चावल को पोषणयुक्त बनाने की व्यवस्था को लागू करने में वांछित गुणवत्ता मानक बनाए रखने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी

भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण इस कार्यक्रम में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है

खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग कुपोषण, रक्ताल्पता और सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी को दूर करने के लिए चावल को पोषणयुक्त बनाने की व्यवस्था लागू करने के लिए अथक मेहनत कर रहा है।

विभाग का भंडारण एवं अनुसंधान खंड भी तैयार उत्पाद की खरीद से लेकर उनके वितरण तक गुणवत्तापूर्ण मानक कायम रखने की निगरानी कर रहा है। इसके लिए वह  विभिन्न सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों के जरिए और इसके साथ ही एफआरके (पोषणयुक्त चावल कार्नेल) के निर्माताओं/ मिलों आदि से स्वघोषित गुणवत्ता प्रमाण पत्र लेकर यह कार्य कर रहा है।

इस कार्यक्रम को सुगमता से लागू करने के लिए और घरेलू आपूर्ति श्रृंखला के तहत वांछित गुणवत्ता मानकों को बनाए रखने के लिए विभाग द्वारा मार्च 2022 में एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) भी तैयार करके जारी कर दी गई है।

पोषणयुक्त चावल कार्नेल (एफआरके) और पोषणयुक्त चावल के वांछित गुणवत्ता मानकों को बनाए रखने के लिए इस मानक संचालन प्रक्रिया में इस महत्वकांक्षी योजना जिसमें, एफआर के निर्माण से लेकर उसके योग्य लाभार्थियों तक वितरण की व्यवस्था है, के सभी हितधारकों की हर स्तर पर भूमिका और जिम्मेदारियों का स्पष्ट रूप से विवरण दिया गया है।

और जहां विभाग ने विभिन्न हितधारकों की भूमिका और जिम्मेदारियों का विवरण दिया है वहीं भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) भी इस पूरे कार्यक्रम में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

शुरुआत में एफएसएसएआई ने खाद्य सुरक्षा मानक (खाद्य पदार्थों को पोषक बनाना) विनियमन 2018 और खाद्य सुरक्षा एवं मानक (खाद्य उत्पाद मानक एवं खाद्य योजक) विनियमन 2011 आदि के तहत चावल समेत विभिन्न पोषणयुक्त खाद्य पदार्थों के मानक तय किए थे।

एफएसएसएआई ने एफआर के निर्माताओं का एक पैनल बनाया और उन्हें लाइसेंस दिया, तैयार उत्पाद की पैकेंजिंग और स्टेंसिलिंग के लिए विभिन्न गुणवत्ता प्रमाणन मानक एवं दिशा-निर्देश तैयार किए, सैम्पल एकत्र करने के दिशा-निर्देश तय किए और विभिन्न परिचालन उपलब्धियों के वास्ते चावल को पोषणयुक्त बनाने के लिए तकनीकी सहायता मुहैया कराई। एफएसएसएआई राज्य के तहत आने वाले नेशनल एक्रीडिटेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिबरेशन (एनएबीएल) द्वारा मान्यता प्राप्त ऐसी प्रयोगशालाओं की मैपिंग भी कर रहा है जो एफआरके/एफआर के विभिन्न गुणवत्ता मापदंडों की जांच करेंगी।

एफएसएसएआई के खाद्य सुरक्षा अधिकारी प्रोत्साहन देने और नियमन करने की भूमिका भी निभाते हैं। ये अधिकारी मिलों और उचित दर की दुकानों से अचानक सैम्पल उठाते हैं ताकि पोषणयुक्त चावल की गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सके। (यह कार्य वह अपनी निगरानी में आने वाली सभी दुकानों और मिलों में हर पंद्रह दिन में करते हैं।) एफएसएसएआई की ही एक इकाई फूड फोर्टिफिकेशन रिसोर्स सेंटर (एफएफआरसी) खाद्य पदार्थों को पोषणयुक्त बनाने के लिए रिसोर्स हब के रूप में काम करता है और यह फूड बिजनेस ऑपरेटर्स (एफबीओ), मिल मालिकों, राज्यों, एफसीआई आदि को प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण करने के लिए किसी भी प्रकार की सहायता उपलब्ध कराता है और विकास भागीदारों की सहायता से चलाए जाने वाले कार्यक्रमों की निगरानी और मूल्यांकन का कार्य भी करता है।

