एक वर्ष बाद भी नही बन पाई कोई योजना, लाॅकडाउन विकल्प है तो गरीब की भी सुध ले सरकार

दम तोड़ती जिंदगीया, लाशो के ढेर, धधकते श्मशान

10 दिन की तालाबंदी में रोज कमाने खाने वालो पर फिर से छाया भुखमरी का संकट

नीमच। कोरोना संक्रमण पुरे देश के लिए घातक साबित हो रहा है। हर रोज हजारो लोगो की मौते हो रही है। वैक्सीनेशन की धीमी गती है। आॅक्सीजन की कमी है। कई लोग कोरोना से ग्रसित होकर हाॅस्पिटलो में अपनी आखरी सांसे गिन रहे है। श्मशानो में लाशो के ढेर धधकते दिखाई दे रहे है। शासन – प्रशासन ले देकर लाॅकडाउन लगाने को ही कोरोना से बचाव का विकल्प मानता है।
ऐसे में सवाल यह है कि कोरोना को देश में प्रवेश किए करीब 1 वर्ष से अधिक समय हो गया है। डब्लूएचओ ने भी कई बार चेतावनी दी थी कि कोरोना कभी भी पीक में आ सकता है। जिससे संक्रमण का अधिक खतरा होने के साथ – साथ लोगो के लिए घातक भी साबित हो सकता है। लेकिन देश की सरकार कोरोना को तो भूल ही बैठी थी। चुनावी पर्वो में मशगुल हो रही थी। लाखो की भीड़ जुटाकर रैलिया निकाल रही थी। सत्ताधारी पार्टी के अलावा विपक्ष भी कोरोना को हल्के में ले रहा था। चुनावी आलम में कोरोना का डर गायब दिखाई दे रहा था। लेकिन जैसे ही कोरोना की रफ्तार बड़ी तो सरकार की सांसे उपर निचे होना शुरू हो गई। जबकि एक वर्ष पूर्व ही सरकार चाहती तो कोरोना संक्रमण पर काबू पाने के लिए कोई योजना बना सकती थी। लेकिन कोरोना के खौफ से ज्यादा सरकार बनाने में विश्वास ज्यादा जताया गया। जिसका खामियाजा आज जनता को भुगतना पड़ रहा है। लाॅकडाउन की कीमत गरीबो को अदा करनी पड़ रही है। 10 दिनो के लाॅकड़ाउन में न जाने कितने घरो में चुल्हे नही जलेंगे, कितनी ही मासूम भुख से बिलखेंगे। सरकार को चुनावी सभाओ से ज्यादा ध्यान कोरोनो पर देना था। क्योंकि ये तो सबको पता ही था कि लाॅकडाउन देश में फिर से लगाया जा सकता है। जिसकी तैयारियां सरकार को पहले ही कर लेनी चाहीए थी। लेकिन अब सांप निकलने के बाद लाठी पिटने से क्या फायदा।

चुनावी पर्व में कोरोना की नो एन्ट्री

मध्यप्रदेश में कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए हाल ही मंे कई शहरो में 10 दिनो का लाॅकडाउन लगाया गया है। जिससे कई प्रकार की प्रतिक्रियाए सामने आ रही है। लोग कह रहे है मध्यप्रदेश में भी चुनाव कराओ, कोरोना चुनाव से घबराता है। उदाहरण के तौर पर मध्यप्रदेश का दमोह है। जहां चुनाव होते है वहां कोरोना फटकता भी नही है। प. बंगाल सहित 5 राज्यो में चुनावी रैलियो में न तो मास्क लगाया गया, न ही दो गज की दूरी का पालन कराया गया, कोरोना का डर किसी को नही था। मानो जैसे उन 5 चुनावी राज्यो में कोरोना पर नो एन्ट्री लगा दी हो।

नीमच मंदसौर हुआ 10 दिनो के लिए लाॅक

कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए नीमच मंदसौर शहर में कलेक्टर द्वारा 10 दिनो का लाॅकडाउन लगाया गया है। किसी को बेवजह घर से बाहर निकलने की परमिशन नही है। शादी ब्याह में 50 लोग, मौत मरण में 20 लोग, आवश्यक खान-पान की सामग्रीयो सहित दवाई, पेट्रोल पंप को छूट दी गई है।

20 लाख करोड़ के पैकेज से भी नही मिली राहत

पिछले वर्ष कोरोना काल में सम्पूर्ण देश में तीन माह का लम्बा लाॅकडाउन लगाया था। जिसमें केंद्र सरकार ने अब तक के सबसे बड़े 20 लाख करोड़ के राहत पैकेज की घोषणा की थी और बताया था कि निचले तबके से लेकर हर वर्ग को इस पैकेज का लाभ मिलेगा। लोन बिना ग्यारंटी के दिए जायेंगे। लेकिन विडम्बना है कि 20 लाख करोड़ के पैकेज से किसी एक वर्ग को भी ठीक से लाभ नही मिल सका। बैंको से लोन बिना ग्यारंटी के नही मिल सका। इस बार फिर से देश विकट परिस्थितियो से जुझ रहा है और उम्मीद करता है कि अबकी बार सरकार किसी भी पैकेज का जुमला सुनाकर आम जनता को हताश न करे।

चुनाव से जरूरी था मेडिकल काॅलेज

देशभर में चुनावी पर्व बड़ी धूमधाम से मनाए गए। लाखो लोगो की भीड़ इक्टठा की गई। करोड़ो रूपया चुनाव में लूटाया गया। लेकिन एक बार भी किसी को कोरोना से देश में होने वाले विनाश के बारे में चिंता करते नही देखा गया। चुनाव से जुरूरी वक्त था यहां स्वास्थ्य व्यवस्थाओ में सुधार लाना। जिन शहरो में मेडिकल काॅलेज प्रस्थावित है वहां मेडिकल काॅलेज जल्द बनवाना। हालांकि सरकार के पास अब भी वक्त है। कोरोना के बढ़ते प्रकोप को रोकने के लिए कोई योजना बनाना बेहत जरूरी है। साथ ही मेडिकल काॅलेज सहित स्वास्थ्य व्यवस्थाओ को सुद्रिड़ करना भी आवश्यक है।

व्यापारियो ने किया स्टाक फिर बढ़ाए भाव

पिछले साल की तरह इस बार भी व्यापारियो ने गुटखा, पान सहित राशन का स्टाॅक करके अपने भाव बड़ा दिए है। एक तरफ गरीब को दो वक्त की रोटी मुनासिब होना दुबर हो रहा है वही लालची व्यापारियो की कालाबाजारी ने गरीब की कमर तोड़ दी। जो दाल, आटा कल तक कम दामो पर बिक रहा था आज अचानक उनके दाम आसमान छू गए है। गुटखा के शौकीन तो डबल दाम देकर तम्बांकू रगड़ रहे है। जिला प्रशासन को चाहिए की एक बार शहर में भ्रमण कर लालची व्यापारियो से उनका भाव जाने और जो अधिक दाम ले रहा है उन पर सख्त कार्रवाई करे।

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