अधिकारियों की मिलीभगत के कारण जस का तस रह गया तालाब, ना कोई कार्रवाई ना कोई जांच?

ग्राम पंचायत बही में भ्रष्टाचार चरम पर तालाब के पैसे निकल चुके हैं लेकिन जमीन पर तालाब ही नहीं तो आखिर यह पैसा किसकी जेब में गया पैसा निकला काम नहीं हुआ पूरा फिर भी अधिकारी मोन वैसे तो पंचायत कार्य को पूरा कराने की जवाबदारी सचिव की होती है साथ ही इंजीनियर का दायित्व बनता है कि क्या काम ठीक से हो रहा है या नहीं अगर दोनों ही मिल जाए तो आप समझ सकते हो कि क्या कुछ नहीं हो सकता?

मल्हारगढ़ जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत बही तालाब निर्माण में भारी भ्रष्टाचार सारा पैसा सचिव के जेब में और इंजीनियर साहब दो परसेंट तीन परसेंट काम बाकी कर काम को अटका ना शासन को चूना लगाने जैसा आपको बता दें की इस पंचायत में मनरेगा के अंतर्गत होने वाले कार्य जेसीबी किए जा रहे पूर्व में अधूरे पड़े तालाब व उन तालाबों की जमीनी हकीकत अगर खगाली जाए तो स्थिति बहुत ही खराब व चिंताजनक है शासन की योजनाओं को पलीता लगाते हुए ग्राम पंचायत सचिव अपने निजी कार्यों में मगन मस्त है । पूर्व में भी सोशल मीडिया पर इन तालाबों मुद्दा बड़ा जोर शोर से गरमाया था लेकिन अधिकारियों की मिलीभगत के कारण जस का तस रह गया ना कोई कार्यवाही हुई ना ही कोई जांच लेकिन सोचने वाली बात यह है कि जब प्रत्येक पंचायत में काम को देखने वाला इंजीनियर भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाए तो आखिरकार काम कैसे होगा अब देखना है कि उच्च स्तर के अधिकारी इस मामले में जांच कर क्या कार्रवाई करते हैं

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