मध्‍य प्रदेश के पच्चीस लाख किसान अब नहीं होंगे डिफाल्टर, ब्याज भरेगी शिवराज सरकार
खरीफ फसलों का ऋण चुकाने के लिए शिवराज सरकार ने तीसरी बार बढ़ाई अवधि।


*बैंकों को अनुदान ब्याज के रूप में 50 करोड़ रुपये से अधिक अतिरिक्त देगी सरकार*
भोपाल। प्रदेश की प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों से ऋण लेने वाले 25 लाख से ज्यादा किसान अब डिफाल्टर नहीं होंगे। इसके लिए सरकार ने ऋण अदायगी की अवधि बढ़ा दी है। किसानों पर ब्याज का बोझ न आए, इसके लिए सरकार ने अतिरिक्त ब्याज अनुदान देने का फैसला किया है। इसके तहत करीब पचास करोड़ रुपये सहकारी बैंकों को दिए जाएंगे। यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि कोरोनाकाल में पहले से परेशान चल रहे किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज योजना का लाभ मिलता रहे। इस बार खरीफ फसलों के लिए नौ हजार करोड़ रुपये से ज्यादा ऋण देने का लक्ष्य है। प्रदेश में शिवराज सरकार कृषि लागत घटाने के लिए किसानों को सहकारी समितियों के माध्यम से शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर अल्पावधि कृषि ऋण उपलब्ध कराती है। पिछले साल करीब 14,500 करोड़ रुपये का ऋण खरीफ और रबी फसलों के लिए 25 लाख से ज्यादा किसानों को दिया गया था। कोरोना संकट की वजह से किसान खरीफ का ऋण नहीं चुका पाए और सरकार ने उनकी स्थिति को देखते हुए ऋण चुकाने की अंतिम तारीख 28 मार्च से बढ़ाकर 30 अप्रैल की थी। कोरोना कर्फ्यू के कारण इसे एक बार और बढ़ाकर 31 मई किया गया। वहीं, केंद्र सरकार द्वारा खरीफ 2020 और रबी 2020-21 के लिए ऋण अदायगी की अंतिम तारीख 30 जून कर दी है। हालांकि, अवधि बढ़ने के बाद सहकारी समितियों को जो अतिरिक्त ब्याज सहकारी बैंकों को देना होगा, उसकी वसूली किसानों से नहीं होगी। इसके लिए सरकार उन्हें अतिरिक्त ब्याज अनुदान देगी। सहकारिता विभाग के प्रारंभिक आकलन के अनुसार यह राशि पचास करोड़ रुपये से ज्यादा होगी। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सहकारिता विभाग को निर्देश दिए हैं कि किसानों पर इस संकटकाल में कोई अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं आना चाहिए साथ ही उन्हें खरीफ फसलों की तैयारी के लिए खाद-बीज के साथ अन्य तैयारियों के लिए पात्रता अनुसार ऋण भी मिलेगा। इस बार नौ हजार करोड़ रुपये से अधिक ऋण देने का लक्ष्य रखा गया है विभाग के संयुक्त पंजीयक अरविंद सिंह सेंगर ने बताया कि ऋण चुकाने की अवधि बढ़ाकर किसानों को राहत और ब्याज अनुदान देकर समितियों की सहायता सरकार करेगी इसके लिए प्रस्ताव बुलाए जा रहे हैं। प्रदेश के पच्चीस लाख किसान अब नहीं होंगे डिफाल्टर, ब्याज भरेगी शिवराज सरकार
खरीफ फसलों का ऋण चुकाने के लिए शिवराज सरकार ने तीसरी बार बढ़ाई अवधि।
बैंकों को अनुदान ब्याज के रूप में 50 करोड़ रुपये से अधिक अतिरिक्त देगी सरकार
भोपाल। प्रदेश की प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों से ऋण लेने वाले 25 लाख से ज्यादा किसान अब डिफाल्टर नहीं होंगे। इसके लिए सरकार ने ऋण अदायगी की अवधि बढ़ा दी है। किसानों पर ब्याज का बोझ न आए, इसके लिए सरकार ने अतिरिक्त ब्याज अनुदान देने का फैसला किया है। इसके तहत करीब पचास करोड़ रुपये सहकारी बैंकों को दिए जाएंगे। यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि कोरोनाकाल में पहले से परेशान चल रहे किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज योजना का लाभ मिलता रहे। इस बार खरीफ फसलों के लिए नौ हजार करोड़ रुपये से ज्यादा ऋण देने का लक्ष्य है। प्रदेश में शिवराज सरकार कृषि लागत घटाने के लिए किसानों को सहकारी समितियों के माध्यम से शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर अल्पावधि कृषि ऋण उपलब्ध कराती है। पिछले साल करीब 14,500 करोड़ रुपये का ऋण खरीफ और रबी फसलों के लिए 25 लाख से ज्यादा किसानों को दिया गया था। कोरोना संकट की वजह से किसान खरीफ का ऋण नहीं चुका पाए और सरकार ने उनकी स्थिति को देखते हुए ऋण चुकाने की अंतिम तारीख 28 मार्च से बढ़ाकर 30 अप्रैल की थी। कोरोना कर्फ्यू के कारण इसे एक बार और बढ़ाकर 31 मई किया गया। वहीं, केंद्र सरकार द्वारा खरीफ 2020 और रबी 2020-21 के लिए ऋण अदायगी की अंतिम तारीख 30 जून कर दी है। हालांकि, अवधि बढ़ने के बाद सहकारी समितियों को जो अतिरिक्त ब्याज सहकारी बैंकों को देना होगा, उसकी वसूली किसानों से नहीं होगी। इसके लिए सरकार उन्हें अतिरिक्त ब्याज अनुदान देगी। सहकारिता विभाग के प्रारंभिक आकलन के अनुसार यह राशि पचास करोड़ रुपये से ज्यादा होगी। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सहकारिता विभाग को निर्देश दिए हैं कि किसानों पर इस संकटकाल में कोई अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं आना चाहिए साथ ही उन्हें खरीफ फसलों की तैयारी के लिए खाद-बीज के साथ अन्य तैयारियों के लिए पात्रता अनुसार ऋण भी मिलेगा। इस बार नौ हजार करोड़ रुपये से अधिक ऋण देने का लक्ष्य रखा गया है विभाग के संयुक्त पंजीयक अरविंद सिंह सेंगर ने बताया कि ऋण चुकाने की अवधि बढ़ाकर किसानों को राहत और ब्याज अनुदान देकर समितियों की सहायता सरकार करेगी इसके लिए प्रस्ताव बुलाए जा रहे हैं।

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