“भारतीय सांकेतिक भाषा” पर डीईपीडब्ल्यूडी की झांकी इस वर्ष की गणतंत्र दिवस परेड का विशेष आकर्षण रही

वर्षांत समीक्षा-2021

दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग

 

दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग की सोच एक ऐसे समावेशी समाज का निर्माण करने की है जिसमें दिव्यांगजन अपने विकास के लिए पर्याप्त सहयोग के साथ उत्पादक, सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन जी सकें। इसका उद्देश्य शैक्षिक, आर्थिक तथा सामाजिक विकास और जहां कहीं आवश्यक हो, पुनर्वास के कार्यक्रमों के माध्यम से दिव्यांगजनों की मदद और उनका सशक्तिकरण करना है। दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण का मतलब सामाजिक, शैक्षिक और आर्थिक रूप से दिव्यांगजनों को उनका अधिकार दिलाते हुए उनका सशक्तिकरण है।

सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के तहत दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग (डीईपीडब्ल्यूडी) की स्थापना मई 2012 में की गई थी, जिसका उद्देश्य दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण और समावेश को आसान बनाना और दिव्यांगजनों के विकास के सभी एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए एक नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करना है। दिव्यांगजनों का सशक्तिकरण एक अंतर-अनुशासनात्मक प्रक्रिया है, जिसमें रोकथाम, प्रारंभिक पहचान, हस्तक्षेप, शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यावसायिक प्रशिक्षण, पुनर्वास और सामाजिक एकीकरण जैसे विभिन्न पहलु शामिल हैं। विभाग का विजन, मिशन और रणनीतियां हैं: विजन: एक ऐसे समावेशी समाज का निर्माण करना जिसमें दिव्यांगजनों के विकास के लिए समान अवसर प्रदान किया जाता हो ताकि वे उत्पादक, सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन जी सकें। मिशन: दिव्यांगजनों को विभिन्न अधिनियमों/संस्थानों/संगठनों और पुनर्वास के लिए योजनाओं के माध्यम से सशक्त बनाना और एक ऐसा सक्षम वातावरण तैयार करना है जिसमें ऐसे लोगों को समान अवसर मिले और उनके अधिकारों की सुरक्षा हो सके और जो उन्हें समाज के स्वतंत्र और उत्पादक सदस्यों के रूप में भाग लेने में सक्षम बनाता हो।

दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग की प्रमुख उपलब्धियां हैं:

भारतीय सांकेतिक भाषा” पर डीईपीडब्ल्यूडी की झांकी इस वर्ष की गणतंत्र दिवस परेड में विशेष आकर्षण का केंद्र रही:

भारतीय सांकेतिक भाषा अनुसंधान और प्रशिक्षण केंद्र (आईएसएलआरटीसी), दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग (डीईपीडब्ल्यूडी), सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की झांकी ने इस वर्ष की गणतंत्र दिवस परेड में ‘भारतीय सांकेतिक भाषा- एक राष्ट्र, एक सांकेतिक भाषा’ विषय का प्रदर्शन किया।’ इसने एक देश में भारतीय सांकेतिक भाषा (आईएसएल) की एकीकृत प्रकृति पर प्रकाश डाला जहां बोली जाने वाली भाषाओं में काफी विविधता है। इस झांकी का उद्देश्य भारतीय सांकेतिक भाषा को लेकर लोगों में जागरूकता फैलाना और आईएसएल को बढ़ावा देकर श्रवण बाधित व्यक्तियों (बधिरों) के लिए बाधा मुक्त वातावरण बनाने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित करना था।

सांकेतिक भाषा एक दृश्य भाषा है जो सुनने में अक्षम लोगों के लिए संचार के साधन के रूप में हाथों, चेहरे और शरीर की गतिविधियों का उपयोग करती है। यह एक अनूठी और एकीकृत भाषा है जो देश में सभी सुनने में अक्षम लोगों को एक-दूसरे से जोड़ती है। देश में बोली जाने वाली कई भाषाएं हैं, लेकिन भारतीय सांकेतिक भाषा एक ही है। श्रवण बाधित लोगों की पहुंच बढ़ाने की दृष्टि से, भारतीय सांकेतिक भाषा के विकास और उसे आगे बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करने वाले एक संस्थान को स्थापित करने की आवश्यकता महसूस की गई।

बेंचमार्क दिव्यांगजनों के लिए उपयुक्त चिन्हित पदों की सूची अधिसूचित:

दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग ने 4 जनवरी 2021 को केंद्र सरकार के प्रतिष्ठानों के लिए 3566 पदों को अधिसूचित किया जो दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के तहत बेंचमार्क दिव्यांगजनों (40% और उससे अधिक की दिव्यांगता) के लिए उपयुक्त हैं। इन पदों में समूह ए में 1046, समूह बी में 515, समूह सी 1724 और ग्रुप डी में 281 पद शामिल हैं। दिव्यांगजनों की नई श्रेणियों जैसे आयु के अनुपात से छोटा कद, एसिड अटैक पीड़ित, मस्कुलर डिस्ट्रॉफी, ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर, बौद्धिक अशक्‍तता, सीखने संबंधी विशिष्ट अक्षमता, मानसिक रोग और बहु-दिव्यांगता के लिए उपयुक्त पदों की भी पहचान की गई है।

10,000 शब्दों वाला भारतीय सांकेतिक भाषा शब्दकोश का तीसरा संस्करण जारी:

तत्कालीन केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री श्री थावरचंद गहलोत ने 17 फरवरी, 2021 को एक आभासी कार्यक्रम में “10,000 शब्दों वाला (6,000 पहले के शब्दों सहित) भारतीय सांकेतिक भाषा (आईएसएल) शब्दकोश का तीसरा संस्करण” जारी किया। .

दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के एनआई, आईएसएलआरटीसी द्वारा लाए गए भारतीय सांकेतिक भाषा (आईएसएल) शब्दकोश में कुल 10,000 शब्द हैं जिनमें दैनिक उपयोग, शैक्षणिक, कानूनी और प्रशासनिक, चिकित्सा, तकनीकी, और कृषि से जुड़े शब्द शामिल हैं। वीडियो में संकेत, संकेत के लिए अंग्रेजी शब्द और जहां प्रासंगिक हो वहां चित्र शामिल हैं। इस शब्दकोश में देश के विभिन्न हिस्सों में उपयोग किए जाने वाले क्षेत्रीय संकेत भी शामिल हैं।

शब्दकोष का उपयोग दिव्यांग बच्चों के लिए शैक्षिक सामग्री और स्पीच/टेक्स्ट-टू-साइन और साइन-टू-स्पीच/टेक्स्ट मशीन ट्रांसलेशन सॉफ्टवेयर विकसित करने में संसाधन के रूप में किया जा रहा है। आईएसएल शब्दकोष भारतीय सांकेतिक भाषा के बारे में जागरूकता को बढ़ावा देने, संचार की सुविधा प्रदान करने और सुनने में अक्षम व्यक्तियों को बेहतर पहुंच सेवाएं प्रदान करने के लिए एक महत्वपूर्ण संसाधन है, और इस प्रकार दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के लक्ष्यों को साकार करने में एक आवश्यक कदम है।

सुगम्य भारत ऐप’ का शुभारंभ और एक्सेस-द फोटो डाइजेस्ट’ नामक हैंडबुक जारीः

2 मार्च 2021 को सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के तत्कालीन केंद्रीय मंत्री श्री थावरचंद गहलोत ने नई दिल्ली में आयोजित एक वर्चुअल कार्यक्रम में ‘सुगम्य भारत ऐप’ और ‘एक्सेस-द फोटो डाइजेस्ट’ नाम की हैंडबुक का यहां शुभारंभ किया। इस कार्यक्रम में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय में तत्कालीन राज्यमंत्री श्री रतनलाल कटारिया, दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग की तत्कालीन सचिव श्रीमति शकुंतला डी गैमलिन और दिव्यांजन सशक्तिकरण विभाग की तत्कालीन संयुक्त सचिव श्रीमति तारिका रॉय भी उपस्थित थे। इस ऐप और हैंडबुक का विकास दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग ने किया है। मोबाइल ऐप को एंड्रॉयड उपयोगकर्ता प्लेस्टोर से डाउनलोड कर सकतें हैं। इस ऐप का आईओएस संस्करण 15 मार्च 2021 से उपलब्ध हो गया है।

6 माह अवधि का समुदाय आधारित समावेशी विकास कार्यक्रम शुरू किया गया और कार्यक्रम का पहला बैच शुरू हुआः

19 मई 2021 को सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के तत्कालीन केंद्रीय मंत्री श्री थावरचंद गहलोत ने एक वर्चुअल कार्यक्रम में 6 माह अवधि का समुदाय आधारित समावेशी विकास कार्यक्रम शुरू किया। इस कार्यक्रम का विकास भारतीय पुनर्वास परिषद और यूनिवर्सिटी ऑफ मेलबर्न ने किया है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं का एक पूल बनाना है जो कि आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के साथ ही सामाज में दिव्यांजनों के सशक्तिकरण और पुनर्वास के लिए काम कर सकें। इस कार्यक्रम का पहला बैच आरसीआई द्वारा चयनित 16 संगठनों में सितम्बर 2021 में शुरू हुआ। इस पहले बैच के लिए 38 दिव्यांग छात्रों समेत कुल 527 छात्रों को चुना गया। माननीय केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेन्द्र कुमार ने गत 30 अक्टूबर 2021 को इन छात्रों के साथ बातचीत की।

