नीमच कृषि उपज मंडी में पनपता मिलावट का मायाजाल घातक साबित होता जा रहा है…..?

नीमच। कृषि उपज मंडी में मिलावटखोरी का मायाजाल घातक साबित होता जा रहा है। लालची व्यापारी चंद रूपयो के खातिर खतरनाक केमिकल के जरिए कृषि जिंसो में मिलावट करते है, इतनी बढिया खूबसूरत बनाते है, जो नेचुरल से भी ज्यादा खूबसूरत दिखती है। उसे बाहर भेजते है, यही मिलावटी सामग्री घूमकर पूरे देश में पहुंच जाती है। जिसे लाखों लोग सेवन करते है। रंगीन गेहूं से लेकर धनिया में मिलावट के कई मामले सामने आ चुके है। व्यापारी संघ के पदाधिकारी(सुबह-शाम मंदिर जाते है) मिलावटखोरों का समर्थन करते हुए नजर आए है। घातक कलर चढाने की आशंका में हाल ही में 300 बोरी धनिया मल्हारगढ में पकडा, जिसे जब्ती में लेकर सेंपल लिए है। इसके सेवन से केंसर जैसी गंभीर बीमारी हो सकती है। इस पर व्यापारी संघ के पदाधिकारी फैम्यूकेशन यानी केमिकल से स्प्रे मारने की छूट की बात करते है, पर धनिया, हल्दी, मिर्ची, अजवाईन ऐसी कृषि जिंसे है, जिन पर किसी भी पर के केमिकल का स्प्रे करना मानव स्वास्थ्य के लिए घातक है। 300 बोरी अजवाईन का हजारों लोग सेवन करते। इसमें आप और हम भी शामिल हो सकते है। क्या व्यापारी संघ के पदाधिकारी अपने बच्चों को अपने हाथ से इस प्रकार के धनिए को खिला सकते है! इस प्रश्न पूछा जाए तो इसका जवाब नहीं मिलेगा।

कुछ माह पहले मिलावटखोरी की सारी हदें पार करने वाला अनौखा मिलावटखोरी का तरीका पकड में आया था। कंट्रोल पर मिलने वाले घटिया लाल गेहूं को कलर चढाकर उसे सरबती गेहूं का रूप देकर बेचा जा रहा था। खाद्व एवं सुरक्षा अधिकारी संजीव मिश्रा ने इसका भंडाफोड किया था, लेकिन तथाकथित मीडिया हाउस के मालिकों ने इस केस को हल्का करने की कोशिश की और जहरीले कलर को एडिबल बताया। यह चर्चित मामला सुप्रीम कोर्ट में भी पहुंचा, सुप्रीम कोर्ट के जजों ने वकील को फटकारा और कहा कि क्या आप ऐसे गेहूं अपने बच्चों को खिला सकते है, आरोपियों की तरफ से केस लडने वाले वकील का सिर शर्म से झुक गया था और कुछ नहीं बोला। क्या यह वाकिया व्यापारी संघ के पदाधिकारी पर भी लागू हो सकता है।

खाद्य सामग्रियों में मिलावट पर कार्रवाई करने वाले खाद्य एवं सुरक्षा अधिकारी संजीव मिश्रा का लालची व्यापारी, संघ के पदाधिकारी लाख विरोध करें, लेकिन जन स्वास्थ्य के लिए मिश्रा की कार्रवाई प्रशंसनीय है। पहले के खाद्य एवं सुरक्षा अधिकारी त्यौहार आते तब बाजार में निकलते थे, मिठाईयों पर भनभन्नाती मख्खियों को उडाते, जलेबी को ढंकने व सडी-गली मिठाईयों को नष्ट करवाने का ही काम करते थे और मंडराती मख्खियों को मरवाते थे, पर खाद्य एवं सुरक्षा अधिकारी मिश्रा जब से नीमच आए तब से मिलावट के मगरमच्छों को सलाखों के पीछे डाल रहे है। कई खिलाफ रासुका की कार्रवाई हो चुकी है। नीमच की किराना मंडी का नाम पहले शान से लिया जाता था, अब मिलावट में नंबर वन पर लिया जाता है। आज पूरे देश में नीमच की थू-थू हो रही है, फिर भी मिलावटखोर बाज नहीं आ रहे है।नीमच व्यापारी संघ के पदाकारी धर्म-धाम में विश्वास रखते है, पूजापाठी है, दोनों समय मंदिर जाते हुए इन्हें देखा जा सकता है, ये भगवान को साक्षी मानकर मिलावटखोरी का विरोध करें, फिर देखें मन को कितनी संतुष्टी होगी, क्योंकि मन ही मंदिर है, भले ही मंदिर जाए या न जाए। उनके द्वारा जहर परोसने वालों का समर्थन करने से कई लोगों की जान जा रही है, जहरीली सामग्री उनके घरों तक भी पहुंच सकती है, उनके परिवार के सदस्य भी बीमार पड सकते है।

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