आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय के सचिव ने स्वच्छ भारत मिशन शहरी 2.0 के तहत स्वच्छ सर्वेक्षण 2023 का शुभारंभ किया, जिसमें कचरा-मुक्त शहरों के लिए ‘वेस्ट टू वेल्थ’ की थीम है

स्वच्छता सर्वेक्षण प्रेरक के रूप में विकसित हुआ है: श्री मनोज जोशी
पहले के सर्वेक्षणों के 3 चरणों की तुलना में अब 4 चरणों में मूल्यांकन किया जाएगा
सर्वेक्षण के चरण 4 के अलावा, नागरिक सत्यापन और प्रक्रिया संबंधी सुविधाओं का क्षेत्र मूल्यांकन चरण 3 में भी लागू किया गया

आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय के सचिव श्री मनोज जोशी ने आज यहां एक वर्चुअल कार्यक्रम में स्वच्छ भारत मिशन शहरी 2.0 के तहत स्वच्छ सर्वेक्षण (एसएस) – एसएस 2023 के आठवें आयोजन का शुभारंभ किया। इस कार्यक्रम में राज्यों के शहरी विकास विभाग के प्रधान सचिवों, स्वच्छ भारत मिशन शहरी के राज्य मिशन निदेशकों, नगर आयुक्तों और शहरों के कार्यकारी अधिकारियों ने भाग लिया। अपने प्रेरक दर्शन के रूप में ‘वेस्ट टू वेल्थ’ की थीम के साथ डिजाइन किया गया, एसएस 2023 अपशिष्ट प्रबंधन में चहुमुखी दिशा में उपलब्धियां प्राप्त करने के लिए तैयार किया गया है। सर्वेक्षण में तीन आर – रिड्यूस रिसाइकल एंड रीयूज के सिद्धांत को प्राथमिकता दी जाएगी, यानी कचरा कम करें, रीसायकल करें और पुन: उपयोग करें।

लॉन्च इवेंट में श्री मनोज जोशी ने कहा कि स्वच्छता सर्वेक्षण सिर्फ एक मूल्यांकन उपकरण के बजाय एक प्रेरक औजार के रूप में विकसित हुआ है। कहीं भी किए गए इस सबसे बड़े सर्वेक्षण ने जमीनी स्तर पर महत्वपूर्ण बदलाव लाए हैं, जिसमें शहरों ने अच्छा निष्पादन किया है। उन्होंने कहा कि स्वच्छता सर्वेक्षण न केवल शीर्ष निष्पादन करने वालों के लिए है, बल्कि कम उपलब्धि हासिल करने वालों के लिए भी महत्वपूर्ण है, जिन्हें इस अवसर पर आगे बढ़ने के लिए कदम उठाने चाहिए और आवश्यकतानुसार काम करना चाहिए। श्री जोशी ने कहा कि स्वच्छता सर्वेक्षण के मापदंडों को इस तरह से डिजाइन किया गया है, खासकर हाल के दौर में, ताकि सभी को एक नई दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया जा सके, जिससे पूरे वर्ष स्वच्छता बनी रहे। नागरिकों के प्रत्युत्तर पर जोर देते हुए, श्री जोशी ने कहा कि स्वतंत्र और स्पष्ट प्रत्युत्तर अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि देश में कहीं भी रहने वाले नागरिक स्वच्छ वातावरण की आकांक्षा रखते हैं और इसके हकदार हैं।

इन वर्षों में, स्वच्छ सर्वेक्षण दुनिया में सबसे बड़े शहरी स्वच्छता सर्वेक्षण के रूप में उभरा है। स्वच्छ सर्वेक्षण का सातवां आयोजन – ‘आजादी @ 75 स्वच्छ सर्वेक्षण 2022’ एक ऐतिहासिक सर्वेक्षण था, क्योंकि यह आजादी का अमृत महोत्सव के साथ था। एसएस 2022 सर्वेक्षण में 4,355 शहरों, 85,860 वार्डों, 2.12 लाख स्थानों का दौरा किया गया, 5.5 लाख दस्तावेजों का मूल्यांकन किया गया, 1.14 करोड़ नागरिकों से उनके विचार प्राप्त किए गए, 4.77 लाख नागरिक सत्यापन किए गए, 23.38 लाख फोटो और वीडियो साक्ष्य के रूप में एकत्र किए गए और 17.24 लाख डेटा पॉइंट एकत्र किए गए। एसएस 2022 सर्वेक्षण पूरा हो चुका है और परिणाम तैयार किए जा रहे हैं।

