अफीम पटटे के नाम पर की जा रही अवैध वसूली और रिश्वतखोरी का खेल जारी

नीमच,मंदसौर। अफीम पटटे के नाम पर नीमच और मंदसौर जिले में किसानों से अवैध वसूली और रिश्वत का खेल जारी है। पटटे बहाल करने से लेकर नामांतरण तक के 20 से 45 हजार रूपए की राशि किसानों से ली जा रही है। अधिकांश मुखिया किसानों से यह राशि ले रहे है और दलाल भी पूरी तरह से सक्रिय है लेकिन नारकोटिक्स विभाग की तरफ से कोई कार्रवाई अभी तक नहीं हुई है। नीमच और मंदसौर जिलों में करोडों रूपए की राशि वसूली जा रही है। अफीम काश्तकार भी प्रक्रिया समझकर मुखिया और दलालों को पैसा दे रहे है। बडे पैमाने पर हो रही वसूली और रिश्वत के मामले सांसद सुधीर गुप्ता तक पहुंचे है और उन्होंने किसानों द्वारा किसी को अवैध रूप से पैसा न देने और अधिकारियों पर कार्रवाई की बात कही है।
ज्यादातर धांधली बहाल पटटों में हो रही है, नई नीति के तहत उन किसानों को पट्टे जारी किए जा रहे हैं जिनके लाइसेंस 1999-2000 से 2021-22 के बीच घटिया घोषित होने से निरस्त हुए थे लेकिन उन्होंने मार्फिन 6 प्रतिशत से अधिक दी थी। इसके साथ ही ऐसे किसानों को भी पट्टे जारी किए जा रहे है। ऐसे किसानों से सीधे रूप से या तो मुखिया 20 से 70 हजार ले रहा है या तो दलाल।
नारकोटिक्स विभाग ने सार्वजनकि नहीं की अफीम पटटों की सूची— गफलत में दे रहे है किसान पैसे— नारकोटिक्स विभाग ने किन किसानो को अफीम पटटे जारी हो रहे है, उनकी सार्वजनिक सूची जारी नहीं की है। इस वजह से किसान गफलत में है और दलाली और रिश्वतखोरी का शिकार हो रहे है। नारकोटिक्स विभाग को चाहिए कि किसानों से अफीम पटटे के नाम पर पैसे लेने वालों पर कार्रवाई करें, लेकिन विभाग के अधिकारी इस मामले में चुप है, सार्वजनिक रूप से एडवाइजरी भी जारी नहीं की है। इसलिए किसान नारकोटिक्स विभाग रिश्वत व अवैध वसूली को मौन स्वीकृति मान रहे है।
इधर मंदसौर में कांग्रेस नेताओं ने अफीम पटटे के नाम पर की जा रही अवैध वसूली और रिश्वतखोरी के मामले में प्रदर्शन किया है और नारकोटिक्स अधिकारियों के सामने भी ये आरोप लगाए है, जो हमने खबर में लिखे है। अब देखना यह है कि यह सब होने के बाद अब नारकोटिक्स विभाग ऐसे दलालों और मुखियाओं के खिलाफ क्या एक्शन लेता है।

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