छत्‍तीसगढ़ कांग्रेस में कलह और घमासान

*गरमाया विधायक बृहस्पति सिंह पर हमले का मामला*
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*क्‍या टीएस बाबा को ठिकाने लगाने रची जा रही बड़ी साजिश?*
*क्‍या घमासान का कारण है ढाई-ढाई साल के फार्मूले की विफलता?*
*विधानसभा में हंगामा, निशाने पर सीएम बघेल*
*विजया पाठक, एडिटर,जगत विजन*
छत्तीसगढ़ कांग्रेस में विधायक पर हमले को लेकर कलह शुरू हो गई है। हमले में सिंहदेव के रिश्तेदार का नाम सामने आया था। इस मामले को लेकर सदन में जोरदार हंगामा हुआ। उसके बाद मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री आमने सामने आ गए। अपनी ही सरकार के विरोध में स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने सदन का बहिष्कार कर दिया। टीएस सिंहदेव ने कहा कि रामानुजगंज से कांग्रेस विधायक पर हुए हमले पर जब तक सरकार जांच का आदेश नहीं देती या बयान नहीं देती तब तक वह खुद को इस प्रतिष्ठित सदन का हिस्सा नहीं बनेंगे। गौरतलब है कि 23 जुलाई की देर रात कांग्रेस विधायक बृहस्पति सिंह के काफिले पर हमला हुआ था। कुछ युवकों ने उनकी गाड़ी रोककर तोड़फोड़ की थी। हमले में स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव के रिश्तेदार का नाम सामने आया था। वहीं विधायक ने आरोप लगाया था कि पार्टी का एक गुट उनसे नाराज है, जिसकी वजह से यह हमला कराया गया। विधायक बृहस्पति सिंह ने कहा था कि बीते दिनों उन्होंने बघेल की प्रशंसा की थी और कहा था कि वह मुख्यमंत्री बने रहेंगे। यह बयान स्वास्थ्य मंत्री सिंहदेव को पसंद नहीं आया और बाद में उनके काफिले पर हमला किया गया। कांग्रेस विधायक ने यह भी आरोप लगाया था कि स्वास्थ्य मंत्री से उनकी जान को खतरा है। छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता टीएस सिंहदेव पर हत्या का आरोप लगाने वाले कांग्रेस विधायक बृहस्पति सिंह यहीं नहीं रुके। उन्होंने आरोप लगाया कि सिंहदेव सरजुगा में हिटलरशाही चलाते हैं। आरोपों को लेकर सिंहदेव ने कहा था कि कुछ लोग उनकी छवि खराब करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उनके क्षेत्र और राज्य के लोग उन्हें अच्छी तरह से जानते हैं।
वहीं छत्तीसगढ़ कांग्रेस में मचे घमासान के बीच राज्य के कांग्रेस प्रभारी पीएल पुनिया ने कहा कि यह बहुत छोटी बात है। विधायक बृहस्पति सिंह ने दावा किया कि टीएस सिंहदेव उन्हें मारना चाहते थे, लेकिन उन्होंने आईजी, गृहमंत्री या फिर मुख्यमंत्री के सामने इसकी शिकायत नहीं की। भावनाओं में बहकर उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री पर यह आरोप लगाया होगा। विधानसभा के पहले दिन छत्तीसगढ़ कांग्रेस के प्रभारी पीएल पुनिया दिन भर अपनी पार्टी के विधायकों एवं मंत्रियों को मनाने समझाने में लगे रहे, यहां तक कि दिल्ली रवाना होने के लिए निकले और एयरपोर्ट से वापस भी लौटे पर फिर भी मामला किसी नतीजे पर पहुंचता दिखाई नहीं दिया। वहीं विधानसभा के दूसरे दिन भी जब सदन की कार्यवाही शुरू हुई तो टी.