संपूर्ण जिले में शांतिपूर्ण ढंग से हुआ होलिका दहन, महिलाओं ने की पूजा अर्चना

ग्राम भगोर में होलिका दहन के पूर्व पूजा अर्चना करते

झाबुआ। आज होली के पावन अवसर पर होलिका दहन कार्यक्रम संपूर्ण जिले में बड़े हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। इसी तरह ग्राम भगोर में सुबह से ही बच्चों, युवाओं आदि ने बढ़ चढ़कर होलिका दहन व पूजा सामग्री भेंट की गई, होलिका दहन के समय बड़ी मात्रा में बच्चे युवा, महिला व पुरुषों ने बढ़ चढ़कर भाग लिया। परंपरागत रूप से गांव में होलिका दहन की सूचना दी गई व ग्राम भगोर के पटेल महेंद्र डोडियार द्वारा पूजा अर्चना कर होलिका दहन की विधि पूरी की गई। जिले के मेघनगर, झाबुआ, पेटलावद, राणापुर, कालीदेवी, थांदला मैं होलिका दहन मुहूर्त अनुसार किया गया। होलिका दहन को लेकर उत्साहित युवक डीजे साउंड और ढोल धमाकों के साथ हर्षोल्लास से देखे गए, महिलाओं द्वारा होलीका दहन के पूर्व की जाने वाली पूजा अर्चना की गई। होलिका दहन को लेकर उत्साहित युवक डीजे साउंड और ढोल धमाकों के साथ हर्षोल्लास से नाचते उछलते देखे गए, महिलाओं द्वारा होलीका दहन के पूर्व की जाने वाली पूजा अर्चना की गई। संपूर्ण जिले में समाचार लिखे जाने तक कहीं कोई अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली बड़े ही शांतिपूर्ण भाव से होलिका दहन का आयोजन हुआ।

यह है होली की मान्यताएं-:

होलिका दहन के दिन मनुष्य अपनी दरिद्रता को नष्ट कर सुख-शांति-समृद्धि में वृद्धि कर सकता है।आपको सिर्फ इन उपायों को करना है, जिससे वर्षपर्यंत तक जीवन सुखी बना रहेगा। होलिका की अग्नि का ताप शरीर पर पड़ने से कई प्रकार के विकार नष्ट होते है। होलिका में शरीर से नारियल उतारकर दहन करने से वर्ष पर्यंत जीवन सुखमय रहता है। होलिका की परिक्रमा विषम संख्या में करने से दरिद्रता नष्ट होने के योग बनते हैं। शुद्ध स्थिति में एक नारियल या कोई पूर्ण फल हाथ में ले और ईश्वर के सामने प्रार्थना करें कि मेरे मनोरथ सिद्ध होवे। फिर फल कमरे के प्रत्येक कोने में करके होलिका को समर्पित करें।
घर के सभी सदस्यों को एक ही स्थान पर बैठाकर उन पर से सात हरे नीबू उतारकर होलिका में विसर्जित करे तो क्लेश खत्म होता है। गृह क्लेश हो तो होली के दिन गौरी शंकर रुद्राक्ष धारण करें।

होलिका दहन के पश्चात चारों ओर चक्कर लगाते हैं श्रद्धालु

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