यह देखा गया कि जब भी एसएस सर्वेक्षण शुरू होता है, तो शहरों द्वारा की जाने वाली गतिविधियों का स्तर बढ़ जाता है और सर्वेक्षण किए जाने के महीनों के दौरान शहर साफ-सुथरे दिखाई देते हैं। इसलिए, एसएस 2023 में, पहले के आयोजनों के दौरान 3 चरणों के बजाय 4 चरणों में मूल्यांकन किया जाएगा और चरण 4 के अलावा चरण 3 में भी नागरिक सत्यापन और प्रसंस्करण सुविधाओं का क्षेत्र मूल्यांकन शुरू किया जा रहा है।

प्रधानमंत्री ने कचरा मुक्त शहरों की दृष्टि से 1 अक्टूबर, 2021 को स्वच्छ भारत मिशन शहरी 2.0 का शुभारंभ किया। एसएस 2023 की थीम ‘वेस्ट टू वेल्थ’ है और यह स्वच्छ भारत मिशन शहरी 2.0 अपशिष्ट प्रबंधन में सर्कुलरिटी को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता के अनुरूप है, जो मिशन के तहत प्रमुख उद्देश्यों में से एक है। एसएस 2023 में, कचरे के स्रोत पृथक्करण, अपशिष्ट उत्पादन से मेल खाने के लिए शहरों की अपशिष्ट प्रसंस्करण क्षमता में वृद्धि और डंपसाइट में जाने वाले कचरे को कम करने के लिए अतिरिक्त महत्व दिया गया है। प्लास्टिक को चरणबद्ध तरीके से कम करने, प्लास्टिक कचरे के प्रसंस्करण, कचरे को वंडर पार्कों के लिए प्रोत्साहित करने और जीरो वेस्ट आयोजनों पर जोर देने वह लेकर अतिरिक्त वेटेज के साथ संकेतक पेश किए गए हैं।

स्वच्छ सर्वेक्षण 2023 के माध्यम से शहरों के भीतर वार्डों की रैंकिंग को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। शहरों के मेयरों को रैंकिंग में भाग लेने और सबसे स्वच्छ वार्डों को सम्मानित करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। उपरोक्त के अलावा शहरों को ‘खुले में शौच’ (येलो स्पॉट) और ‘खुले में थूकने’ (रेड स्पॉट) के मुद्दों पर समर्पित संकेतकों पर भी मूल्यांकन किया जाएगा, जिनका शहरों को सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा, इस वर्ष आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय आवासीय और वाणिज्यिक क्षेत्रों की पिछली गलियों की सफाई को भी बढ़ावा दे रहा है।

आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा शहरी स्वच्छता की स्थिति में सुधार के लिए शहरों को प्रोत्साहित करने और बड़े पैमाने पर नागरिकों की भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए एक प्रतिस्पर्धी ढांचे के रूप में स्वच्छ सर्वेक्षण 2016 में शुरू किया गया था। स्वच्छ सर्वेक्षण शहरों में मिशन को गति देने में वर्षों से सहायक रहा है। इसने शहरों के बीच स्वच्छता मानकों पर अपने निष्पादन में सुधार करने के लिए एक स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को जन्म दिया है, जिससे नागरिकों के लिए स्वच्छता सेवाओं के वितरण में सुधार हुआ है। 2016 में केवल 73 शहरों में दस लाख से अधिक आबादी के साथ शुरू हुई स्वच्छ सर्वेक्षण की यात्रा, 2017 में 434 शहरों, 2018 में 4,203 शहरों, 2019 में 4,237 शहरों, एसएस 2020 में 4,242 शहरों, एसएस 2021 में 4,320 शहरों और एसएस 2022 में 62 छावनी बोर्ड सहित 4,355 शहरों के साथ कई गुना बढ़ गई है।

‘वेस्ट टू वेल्थ’ की थीम के साथ एसएस 2023 के लॉन्च के माध्यम से, स्वच्छ भारत मिशन शायरी 2.0 कचरे कंचन की प्राप्ति की अपार संभावना का लाभ उठाते हुए, अपशिष्ट प्रबंधन में एक सर्कुलर अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराता है।

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