प्रदेश में उपचुनाव का ऐलान, एक बार फिर शिवराज-कमलनाथ आमने-सामने

बीजेपी का नारा- शिवराज सरकार, भरोसा बरकरार, कांग्रेस को दमोह मॉडल पर भरोसा

मध्यप्रदेश में उपचुनाव के लिए बिगुल बज गया है। निर्वाचन आयोग ने मंगलवार को चुनाव कार्यक्रम जारी कर दिया। प्रदेश की एक लोकसभा सीट खंडवा, विधानसभा सीट जोबट, पृथ्वीपुर और रैगांव में 30 अक्टूबर को मतदान होगा। परिणाम 2 नवंबर यानी धनतेरस के दिन आएगा।
उपचुनाव का ऐलान होने के बाद मुख्यमंत्री ने अपना कार्यक्रम बदल दिया है। वे दोपहर 12 बजे, बीजेपी दफ्तर पहुंचे। यहां प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा, प्रदेश संगठन महामंत्री सुहास भगत सहित अन्य बड़े पदाधिकारियों के साथ बंद कमरे में बैठक की। सीएम हाउस में मंगलवार को भी मंत्रियों की बैठक होने वाली है। सीएम हाउस में होने वाली बैठक में उपचुनाव की रणनीति पर चर्चा होगी। इस दौरान मुख्यमंत्री उन मंत्रियों से फीडबैक लेंगे, जिन्हें चार सीटों की जिम्मेदारी दी गई है।
पिछली बैठक में उपचुनाव के लिए 14 कमेटियां भी बनाई गई थीं, जिसमें 3-3 मंत्रियों को रखा गया था। ये मंत्री तीन दिन से उपचुनाव वाले क्षेत्र में डेरा डाले हुए थे। सीएम इन मंत्रियों के साथ अलग से बैठक करेंगे। इससे पहले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 24 सितंबर को मंत्रियों की बैठक में कहा था कि जितनी जल्दी हो सके, निर्माण कार्यों के भूमिपूजन का कार्यक्रम तय कर लें।

2023 विधानसभा का सेमीफाइनल मान रही है बीजेपी-कांग्रेस

बीजेपी-कांग्रेस, दोनों ही दल उपचुनाव को 2023 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश में सत्ता का सेमीफाइनल मान रही है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ एक बार फिर चुनाव मैदान में आमने-सामने होंगे। बीजेपी विकास को आगे रखकर ही वोट मांगेगी। इसके लिए नारा दिया है- शिवराज सरकार, भरोसा बरकरार, जबकि कांग्रेस को जनता से सीधे संवाद के माध्यम से दमोह उपचुनाव जीत के मॉडल पर भरोसा है। इसी पैटर्न को आने वाले उपचुनावों में भी लागू किया जाएगा।
खंडवा लोकसभा सीट बीजेपी सांसद नन्द कुमार सिंह चौहान के निधन से खाली हुई है। इसके अलावा पृथ्वीपुर विधानसभा सीट कांग्रेस पूर्व मंत्री ब्रजेन्द्र सिंह राठौर के निधन से खाली हुई। जोबट विधानसभा सीट कांग्रेस के कलावती भूरिया के निधन से खाली हुई, जबकि रैगांव विधानसभा सीट BJP जुगल किशोर बागरी के निधन से खाली हुई।

हाईकोर्ट ने कर दिया था रास्ता साफ

इससे पहले हाई कोर्ट ने उपचुनाव को टालने के लिए लगी याचिका को खारिज कर दिया था। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि चुनाव कराने का अधिकार चुनाव आयोग के पास है। आयोग कोविड गाइडलाइन का पालन करते हुए वोटिंग करा सकता है। याचिका पर इससे पहले हुई सुनवाई में हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग से जवाब मांगा था। आयोग ने अपने जवाब में बताया कि उपचुनाव के लिए गाइडलाइन पहले ही जारी हो चुकी है। आयोग पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि कोरोना की तीसरी लहर की आशंका खत्म होने के बाद ही उपचुनाव कराए जाएंगे।

बीजेपी इसलिए झोंकेगी ताकत

खंडवा (लोकसभा) निमाड़ की इस लोस सीट के लिए कांग्रेस से अरुण यादव की दावेदारी है। अर्चना चिटनीस, कृष्णमुरारी मोघे और कैलाश विजयवर्गीय की दावेदारी से भाजपा में असमंजस है। राजपाल सिंह तोमर के नाम पर भी मंथन चल रहा है।

जोबट: यह विस सीट आदिवासी बहुल है। 2018 के चुनाव में यह वर्ग भाजपा से नाराज रहा था। इस वर्ग का विश्वास जीतना भाजपा के लिए बड़ी चुनौती है। इस वर्ग को अपने समर्थन में लाने के लिए हाल ही में वरिष्ठ पदों पर नियुक्ति की गई है।

रैगांव : विंध्य क्षेत्र की इस सीट पर अजा वर्ग के मतदाताओं की संख्या काफी ज्यादा है। इस सीट पर कब्जा बरकरार रखना भाजपा के लिए टेढ़ी खीर है।

पृथ्वीपुर : बुंदेलखंड क्षेत्र की इस सीट पर सामान्य और पिछड़ा वर्ग का दबदबा है। आर्थिक असमानता बड़ी समस्या है। कांग्रेस यहां से आगे रही है।

खंडवा उपचुनाव में कांग्रेस का दमोह मॉडल!

चुनाव जिताने का जिम्मा स्थानीय नेताओं पर, महंगाई, बेरोजगारी और लोकल मुद्दों पर सरकार की घेराबंदी का प्लान; बीजेपी का कैम्पेन शिवराज ही करेंगे लीड

Leave a Reply