एस. सिंहदेव सदन से बाहर आये। उन्हें मुख्यमंत्री ने अपने चेंबर में बुलाया। हालाकि अंदर किस बात पर चर्चा हुई इस पर मीडिया से उन्होंने कुछ नहीं बताया। गौरतलब है कि उसी दिन राजधानी रायपुर में कांग्रेस की प्रदेश कार्यकारिणी की बड़ी बैठक शुरू हुई। दिन में हुई बैठक के बाद देर शाम कांग्रेस विधायक बृहस्पति सिंह के बड़े हमले से प्रदेश की सियासत में भूचाल आ गया। अमित जोगी ने इस मसले पर कहा कि इतिहास दोहरा रहा है। अगर हम अपनी ग़लतियों से नहीं सीखेंगे तो जिस प्रकार से मेरे स्वर्गीय पिताजी अजीत जोगी और मुझे झीरम कांड में घसीटने का षड्यंत्र हुआ था, उसी तरह टीएस सिंहदेव को भी झूठ के जंजाल में फ़ंसाने की कोशिश हो रही है। घटिया राजनीति करने वालों को बेनक़ाब करना होगा। बृहस्पति सिंह का खुद का कोई राजनीतिक अस्तित्व नहीं है। 2013 में मेरे पिता जी की कृपा से वे तत्कालीन गृहमंत्री रामविचार नेताम के ख़िलाफ़ चुनाव लड़े और जीते।
आपको बता दें कि बृहस्पति सिंह पहले से ही काफी विवाद करते रहे हैं। बोलते हैं कि वे छत्तीसगढ़ के नहीं बिहार के निवासी हैं। बृहस्पति सिंह को पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने खड़ा किया था। बृहस्पति सिंह इसके पहले भी बलरामपुर के कलेक्टर एस. एल. पाल मेनन पर भी अपनी हत्या कराने का आरोप लगा चुके हैं। बृहस्पति सिंह मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के चहेते विधायक हैं। प्रदेश में चर्चा है कि बृहस्पति सिंह का उपयोग किया जा रहा है। कहीं ना कहीं यह मसला ढाई-ढाई साल के मुख्यमंत्री से जुड़ा है। पूरा प्रदेश ही नहीं कांग्रेस हाईकमान भी जानता है कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव के संबंध अच्छे नहीं हैं। स्वास्‍थ्‍य विभाग की कई बैठकों में विभागीय मंत्री को नहीं बुलाया जाता है। यह भी सत्‍य है कि पूरे विवाद की जड़ प्रदेश कांग्रेस प्रभारी पीएल पुनिया हैं, जो कई वर्षों से प्रदेश में जमे हुए हैं। वह मुख्यमंत्री बघेल का समर्थन करते हैं। यह किसी से छुपा नहीं है।
आखिर विधायक बृहस्पति सिंह किसकी शह पर टीएस सिंहदेव पर इतने गंभीर आरोप लगा रहे हैं। मुख्यमंत्री सहित पूरा मंत्री मंडल मौन है। छत्तीसगढ़ की जनता जवाब मांग रही है। यदि उनके आरोप में सच्‍चाई थी तो बृहस्पति सिंह को यह बात अपने पार्टी फोरम, प्रदेश अध्यक्ष, विधानसभा अध्यक्ष, मुख्यमंत्री के सामने रखना था लेकिन उन्‍होंने सबसे पहले प्रेस कांफ्रेंस करके सारी झूठी बातें मीडिया से सामने रखी। इससे जाहिर होता है कि उनके मन में कुछ तो चल रहा था। अपनी ही सरकार के मंत्री पर हत्या कराने जैसा आरोप लगाकर उन्‍होंने अनुशासनहीनता की पराकाष्‍ठा पार की है। छत्तीसगढ़ के लोकप्रिय नेता टीएस सिंहदेव प्रदेश में कांग्रेस सरकार बनते ही सुर्खियों में आ गए थे। लोगों को उम्मीद थी कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ही बनेंगे। किंतु कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व ने भूपेश बघेल पर विश्वास जताते हुए उन्हें मुख्यमंत्री बना दिया। उसके बाद ढाई-ढाई साल के फार्मूले पर भी खूब चर्चा हुई। किंतु ढाई साल बाद टीएस सिंहदेव को मुख्यमंत्री बनाए जाने के बजाय उनको ठिकाने लगाने के लिए कांग्रेसियों ने ही उनके लिए गड्ढा खोदना शुरू कर दिया है।
