तथाकथित क्रॉस-सब्सिडी हटाने के नाम पर आम उपभोक्ताओं के लिए बिजली की दरें नहीं बढ़ाई जानी चाहिए।

5 कृषि क्षेत्र को पूरी तरह से मुफ्त बिजली, घरेलू और छोटे उद्योगों को 200 यूनिट तक ,जबकि छोटे व्यवसायों को प्रति यूनिट ₹1 के हिसाब से बिल दिया जाना चाहिए।

6 गैर-पारंपरिक बिजली के उत्पादन और उपयोग पर आम उपभोक्ताओं पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया जाना चाहिए।

7 जिन घरों की बिजली के बिल अनावश्यक रूप से आ रहे हैं उनकी जांच कर परिवारों को राहत दिया जाए।
8 बिजली की कीमतों पर रोक लगाते हुए सस्ते से सस्ते दामों में बिजली परिवारों को उपलब्ध कराई जाए।
9 कोरोना काल के दौरान जो परिवार बिल नहीं भर पाए उनके तमाम बिलों को माफ किया जाए।

द्वारा
समस्त उपभोक्ताओं की और से
सचिन जैन (जिला सचिव)
एस यू सी आई (सी)
अशोकनगर

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