लव जिहाद दुर्भाग्यपूर्ण माता-पिता की इच्छा से ही करें शादी पं. घनश्याम शास्त्री जी

अनिरुद्ध त्रिपाठी

फालका बाजार स्थित राम मंदिर मंदिर परिसर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन सुप्रसिद्ध भागवताचार्य पं.श्री घनश्याम शास्त्री जी महाराज ने कहा की दुनिया में कर्म की ही महत्ता है। हम जो करेंगे उसका फल वैसा ही मिलेगा। निंदा करने वालों को हमेशा अपने पास रखना चाहिए। आलोचना होने पर ही हम आगे बढ़ते हैं। तन के साथ मन भी निर्मल रहना चाहिए। कर्दम देवहुति संवाद सुनाते हुए कर्दम ऋषि की उत्पत्ति सृष्टि की रचना के समय ब्रह्मा जी की छाया से हुई थी। ब्रह्मा जी ने उन्हें प्रजा में वृद्धि करने की आज्ञा दी। उनके आदेश का पालन करने के लिये कर्दम ऋषि ने स्वयंभुव मनु के द्वितीय कन्या देवहूति से विवाह कर नौ कन्याओं तथा एक पुत्र की उत्पत्ति की। शास्त्री जी ने कहा कि दहेज लेना और देना अपराध है। लव जिहाद के चक्कर में कोई लड़की न पड़े। माता-पिता के अनुसार ही विवाह बंधन में बंधें। यह पवित्र रिश्ता है। कोई भी माता-पिता अपने बच्चों को दुख में नहीं डालना चाहेगा आज हमारे देश में लव जिहाद बढ़ता जा रहा है लव जिहाद क्या है यह समझना चाहिए
अगर किसी लड़की को अपने प्रेमी का धर्म पहले से पता है और वह उससे अपनी मर्जी से शादी करती है तो वह ठीक है, लेकिन अगर कोई लड़का अपना धर्म या पहचान छुपाकर लड़की से दोस्तीं करता है और फिर उससे शादी करके उसका धर्म परिवर्तन करता है तो यह लव जिहाद है. और यह हमारे देश के लिए और धर्म के लिए बड़ा ही निंदनीय है इसलिए जहां माता-पिता अपनी लड़की का विवाह करना चाहते हैं लड़की को भी ईश्वर की इच्छा मान करके शादी कर लेनी चाहिए इस अवसर पर कथा परीक्षित श्याम लाल श्रीमती भगवती अग्रवाल ने भागवत भगवान जी की आरती उतारी

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