सीएए-एनआरसी के विरोध: सतना का नजीराबाद बना दिल्ली का शाहीन बाग

सतना के तत्वावधान में सोमवार की शाम सैकड़ों महिलाएं, युवा एवं बच्चे हाथ में तिरंगा लेकर सड़क पर उतरे तो सतना का नजीराबाद दिल्ली के शाहीन बाग में तब्दील हो गया।

सीएए-एनआरसी के विरोध: सतना का नजीराबाद बना दिल्ली का शाहीन बाग

सतना/ सीएए, एनआरसी के विरोध में संविधान बचाओ समिति सतना के तत्वावधान में सोमवार की शाम सैकड़ों महिलाएं, युवा एवं बच्चे हाथ में तिरंगा लेकर सड़क पर उतरे तो सतना का नजीराबाद दिल्ली के शाहीन बाग में तब्दील हो गया। बाग के अंदर इकट्ठा हुई भीड़ ने संविधान बचाओ आंदोलन की शुरुआत की, जो तीन दिन तक चलेगा। आंदोलन की शुरुआत सारे जहां से अच्छा हिन्दोस्ता हमारा…, गीत से हुई।

एमन मेवाती ने संविधान की प्रस्तावना को पढ़कर सीएए के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने वसुदैव कुटुम्बकम श्लोक की व्याख्या करते हुए कहा कि हमारा संविधान बसाने की बात करता है। हमारे लिए विश्व परिवार के समान है फिर देश में भगाने की बात कहां से आ गई। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार एक विशेष धर्म को चिह्नित करने का प्रयास कर रही है, यह देश को तोडऩे की राजनीति है।

भारत एक धर्म निरपेक्ष देश
पूर्व मंत्री सईद अहमद ने कहा कि भारत एक धर्म निरपेक्ष देश है। देश की जनता को संविधान पर पूरा विश्वास है लेकिन केंद्र सरकार वोट की राजनीति के लिए देश को जाति एवं धर्म के नाम पर बांटना चाहती है। सीएए एवं एनपीआर धर्म विशेष के लिए लागू किया जा रहा है। केंद्र सरकार भूल रही कि देश की आजादी में मुस्लिमों का भी बराबर का योगदान रहा है।

…तो आंदोलन जारी रहेगा
हम संविधान को बचाने के लिए सड़क पर उतरे हैं और जब तक सरकार नागरिकता कानून को वापस नहीं लेगी, आंदोलन जारी रहेगा। धरना स्थल पर मो. हासिम, जिया अहमद, हाजी नवाब अली, परवेज नवाज, शान मोहम्मद, आफताब अहमद, वसीम हुस्नआरा, रुकसाना बेगम, निकहत इशा, तस्लीम, शाहिदा, सबीना, तोशी सहित भारी संख्या में महिलाएं एवं बच्चे शामिल हुए।

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