राष्ट्रीय नवाचार सप्ताह हमें आत्मनिर्भर भारत की भावना से पोषित भारत 2.0 के सपने को साकार करने के लिए सहयोगपूर्वक काम करने के लिए प्रेरित करता है – श्री सुभाष सरकार श्री सुभाष सरकार ने ‘शैक्षिक संस्थानों में इनोवेशन इको-सिस्टम का निर्माण’ विषय पर ई-संगोष्ठी के समापन सत्र को संबोधित किया

केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री श्री सुभाष सरकार ने ‘शैक्षिक संस्थानों में इनोवेशन इको-सिस्टम का निर्माण’ विषय पर ई-संगोष्ठी के समापन सत्र को आज संबोधित करते हुए कहा कि राष्ट्रीय नवाचार सप्ताह हमें आत्मनिर्भर भारत की भावना से पोषित भारत 2.0 के सपने को साकार करने के लिए सहयोगपूर्वक काम करने के लिए प्रेरित करता है।

अपने समापन भाषण में श्री सरकार ने कहा कि हमारा लक्ष्य हमारी शिक्षा प्रणाली में नवाचार, उद्यमिता, आलोचनात्मक सोच तथा लीक से अलग हटकर सोच को बढ़ावा देना है, जो कि नई शिक्षा नीति 2020 में भी परिलक्षित होता है। उन्होंने कहा कि सरकार भारतीय अर्थव्यवस्था को बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है और 2024-25 तक भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य तक पहुंचने के लिए अथक प्रयास कर रही है। निवेश को सुगम बनाना, नवाचार को बढ़ावा देना, सर्वश्रेष्ठ बुनियादी सुविधाओं का निर्माण करना तथा भारत को विनिर्माण, डिजाइन एवं नवाचार का केंद्र बनाना हमें सही मायने में आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य तक पहुंचने में मदद करेगा।

इनोवेशन तथा उद्यमिता इको-सिस्टम पर ई-सिंपोजियम के समापन समारोह को देखने के लिए यहां क्लिक करें

श्री सरकार ने कहा कि अब समय आ गया है जब हर मंत्रालय, सरकारी विभाग, उद्योग जगत की हस्तियां तथा सभी प्रमुख हितधारक सहयोगपूर्वक काम करें और हमारे उच्च शिक्षा संस्थानों का समर्थन करें, ताकि वे नवप्रवर्तन, अनुसंधान की एक समग्र संस्कृति बनाने की दिशा में काम करें और एक नवप्रवर्तक के रूप में अपने सपनों को साकार करने तथा समाज के सामने आने वाली समस्याओं को हल करने के लिए युवा प्रतिभाओं के पोषण में मदद करें।

इस अवसर पर, भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार (पीएसए) प्रोफेसर के. विजय राघवन ने आर्थिक बदलाव तथा स्थिरता के लिए नवाचार की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हमें भारत को अनुसंधान एवं विकास के लिए एक पसंदीदा गंतव्य के रूप में स्थापित करने के लिए अनुसंधान तथा इनोवेशन इको-सिस्टम का वित्तपोषण बढ़ाने की आवश्यकता है। उन्होंने भारत में अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा देने और घरेलू स्टार्ट-अप इको-सिस्टम के साथ एकीकृत करने के लिए राष्ट्रीय अनुसंधान एवं विकास संस्थानों तथा शैक्षिक, प्रतिभा विकास एवं सोर्सिंग, रणनीतिक साझेदारी से जोड़ने की दिशा में सर्वोत्तम वैश्विक तरीकों को अपनाने के बारे में चर्चा की। उन्होंने कहा कि नवाचार को आर्थिक बदलाव और बाजार के साथ जोड़ा जाना चाहिए और स्वच्छ भारत, मेड इन इंडिया आदि सहित मौजूदा नीतिगत उपायों के साथ तालमेल बिठाना चाहिए। उन्होंने भारतीय युवाओं से देश के आर्थिक विकास को लेकर विचारों को साझा करने के लिए आगे आने का आग्रह किया।

उद्घाटन सत्र के बाद दो पैनल चर्चा हुई, जिसका शीर्षक था, “ग्रे हेयर्स नॉट मैंडेटरी टु बिल्ट ग्रेटर एंटरप्राइजेज” और “अट्रैक्टिंग बिग इनवेस्टमेंट फॉर इनोवेटिव आइडियाज फ्रॉम एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन”, जिसमें गणमान्य लोगों ने अच्छी संख्या में भाग लिया। सभी पैनलिस्ट ऐसे प्लेटफार्मों से उत्साहित थे, जिनकी भारत में अनुसंधान एवं विकास तथा नवाचार इको-सिस्टम के निर्माण के लिए बहुत आवश्यकता है।

एआईसीटीई के वाइस चेयरमैन प्रो. एम.पी. पुनिया ने स्वागत भाषण करते हुए शैक्षिक संस्थानों के छात्रों और शिक्षकों से अत्यधिक प्रत्युत्तर प्राप्त होने और भागीदारी के लिए उनकी सराहना की। इन छात्रों को विश्व भर के 1.2 लाख से अधिक लोगों ने ऑनलाइन देखा। सभी पैनलिस्ट ऐसे प्लेटफार्मों से उत्साहित थे, जिनकी भारत में अनुसंधान एवं विकास तथा नवाचार इको-सिस्टम के निर्माण के लिए बहुत आवश्यकता है।

एआईसीटीई के सदस्य सचिव प्रो. राजीव कुमार ने नवाचार एवं उद्यमिता के क्षेत्र में विशिष्टता की दिशा में तकनीकी संस्थानों के समर्थन में एआईसीटीई की भूमिका के बारे में चर्चा की। उनके द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम की समाप्ति हुई।

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