नकली खून बनाने का गिरोह एसटीएफ ने पकड़ा, डाक्टर, हास्पिटल और लैब शामिल, मेडिकल कालेज के असिस्टेंट प्रफेसर सहित दो गिरफ्तार कई राज्यों में करते थे सप्लाई।*
September 17, 2021 लाल खून के काले कारोबार में लगे ये सफेदपोश……

नकली खून बनाने का गिरोह एसटीएफ ने पकड़ा, डाक्टर, हास्पिटल और लैब शामिल, मेडिकल कालेज के असिस्टेंट प्रफेसर सहित दो गिरफ्तार कई राज्यों में करते थे सप्लाई।
September 17, 2021 लाल खून के काले कारोबार में लगे ये सफेदपोश……

मिलावटी खून या खून में मिलावट, विश्वासघात करने वाले, धोखेबाज और छल प्रपंच करने वाले षड्यंत्रकारियो सहित कपटियो के बारे कहा जाता है कि इनके खून में मिलावट है या इनका खून मिलावटी है, परन्तु इन सफेदपोश लालचियो ने पैसे की भूख में जीवनदायी खून में भी मिलावट करनी शुरू कर दी है और ये वो लोग है जिन्हे आम अवाम ने धरती का भगवान या दूसरे जीवनदाता का दर्जा दे रखा है अब इनके खून को क्या कहा जाए।

एसटीएफ ने गुरूवार को देश के कई राज्यों में नकली खून की सप्लाई करने वाले एक गिरोह का खुलासा किया, यह गिरोह पंजाब, राजस्थान, हरियाणा समेत कई राज्यों में मिलावटी खून सप्लाई करने का काम करता था। एसटीएफ ने मेडिकल कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर डाक्टर अभय प्रताप सिंह व उसके साथी अभिषेक पाठक को 100 यूनिट खून के पैकेट सहित गिरफ्तार किया है, एसटीएफ की टीम इनसे पूछताछ कर रही है, कई ब्लडबैंक, पैथोलॉजी तथा हास्पिटल सहित डाक्टरों और इनके साथियों के नाम सामने आए हैं।

ज्ञात हो कि दो वर्ष पूर्व यूपी एसटीएफ ने 26 अक्टूबर 2018 को मानव रक्त में मिलावट के बाद दोगुना कर बेचने वाले गिरोह का पर्दाफाश कर पांच लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था, लखनऊ में मानव रक्त तस्करी के गिरोह के फिर सक्रिय होने की सूचना पर यूपी एसटीएफ ने एक टीम गठित कर तप्तीश बढ़ाई और मुखबिर की सूचना पर लखनऊ आगरा टोल प्लाजा के पास एक कार काे रोका, कार की तलाशी में गत्ते में रखे 45 यूनिट खून के पैकेट बरामद किए, कार में डाक्टर अभय सिंह सवार था जिसने वर्ष 2000 में किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस किया था। डाक्टर अभय ने एसटीएफ को बताया कि वह राजस्थान, हरियाणा, पंजाब व अन्य प्रांतों से ब्ल्ड डोनर द्वारा डोनेट खून को लखनऊ ला रहा है, हालांकि इसके सत्यापन में वह कोई भी दस्तावेज नहीं दिखा सका और कुछ समय देने पर सभी दस्तावेज दिखाने की बात कही तो पुलिस टीम उसके साथ अवध विहार योजना स्थित गंगोत्री अपार्टमेंट गई जहां डाक्टर अभय ने बताया कि वह बी-3 मकान नंबर 105 में रहता है वहां डा. अभय ने एसटीएफ को कई तरह के दस्तावेज दिखाए जो औषधि निरीक्षकों की छानबीन में फर्जी पाए गए। एसटीएफ को डाक्टर अभय के घर की तलाशी में फ्रिज में रखे 55 यूनिट ब्लड के साथ पीछे के कमरे में अभिषेक पाठक नाम का युवक मिला।*

एसटीएफ जांच मे खुलासा हुआ कि डॉ. अभय प्रताप सिंह सरदार पटेल डेंटल कॉलेज रायबरेली रोड का रहने वाला है। वह वर्तमान में बतौर असिस्टेंट प्रोफेसर यूपी यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल कॉलेज सैफई इटावा में तैनात है। वहीं अभिषेक पाठक सिद्घार्थनगर के जमुनी का रहने वाला है।एसटीएफ को उन्होंने बताया कि मिलावट कर बनाये व तस्करी कर लाए गये खून को लखनऊ के कई नामी अस्पतालों में सप्लाई करते थे, इमसें अवध हॉस्पिटल आलमबाग, वर्मा हॉस्पिटल काकोरी, काकोरी हॉस्पिटल, लखनऊ निदान ब्लड बैंक, बंथरा व मोहनलालगंज स्थित अस्पताल, सुषमा हॉस्पिटल के अलावा कई अन्य अस्पताल शामिल हैं। इस गिरोह के अन्य सदस्यों में कमल सत्तू, दाताराम, हरियाणा का लितुदा, केडी कमाल, डॉ. अजहर राव, दिल्ली के नीलेश सिंह, हरियाणा व दिल्ली में मदद करते हैं। लखनऊ में इनके एजेंट के रूप में बृजेश निगम, सौरभ वर्मा, दीपू चौधरी, जावेद खान, धीरज तवंर शामिल हैं।


एसटीएफ के अनुसार आरोपियों ने कुबूल किया है कि एक यूनिट मिलावटी खून 1200 रुपये में खरीदकर 4 से 6 हजार रुपये में सप्लाई करते हैं जरूरत के मुताबिक स्लाइन वाटर मिलाकर खून को एक से दो यूनिट तक आवश्यकता अनुसार बनाते, वहीं तस्करी के खून की वैधता बताने के लिए फर्जी तरीके से लगाए गये रक्तदान शिविर के आयोजन व उसकी फोटोग्राफी का प्रयोग करते हैं। आरोपियों के खिलाफ सुशांत गोल्फ सिटी थाने में जालसाजी, कूटरचित दस्तावेज तैयार करने, लोगों के जिंदगी से खिलवाड़ करने की धारा में मुकदमा दर्ज कराया गया है।
अक्टूबर 2018 में मिलावटी खून बनाने के आरोप में गिरफ्तार आरोपी
एसटीएफ की जांच जारी है कई और हैरतअंगेज खुलासे होने की उम्मीद है।

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प्रधान संपादक ~अनिल मालवीय
संवाददाता ~ दीपक सराठे
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