कोरोना की रोकथाम में जिला प्रशासन निष्क्रिय, कोरंटाइन मरीजों को दवाइयों की सहायता नहीं

झाबुआ।( डी.जी.न्यूज़ रिपोर्टर कलसिह भरिया ) 11 अप्रैल 2021 को जिले मे नये संक्रमित मरीज़ 173 की रिपोर्ट पॉजिटिव आई, अब तक कुल संक्रमित मरीज़ 3733 हो गए। जिले में कुल एक्टिव केस 473 है, पेंडिंग रिपोर्ट : 956 (एमजीएम लेब इंदौर) से आना बाकी है। इस तरह जिला अस्पताल में भर्ती 29 मरीज है। ऐसे मरीज जिनका उपचार जिले के बाहर हो रहा 15 है। (नोट -: ये सिर्फ सरकारी आंकड़ा) और सैकड़ों कई कोरोना मरीज बिना जांच के अपने घरों में बीमार पड़े हैं जो डर के मारे मेडिकल स्टोर से गोलियां लाकर खा रहे तो कई लोग गले में टाइफाइड की माला पहन कर घर बैठे हैं, स्वास्थ विभाग का जमीनी स्तर तक तैनात अमला अपने अपने क्षेत्र में घर-घर जाकर सर्वे कर ऐसे मरीजों को चिन्हित करें तो सैकड़ों मरीज कोरोना पॉजिटिव पाए जाएंग, लेकिन सरकार ऐसा कोई कदम नहीं उठाना चाहती जिससे लोगों में दहशत का माहौल पैदा हो लेकिन यह सच है कि कोविड-19 की आड़ में बहुत बड़ी राजनीतिक चाल चली जा रही है और लोग बीमारी की दहशत में उलझ कर रह गए।

फेफड़ों को ज्यादा नुकसान-:

देश कोरोना की दूसरी लहर का सामना कर रहा है, विशेषज्ञों के मुताबिक दूसरी लहर में 2 से 3 दिन में फेफड़ों को अधिक नुकसान यानी 50 से 70% संक्रमित कर रहा है जिसकी वजह से मौत के आंकड़ों में बढ़ोतरी हो रही है जब तक मरीज को संक्रमित होने का पता चलता है तब तक कोरोना शरीर में फेफड़ों तक पहुंच कर काफी नुकसान पहुंचा देता है। एंटीजन टेस्ट, आरटीपीसीआर, सिटी स्कैन की रिपोर्ट आने तक मरीज की हालत काफी गिर जाती है और फिर उसे रिपोर्ट के बाद दवाई लेना शुरू करना पड़ रहा है तब तक काफी देर हो चुकी होती है।

लोगो मै अंधविश्वास हावी-:

ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्र के कई लोग कोरोना से संक्रमित हैं, वह शासकीय व निजी अस्पताल जाने से परहेज रख रहे और तबीयत खराब होने की वजह टाइफाइड बताकर आयुर्वेदिक मालाएं बांधने में लगे हैं और इस तरह अपने स्वयं के घर और आस-पड़ोस को संक्रमित कर कोरोना जैसी गंभीर महामारी को बढ़ा रहे। स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय प्रशासन इस दिशा में ध्यान देने के बजाय अनाउंसमेंट और चालानी कार्रवाई पर ही टिका हुआ है।

क्वारंटाइन मरीजों को एक दवाई भी नहीं-:

अक्सर देखा जा रहा है कि जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग अपने नियम कायदे लगाकर लोगों को समझाने की औपचारिकता कर रहे हैं लेकिन रिपोर्ट के बाद पॉजिटिव आए मरीजों को क्वॉरेंटाइन कर उनके घरों पर एक पोस्टर चस्पा किया जा रहा है जो लोगों को सचेत करता है कि यह कोरोना संक्रमित मरीज का है इसके आसपास ना जाए लेकिन यह सब दिखावा महज स्वास्थ विभाग अपनी सक्रियता दिखाने के लिए कर रहा है असल बात यह है की क्वॉरेंटाइन मरीज को स्वास्थ्य विभाग की ओर से एक गोली तक का सहयोग नहीं है मरीजों को किसी निजी हॉस्पिटल से महंगी दवाई खरीदकर खानी पड़ रही है ऐसे में आर्थिक स्थिति खराब होने वाला परिवार को कोरोना की मार के साथ साथ आर्थिक परेशानियों की भी मार झेलनी पड़ रही है।

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