बच्चों के लिए 14 क्रॉस डिसएबिलिटी अर्ली इंटरवेंशन सेंटर शुरू किए गएः

एक अनूठी पहल के तहत तत्कालीन केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री श्री थावरचंद गहलोत ने एक वर्चुअल कार्यक्रम में 14 जून 2021 को नई दिल्ली में 7 राष्ट्रीय संस्थानों और 7 समग्र क्षेत्रीय केंद्रों में बच्चों के लिए 14 क्रॉस डिसएबिलिटी अर्ली इंटरवेंशन सेंटर शुरू किए। इन विशिष्ट रूप से डिजाइन किए गए केंद्रों में एक ही छत के नीचे विभिन्न अक्षमताओं की पहचान, उनकी स्क्रीनिंग, पुनर्वास, काउंसलिंग, तथा थेरेपी सुविधाएं होंगी और इन सब सुविधाओं तक सबकी पहुंच सुनिश्चित की जाएगी। इन केंद्रों में जोखिम वाले मामलों की पहचान के लिए बच्चों की स्क्रीनिंग करने के बाद उन्हें उपयुक्त पुनर्वास देखभाल के लिए भेजा जाएगा। इसके साथ ही इनमें स्पीच थरेपी, ऑक्यूपेशनल थरेपी और फिजियोथरेपी की भी सुविधाएं होंगी। बच्चों के साथ-साथ यहां अभिभावकों की काउंसलिंग और उनके प्रशिक्षण के साथ-साथ ऐसे बच्चों के भाई-बहनों और मित्रों की भी काउसलिंग की जाएगी। यह इस केंद्र का मुख्य कार्य है ताकि जोखिम वाले बच्चों के अभिभावकों और उनके भाई-बहन को इन बच्चों के साथ व्यवहार करने के योग्य बनाया जा सकें। इन केंद्रों में बच्चों को स्कूल के लिए तैयार करने और उनकी शारीरिक और मानसिक योग्यता को बढ़ाने की सुविधा भी प्रदान की जाएगी। जिसमें उनकी संचार और भाषिक कुशलता बढ़ाना शामिल है ताकि वे एक स्वतंत्र जीवन जी सकें।

सांकेतिक भाषा दिवस पर भारतीय सांकेतिक भाषा में कक्षा 1 से 5  तक के लिए पाठ्यपुस्तकों का डिजिटल प्रारूप लॉन्च किया गया:

भारतीय सांकेतिक भाषा अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र (आईएसएलआरटीसी) ने 23 सितम्बर 2021 को सांकेतिक भाषा दिवस मनाया। इस अवसर पर आईएसएलआरटीसी ने एनसीईआरटी की कक्षा 1 से 5 तक की पाठ्यपुस्तकों का आईएसएल ई-कंटेंट जारी किया। इस सांकेतिक भाषा कार्यक्रम का विकास आईएसएलआरटीसी ने अपनी एक परियोजना के तहत किया है जिसमें एनसीईआरटी की कक्षा 1 से 5 तक की 20 पाठ्यपुस्तकों के कुल 310 अध्यायों को 490 आईएसएल वीडियो और ऑडियो, तस्वीरों और कैप्शन के रूप में प्रस्तुत किया गया।

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने टोक्यो-2020 पैरालंपिक पदक विजेताओं और भारतीय टीम के सदस्यों को सम्मानित कियाः

केन्द्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेन्द्र कुमार और केन्द्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री श्री रामदास अठावले ने 10 सितंबर, 2021 को नई दिल्ली के अशोका होटल के सभागार में आयोजित एक कार्यक्रम में टोक्यो-2020 पैरालंपिक पदक विजेताओं और भारतीय टीम के अन्य सदस्यों के साथ-साथ उनके प्रशक्षिकों को सम्मानित किया।

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने पहली बार पैरालंपिक विजेताओं को नकद पुरस्कार प्रदान करने का निर्णय लिया है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने स्वर्ण पदक विजेताओं के लिए 10 लाख रुपये, रजत पदक के लिए 8 लाख रुपये और कांस्य पदक विजेताओं के लिए 5 लाख रुपये के नकद पुरस्कार की घोषणा की। नकद पुरस्कार की राशि का भुगतान सीधे तौर पर खिलाड़ियों के बैंक खाते में किया जाएगा।

केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेन्द्र कुमार ने दिव्यांगजनों के अधिकारों के बारे में विभिन्न स्तरों के पदाधिकारियों के लिए प्रशिक्षण मॉड्यूल जारी किएः

केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेन्द्र कुमार ने नई दिल्ली स्थित इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में गत 9 नवम्बर 2021 को सेंट्रल सेक्टर स्कीम के लिए प्रशिक्षण मॉड्यूल जारी किए जिनमें ‘इन सर्विस प्रशिक्षण तथा केंद्रीय और राज्य सरकारों तथा स्थानीय निकायों के मुख्य पदाधिकारियों को संवेदनशील बनाने के मॉड्यूल शामिल है।’

इन प्रशिक्षण मॉड्यूल का विकास भारतीय पुनर्वास परिषद (आरसीआई) ने भिन्न-भिन्न स्तरों के लक्षित समूहों जैसे स्वास्थ्य एवं संबंद्ध पेशेवरों, शिक्षण पदाधिकारियों, जमीनी स्तर के पदाधिकारियों, वरिष्ठ एवं मध्यम स्तर के पदाधिकारियों के लिए किया था। यह मॉड्यूल अंग्रेजी और हिन्दी में तस्वीरों और ग्राफिक्स डिजाइन के साथ तैयार किए गए है।

माननीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री और माननीय नागरिक उड्डयन ने हवाई अड्डों और हवाई यात्रा से संबंधित इस श्रृंखला के दूसरे संस्करण को संयुक्त रूप से 19 नवंबर, 2021 को जारी कियाः

पेशेवरों लोगों को संवेदनशील बनाने और उनकी जागरूकता बढ़ाने के लिए विभाग ‘एक्सेस- द फोटो डाइजेस्ट’ शीर्षक वाली हैंडबुक की श्रृंखला विकसित की है। इस श्रृंखला की पहली पुस्तक 2 मार्च, 2021 को जारी की गई। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री तथा नागरिक उड्डयन मंत्री ने हवाई अड्डों और हवाई यात्रा के संबंध में इसका दूसरा संस्करण- ‘डी मिस्टीफाइंग एसेसेबिलिटी इन दा सिविल एविएशन सेक्टर’ 19 नवंबर, 2021 को जारी की। ये हैंड बुक्स विभिन्न रेखा चित्रों और तस्वीरों के माध्यम से हवाई अड्डों और हवाई यात्राओं को सुगम बनाने में मदद करेंगी।

अंतर्राष्ट्रीय दिव्यांगजन दिवस पर राष्ट्रपति कोविंद ने दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण की दिशा में किए गए उत्कृष्ट कार्यों के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किएः

राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद ने दिव्यांगजनों (पीडब्ल्यूडी) के सशक्तिकरण की दिशा में उत्कृष्ट उपलब्धियों और कार्यों के लिए व्यक्तियों, संस्थानों, संगठनों और राज्य/जिला आदि को राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किए।

वर्ष 2020 के लिए दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार निम्नलिखित श्रेणियों के तहत प्रदान किए गएः-

  1. सर्वश्रेष्ठ कर्मचारी/स्व-रोजगार से जुड़ा दिव्यांग;
  2. सर्वश्रेष्ठ नियोक्ता और नियुक्ति अधिकारी और/या एजेंसियां;
  3. दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण के लिए काम करने वाले सर्वश्रेष्ठ व्यक्ति और संस्थान;
  4. प्रेरणास्त्रोत;
  5. दिव्यांगों के जीवन को बेहतर बनाने के उद्देश्य से किया गया सर्वश्रेष्ठ अनुप्रयुक्त अनुसंधान या नवाचार या उत्पाद,
  6. दिव्यांगजनों के लिए बाधा मुक्त वातावरण के निर्माण की दिशा में किया गया उत्कृष्ट कार्य;
  7. पुनर्वास सेवाएं प्रदान करने वाला सर्वश्रेष्ठ जिला;
  8.  उत्कृष्ट रचनात्मक कार्य करने वाला वयस्क दिव्यांग;
  9. सर्वश्रेष्ठ रचनात्मक कार्य करने वाला दिव्यांग बच्चा;
  10. सर्वश्रेष्ठ ब्रेल प्रेस;
  11. दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण को बढ़ावा देने वाला सर्वश्रेष्ठ राज्य;
  12. सर्वश्रेष्ठ दिव्यांग खिलाड़ी।

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