भारत और अमरीका ने जलवायु एवं स्वच्छ ऊर्जा चुनौतियों का सामना करने के लिए इनोवेशन को सहायता देने के एक नए कार्यक्रम की घोषणा की

भारत-अमरीका ने एस एंड टी आधारित उद्यमी पहल के एक कार्यक्रम को मदद करने की घोषणा की है, जो अगली पीढ़ी की स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा भंडारण, कार्बन स्ववियोजन, जलवायु एवं स्वच्छ ऊर्जा चुनौतियों का सामना करने के लिए काम करेगा।

कार्यक्रम का नाम है ‘प्रौद्योगिकी-आधारित ऊर्जा समाधान: इनोवेशन फॉर नेट ज़ीरो, जिसका आह्वान एस एंड टी उद्यमिता को बढ़ावा देने वाले एक गैर-लाभकारी संगठन, सोशल अल्फा के साथ साझेदारी में, यूनाइटेड स्टेट्स-इंडिया साइंस एंड टेक्नोलॉजी एंडोमेंट फंड (यू एस आई एस टी ई एफ) द्वारा इग्निशन ग्रांट के लिए किया गया है। इस कार्यक्रम के अंतर्गत इस क्षेत्र में ‘प्रौद्योगिकी शोस्टॉपर्स’ या भारत-अमरीका के एस एंड टी-आधारित संयुक्त उद्यमशीलता पहल की पहचान की जाएगी और उसकी मदद की जाएगी।

जलवायु परिवर्तन आज की विश्व की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है, जो समाधान ढूंढने के लिए वैश्विक साझेदारी को बढ़ावा देने की आवश्यकता की ओर इशारा करती है। अप्रैल 2021 में भारत-अमेरिका जलवायु और स्वच्छ ऊर्जा एजेंडा 2030 के लिए हुई साझेदारी इस बात की प्रतिबद्धता प्रदर्शित करती है कि दोनों देश जलवायु और स्वच्छ ऊर्जा के अपने महत्वाकांक्षी लक्ष्यों को प्राप्त करने और द्विपक्षीय सहयोग को बढ़ावा देने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं। नया कार्यक्रम स्वच्छ ऊर्जा साझेदारी के क्षेत्र में अमरीका-भारत के लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण है जिसका प्रशासन यूनाइटेड स्टेट्स-इंडिया साइंस एंड टेक्नोलॉजी एंडोमेंट फंड (आई यू एस एस टी एफ) द्वारा किया जाएगा। आई यू एस एस टी एफ दोनों देशों (भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डी एस टी) तथा अमरीका के विदेश विभाग) का एक संयुक्त मंच है।

यू एस आई एस टी ई एफ का औपचारिक रूप से शुभारंभ मंच के सह-अध्यक्षों, श्री संजीव वार्ष्णेय, सलाहकार और प्रमुख, अंतर्राष्ट्रीय द्विपक्षीय सहयोग, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार और श्री जॉन स्पीक्स, ऊर्जा, पर्यावरण, विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री (कार्यवाहक), अमेरिकी दूतावास, नई दिल्ली द्वारा किया गया। यह कार्यक्रम ऐसे उपायों की आवश्यकता का पता लगाएगा जिनसे नेट-ज़ीरो की तरफ आगे बढ़ने, अत्याधुनिक और स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों का लाभ लेने की दिशा में प्रगति की जा सके।

श्री वार्ष्णेय ने सहयोगी उद्यमिता की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वैश्विक चुनौती से निपटने के लिए नवीन समाधान प्रदान करने में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के योगदान की भूमिका सराहनीय है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र विशेष की चुनौती का समाधान पाने में सोशल अल्फा के साथ आई यू एस एस टी एफ की साझेदारी में व्यावसायिक व्यवहार्यता है और इससे इस क्षेत्र में अच्छे प्रदर्शन योग्य प्रौद्योगिकी नवाचार की उम्मीद है।

श्री स्पीक्स ने जोर देकर कहा कि यूएसआईएसटीईएफ की नेट-जीरो के लिए नवाचारों को लक्षित करने वाली नई पहल, अमेरिका-भारत समग्र वैश्विक रणनीतिक साझेदारी का एक और मजबूत उदाहरण है। उन्होंने कहा कि इसके मध्यम से हमारे सामने मौजूद जलवायु संकट से तत्काल निपटने के लिए संयुक्त रूप से नई स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों के विकास को गति प्रदान करने में अमेरिका और भारत के साझा प्रयासों की शक्ति का उपयोग संभव होगा।

सोशल अल्फा के संस्थापक और सीईओ श्री मनोज कुमार ने कहा कि “हमें अत्यधिक तेजी के साथ एक नवाचार पाइपलाइन को विकसित करना होगा और महत्वपूर्ण स्वच्छ प्रौद्योगिकियों पर हरित प्रीमियम को कम करने के लिए भारी निवेश करना होगा तथा नेट ज़ीरो की तरफ बढ़ने के लिए नए बाजार और उद्योग बनाने हेतु उद्यमशील प्रतिभा को आकर्षित करना होगा। साथ ही यह भी सुनिश्चित करना होगा कि स्वच्छ, किफायती और विश्वसनीय ऊर्जा तक सभी की सहज पहुँच हो।

यूएसआईएसटीईएफ की कार्यकारी सचिव और आई यू एस एस टी एफ की कार्यकारी निदेशक डॉ. नंदिनी कन्नन ने कहा कि यह कार्यक्रम भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के उद्यमियों और अनुसंधान से जुड़े समुदायों से एक साथ आने और महत्वपूर्ण जलवायु और स्थिरता चुनौतियों से निपटने के लिए परिवर्तनकारी समाधान विकसित करने का आह्वान करता है।

विशेषज्ञों के एक पैनल ने स्वच्छ ऊर्जा और स्थिरता चुनौतियों का समाधान पाने के लिए एक सक्षम इको सिस्टम के विकास में उद्योग, शिक्षा, वित्तीय संस्थानों, सरकारी एजेंसियों, नीति और संगठनों सहित विभिन्न पक्षों की महत्वपूर्ण भूमिका पर चर्चा की। वक्ताओं में सुश्री सीमा पॉल, कार्यक्रम निदेशक, सिकोइया क्लाइमेट फंड, श्री प्रशांत प्रकाश, संस्थापक साझेदार, एक्सेल, डॉ. प्रवीर सिन्हा, सीईओ, टाटा पावर, और डॉ. विलियम तुमास, एसोसिएट प्रयोगशाला निदेशक, राष्ट्रीय अक्षय ऊर्जा प्रयोगशाला आदि शामिल थे।

इग्नीशन ग्रान्ट के बारे में और अधिक जानकारी के लिए www.iusstf.org पर लॉग ऑन कर सकते हैं।

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