कड़वा मगर सच है….सरकार भी वही…आयुष्मान कार्ड भी वही… फिर इलाज नि:शुल्क क्यों नहीं?

झाबुआ। (रिपोर्टर – कलसिंह भूरिया डीजी न्यूज़ झाबुआ) देश की जनता जानती है एक वर्ष पूर्व जब इस महामारी ने भारत में अपना पैर पसारना शुरू किया था तब सावधानी और गंभीरता दिखाने के बजाय हमारे देश के प्रधानमंत्री पड़ोसी देशों की यात्रा में लगे हुए थे और अपनी पीठ थपथपवा रहे थे, इस दौरान कोरोना महामारी दिल्ली के रास्ते होते हुए पूरे भारत में फैल गई, उसके बाद संक्रमितो की संख्या सामने आने पर सख्ती दिखाते हुए संपूर्ण भारत में लोकडाउन कर दिया। उसी तरह इस बार भी देश प्रदेश से लेकर ग्रामीण अंचल तक कोरोना महामारी की दूसरी स्टेज पूरी तरह इन लोगों को अपनी चपेट में ले लिया लेकिन रोकथाम के रास्ते विकल्प ढूंढने के बजाय केंद्र एवं राज्य सरकार के मंत्री नेता पश्चिम बंगाल के चुनाव फिर दमोह के उपचुनाव में रेलिया, सभाएं बिना मास्क के करते रहे जिसे सोशल डिस्टेंस का पालन भी नही किया ओर नही दूसरो से करवाया। अब जब कोरना ग्रामीण अंचल तक पहुंच चुका है लोग पूरी तरह संक्रमित होकर मर रहे है तो कुछ लोग अस्पतालों में जिंदगी और मौत के बीच खड़े हैं उन्हें समय पर आवश्यक एवं उचित उपचार उपलब्ध नहीं हो पा रहा अस्पतालों में ऑक्सीजन खत्म हो गई तो कहीं मरीजों के लिए बेड की व्यवस्था नहीं, इतने बुरे हालात होने के बाद अब सरकार के नेता मंत्री जनता की सुध लेने के लिए लोगों के बीच में औपचारिकता पूरी करने के लिए आने लगे। अब थोड़ी बहुत भी शर्म बची हो तो आयुष्मान कार्ड धारकों को कोरोना महामारी का उपचार शासन से मान्यता प्राप्त निजी अस्पतालों में करवाए जाने के लिए अस्पतालो को आदेशित किया जाना चाहिए।

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