मप्र का बजट: असफल वित्तमंत्री का असफल बजट

वित्तमंत्री जगदीश देवड़ा ने पढ़ा मध्यप्रदेश का हवा-हवाई बजट*
*बुनियादी मुद्दों या‍ जरूरतों का जिक्र तक नहीं*
*खाद और उर्वरक के लिये पिछले बजट से 24 हजार करोड़ कम कर दिया इस बजट में*
*क्‍या खाद के बिना ड्रोन से फसल पैदा करेगे किसान?*
*विजया पाठक, एडिटर, जगत विजन*
मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की सरकार के चौथे कार्यकाल का दूसरा बजट मप्र विधानसभा में पेश किया गया। प्रदेश का यह बजट वित्तमंत्री जगदीश देवड़ा ने पढ़ा। राज्य सरकार ने वर्ष 2022-23 के लिए कुल 2 लाख 79 हजार 237 करोड़ रुपए का बजट पेश किया। लेकिन देखा जाए तो यह पूरा बजट आम आदमी की परेशानियों को कहीं से कहीं तक दूर करता दिखाई नहीं पड़ रहा। भले राज्य सरकार इसे आम आदमी के हित में बता रही हो। लेकिन यह वित्तमंत्री जगदीश देवड़ा की नाकामी का परिणाम है कि वे इस पूरे बजट को जनता के हित के अनुरूप नहीं तैयार कर पाए। इस बजट में मंत्री देवड़ा ने लग्‍जरी कार के लिये 225.88 करोड़ बजट में रखे हैं जो कि पिछली बार से 200 करोड़ रूपये ज्‍यादा है। और तो और 37 लाख लोगों की पेंशन का बजट 133 करोड़ घटा दिया गया। देवड़ा जी ने तो किसान कल्‍याण और कृषि विकास में खाद और उर्वरक के लिये 2021-22 के बजट से 24 हजार करोड़ कम कर दिया। किसान तो अब मंत्री देवड़ा के बजट में प्राथ‍मिकता में ही नही रहा। हास्‍यास्‍पद है कि कृषि बजट तो बढ़ाया पर जरूरी संसाधनों पर पैसा कम कर दिया गया। लगता है कि मंत्री जी बीज और यूरिया की जगह ड्रोन और ऐसे अनावश्‍यक चीजों से खेती किसानी करवायेगी। बजट में सिर्फ औपचारिकता भर की गई है। प्रदेश के बुनियादी मुददों या जरूरतों पर ध्‍यान ही नहीं दिया गया था। प्रदेश की जनता ने आस लगाई थी कि इस बजट में शिवराज सरकार आमजन का ख्‍याल रखेगी और बेरोजगारी एवं मंहगाई पर कुछ राहत जरूर देगी लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। इस समय पूरा प्रदेश मंहगाई और बेरोजगारी से त्राहि-त्राहि कर रहा है। लोगों को खाने तक के लाले पड़े हैं।
वित्तमंत्री देवड़ा की असफलता का पता इस बात से भी लगता है कि उन्होंने पूरे बजट भाषण में इसका कोई उल्लेख नहीं था कि इस वर्ष का बजट मध्यप्रदेश के आम आदमी की प्रति व्यक्ति आय को कहां पहुंचाएगा। बजट में इस बात का उल्लेख भी नहीं है कि जो मध्यप्रदेश में 40 प्रतिशत महंगाई बढ़ी है, उससे आम आदमी को राहत कैसे मिलेगी। पूरे बजट में केवल घोषणाएं हैं कि सरकार यह फैसले लेने जा रही है, सरकार वो काम करने जा रही है बगैरह…बगरैह। वित्तमंत्री जी आपको यह बात मालूम होना चाहिए बजट भाषण में कही गई आपकी बात प्रदेश की जनता की तकदीर बदलने का कार्य करती है।
*सिर्फ रोजगार देने की बाते करते हैं, होता कुछ नहीं-* बजट भाषण में देवड़ा ने लाखों युवाओं को रोजगार देने की बात कही है। लेकिन हकीकत यह है कि रोजगार केवल कुछ लोगों ही मिल पाता है। इसलिए बजट भाषण के दौरान वित्तमंत्री जगदीश देवड़ा ने प्रदेश में बेरोजगारी दर पर कोई बात ही नहीं की। यही नहीं स्वरोजगार से जोड़ने के लिए करोड़ों रुपए के बजट का प्रावधान किया गया। लेकिन सच तो यह है कि अगर आज कोई स्व-रोजगार के लिए शासकीय कार्यालय में आवेदन करता है तो उसे स्वरोजगार खड़ा करते करते दो चार साल लग जाते हैं। अंत में आलम यह होता है कि आवेदनकर्ता थक-हार कर वापस लौट जाता है और यही वजह है प्रदेश में बेरोजगारी दर बढ़ने की, जिस पर वित्तमंत्री ने कोई बात ही नहीं की।
*इन विषयों पर भी साधी चुप्पी-* जब पेट्रोलियम पदार्थ की कीमतें 15 से 20 प्रतिशत बढ़ेगी तो इस महंगाई से आम आदमी की कमर टूट जाएगी। इसका उत्तर बजट भाषण में कहीं नहीं है। नर्मदा घाटी विकास और अटल पथ के बहुप्रचारित योजना के लिए कोई प्रावधान नहीं किया गया है। प्रदेश में 50 प्रतिशत ओबीसी और 30 प्रतिशत एससी-एसटी जो स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में कमजोर है उनके लिए कोई प्रावधान नहीं है।
*संवेदनशीलता दिखाते शिवराज-* मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान संवेदनशील हैं। उन्‍हें आमजनों की परेशानियों का ख्‍याल रहता है। समय समय पर शिवराज आमजनों को राहत देने का ऐलान भी करते हैं लेकिन इस बार के बजट में कैसे वह कुछ भी राहत लोगों को नहीं दे पाए जबकि सबको पता है कि इस समय प्रदेशवासी काफी परेशानी में हैं। लोगों को राहत की बहुत जरूरत है।
*वित्त विभाग से कैसे लीक हुआ बजट-* किसी भी राज्य का बजट उस प्रदेश के जनता की तस्वीर और तकदीर बदलने का कार्य करता है। इसलिए इस बजट को सदन में पेश किए जाने से पूर्व गोपनीय रखा जाता है। लेकिन शिवराज सरकार में इस बार बजट में गोपनीयता जैसी कोई बात थी ही नहीं। पहले ही विपक्षी पार्टी के नेताओं और मीडिया को बजट की जानकारी मिल गई थी। ऐसे में अगर वित्त विभाग से बजट लीक हुआ तो इसकी जिम्मेदारी सिर्फ वित्तमंत्री जगदीश देवड़ा की और उनके मंत्रालय की है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को तुरंत इस पूरे मामले की छानबीन करवाकर जगदीश देवड़ा के खिलाफ कार्य़वाही करना चाहिए। क्रमशः

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