बागी डामोर बने भाजपा प्रत्याशी के लिए खतरा

बागी डामोर बने भाजपा प्रत्याशी के लिए खतरा

भोपाल। नामांकन वापसी की समयसीमा खत्म होने के बाद अब झाबुआ उपचुनाव की स्थिति एकदम साफ हो गई है। चुनावी दंगल में पांच उम्मीदवार अपना भाग्य आजमाएंगे। मुख्य मुकाबला भाजपा से भानू भूरिया और कांग्रेस के कांतिलाल भूरिया और भाजपा प्रत्याशी भानू भूरिया में होगा। लेकिन इस बार भाजपा से बगावत करके पर्चा दाखिल करने वाले कल्याण सिंह डामोर भी मैदान में हैं। इससे भाजपा प्रत्याशी भानू भूरिया के लिए जीत की राह में रोड़े आने की आशंका इंकार नहीं किया जा सकता है। नामांकन वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद राष्ट्रीय दलों में कांग्रेस और भाजपा के उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। वहीं, निर्दलीय के तौर पर कल्याण सिंह डामोर, निलेश डामोर और रामेश्वर सिंगार भाग्य आजमा रहे हैं। सिंगार को सेब, कल्याण सिंह को ऑटो रिक्शा और निलेश को टेलीफोन चुनाव चिन्ह आवंटित किया गया है।
भाजपा के बागी डामोर निर्दलीय मैदान में


झाबुआ विधानसभा उपचुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी से टिकट नहीं मिलने पर पार्टी से इस्तीफा दे चुके आदिवासी नेता कल्याण सिंह डामोर ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में अपना नामांकन दाखिल किया था। डामोर टिकट दावेदारों में शामिल थे, लेकिन पार्टी ने युवा मोर्चा के जिला अध्यक्ष भानू भूरिया को टिकट दे दिया। जिसके चलते कल्याण सिंह डामोर पार्टी से नाराज हो गए और उन्होंने तत्काल भाजपा से अपना इस्तीफा दे दिया।
पार्टी को भरोसा डामोर को मना लेंगे
भाजपा संगठन के नेताओं का कहना था कि उन्हें मना लिया जाएगा। लेकिन अंतिम समय तक उन्हें बैठाने की कोशिश चलती रही लेकिन वे नहीं माने। डामोर के मैदान में होने से भाजपा को वोट कटने का नुकसान उठाना पड़ सकता है। झाबुआ उपचुनाव की जंग रोचक होगी, क्योंकि दोनों ही पार्टियों के लिए यह प्रतिष्ठा का चुनाव हो गया है। कांग्रेस और भाजपा के उम्मीदवारों के राजनीतिक भविष्य भी इस चुनाव पर टिका हुआ है। इसकेे साथ निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर दावा ठोकने वाले कल्याण सिंह के मैदान में आने से मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है।
आदिवासी नेताओं पर दोनों पार्टियों को भरोसा
इस बार प्रचार के लिए और अपने-अपने दल के प्रत्याशियों के पक्ष में मतदान कराने के लिए इस बार भाजपा व कांग्रेस अपने आदिवासी नेताओं पर अधिक भरोसा कर रही है। यही वजह है कि अभी से संगठन द्वारा प्रचार के लिए उन्हें भेजने की तैयारी कर ली गई है। इस दौरान प्रचार की पूरी कमान भाजपा की ओर से शिवराज सिंह चौहान और कांग्रेस की ओर से स्वयं मुख्यमंत्री कमलनाथ के हाथों में रहने वाली है।

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