जिस तरह कांग्रेस के विधायक बृहस्पति सिंह टीएस सिंहदेव पर उनके द्वारा उनकी हत्या करवाने का आरोप लगा रहे हैं, उससे यह साबित होता है कि बृहस्पति सिंह से षड्यंत्र के तहत एक बड़ी साजिश को अंजाम दिलाने की कोशिश की जा रही है। इस पूरे मामले में सोचने वाली बात यह है कि अभी तक कांग्रेस का संगठन एवं उच्च नेतृत्व पूरी तरह मौन साधे हुए है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी इस पूरे मामले में चुप्पी साधकर बैठे हैं। टी.एस. सिंहदेव एक सिद्धांतवादी, मिलनसार, निर्विवाद नेता के रुप में जाने जाते हैं लेकिन कांग्रेस सरकार में इनकी जिस तरह से उपेक्षा की जा रही है उससे सिंहदेव इस्तीफा देने की मूड पर रहे हैं परंतु इस्तीफा न देकर सोनिया गांधी, राहुल गांधी का सम्मान किए जाने की बात इनके समर्थक करते हैं लेकिन जिस तरह से कांग्रेस के विधायक ने जानलेवा हमला करने की बात कही है उससे टी.एस. सिंहदेव की छवि धूमिल करने का प्रयास किए जाने की बात कहीं जा रही है और यह चर्चा होने लगी है कि कभी भी सिंहदेव मंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने टीएस बाबा को किस तरह से किनारे किया है, यह बात किसी से छिपी नहीं है। निगम मंडलों, आयोगों में इनके समर्थकों को जगह नहीं देने, स्वास्थ्य विभाग में भाजपा सरकार के वक्त हुए नान घोटाले के चर्चित आरोपी डॉ. आलोक शुक्ला को सेवावृद्ध‍ि देकर इनके बिना सहमति के प्रमुख सचिव बनाए जाने सहित अन्य तरह से टीएस बाबा पूरी तरह से मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से खफा हैं और विधायक बृहस्पति सिंह द्वारा इस तरह से आरोप लगाए जाने से टी.एस. सिंहदेव पूरी तरह से आहत हो चुके हैं और दिल्ली जाकर बहुत जल्द राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी, राहुल गांधी के सामने रख सकते हैं।
कांग्रेस पार्टी हाईकमान को छत्‍तीसगढ़ में मचे घमासान पर एक्‍शन लेना चाहिए। क्‍योंकि वर्तमान में जो कुछ भी हो रहा है उससे कांग्रेस को काफी नुकसान हो सकता है। खासकर ढाई-ढाई साल के फार्मूले पर हाईकमान को जरूर विचार करना चाहिए। क्‍योंकि राज्‍य में कलह की प्रमुख वजह यही फार्मूला पर कार्य नहीं होना है। इससे पार्टी के अंदर गुटबाजी हावी होती जा रही है। यदि राज्‍य में ऐसा ही चलता रहा तो आने वाले 2023 के चुनाव में कांग्रेस को काफी परेशानी हो सकती है। ढाई-ढाई साल के फार्मूले पर मुकरने से वैसे भी कांग्रेस की छबि काफी धूमिल हुई है। मौजूदा मुख्‍यमंत्री से प्रदेश की जनता काफी त्राहिमाम है। सभी क्षेत्रों में तानाशाही चल रही है। भ्रष्‍टाचार चरम पर है। लोकतांत्रिक मूल्‍यों का खुलेआम उल्‍लंघन हो रहा है। मीडिया पर पाबंदी, अफसरों पर नकेल कसना जैसे काम धड़ल्‍ले से हो रहे हैं। ऐसे हालातों में हाईकमान को मुख्‍यमंत्री को बदलना पार्टी के हित में लिया गया फैसला सा‍बित होगा।

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