एफएसएसएआई मानकों और खाद्य सुरक्षा प्रौद्योगिकी और प्रक्रियाओं, प्रीमिक्स और उपकरण खरीद तथा पोषणयुक्त चावल के निर्माण, गुणवत्ता आश्वासन और गुणवत्ता नियंत्रण के लिए सूचना प्रदान करने वाले रिसोर्स हब के तौर पर काम करता है।

चावल को पोषणयुक्त बनाना एक प्रक्रिया है, जिसमें चावल में लौह तत्व, फॉलिक एसिड और विटामिन बी12 जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों को चावल में मिलाया जाता है और यह रक्ताल्पता जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए एक बहुत प्रभावी, निवारक और कम लागत वाली रणनीति है। वैश्विक और भारतीय संदर्भों में इस प्रकार के विभिन्न अध्ययन किए गए हैं जिनसे साबित होता है कि रक्ताल्पता की समस्या से निपटने के लिए पोषणयुक्त चावल एक बेहद प्रभावी हथियार है।

कुपोषण के कारण होने वाली रक्ताल्पता की गंभीर समस्या से निपटने के महत्वाकांक्षी प्रयास के तहत माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने देश के 75वें स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त 2021) पर 2024 तक सभी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के तहत चावल को पोषणयुक्त बनाने के पक्ष में राय दी थी। इस बात को रेखांकित किया जाना चाहिए कि आहार विविधिकरण और फलों तथा सब्जियों पर अधिक निर्भरता सूक्ष्म पोषक तत्वों का एक अन्य स्रोत है लेकिन आबादी के एक बड़े तबके के लिए यह कर पाना हमेशा संभव नहीं है। केन्द्र, देश के विभिन्न भागों में पोषणयुक्त चावल को भोजन में शामिल करने के लाभों के विषय में बहुत से जागरुकता कार्यक्रम चलाने की दिशा में प्रयासरत है। राज्य सरकारों को भी अपने राज्य के लोगों में इस संबंध में फैले मिथकों और भ्रांतियों को दूर करने और लोगों को संवेदनशील बनाने की सलाह दी गई है। पीडीएस के जरिए पोषणयुक्त चावल का वितरण करने के लिए केन्द्र प्रायोजित पायलट योजना की शुरुआत के बाद से देश के बहुत सारे राज्य पीडीएस के जरिए इस पोषणयुक्त चावल का वितरण प्रभावी तौर पर कर रहे हैं और इसमें उन्हें कोई बड़ी चुनौती भी पेश नहीं आई है। हालांकि जागरुकता के अभाव में अभी तक पोषणयुक्त चावल और इसके लाभों को समुचित तौर पर समझा नहीं गया है।

पैकेजिंग सामग्री के संबंध में भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के नियमन के संदर्भ में भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई)/राज्य एजेंसियों जैसी खरीद एजेंसियां एफएसएसएआई के दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन कर रही हैं और बोरियों पर +F का लोगो तथा थैलिसिमिया से ग्रस्त लोगों को चिकित्सा परामर्श के अनुसार ही पोषणयुक्त चावल खाना चाहिए का संदेश छापा जा रहा है।

पोषणयुक्त बनाने की प्रक्रिया के तहत खाद्य पदार्थ में अनिवार्य सूक्ष्म पोषक तत्वों जैसे विटामिन्स और खनिज की मात्रा को बढ़ाया जाता है ताकि इसकी पोषण गुणवत्ता में सुधार किया जा सके और स्वास्थ्य को कम से कम नुकसान पहुंचाकर जन स्वास्थ्य लाभ प्रदान किया जा सके। 2008 के कोपेनहेगन कन्सेन्सस स्टेटमेंट के तहत पोषणयुक्त खाद्य पदार्थों को विकासशील देशों के लिए शीर्ष तीन प्राथमिकताओं में से एक बताया गया था। पोषणयुक्त खाद्य पदार्थ दरअसल भारत के लिए नए नहीं हैं। भारत में आयोडीनयुक्त नमक, जो कि पोषणयुक्त खाद्य पदार्थ का ही एक प्रकार है, की खपत बढ़ने से आयोडीन की कमी से होने वाली गौयटर जैसी बीमारियों में काफी कमी आई है। रक्ताल्पता की समस्या से बहुत कम समय में निपटने के लिए पोषणयुक्त चावल एक बहुत ही निवारक एवं पूरक साधन है।

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