दिल इनका फूल सा न होता कोई काटा से चुभा न होता इनकी भी मजबूरिया होंगी वरना इतनी ठंड में कोई सड़को पर नही होता

अपने हक़ की लड़ाई लड़ने के लिए किसान घर से बाहर किया निकले तमासा बिन को उनके आंसू उनका दर्द तमासा लगने लगे कोई उन्हें खालिस्तानी कोई उग्रवादी कोई राजनीति अपनी सोंच के हिसाब से टिपणी करने लगे मेरे सवाल है उन लोगो से
संसद में बिल बनाये किस के लिए जाते है जनता के हित के लिए इसी तरह किसान हित मे ये बिल बनाया गया achi बात है मगर ये बिल जिसके लिए बनाया गया किया उन किसानों को इस बिल में अपना हित दिखाई देरहा है
आज देश मे हर तरफ इस बिल का विरोध होरहा है तो ये बिल किसान हित बिल कहा रहा
इस बिल की वजह से इस नारे की परिभासा ही बदल दी जय जवान जय किसान
आज जय जवान किसान हट गया
खालिस्तानी आगया
आज किसान से जब देश का जवान मिलने आया तो उसकी आँखों मे भी आंसू गए हम पूरे देश की सुरक्षा में अपनी जान हथेली पर लेकर खड़े है आज हमारा परिवार 75 दिन से सर्दी में रोडो पर बैठा है जय जवान जय किसान कहने वाले इनको इनका हक़ तक नही दे पारहे है अपनी राजनीति की रोटी के लिए इनको सड़को पर रोटी खाने को मजबूर करदिया
ये इस देश की विडंबना है खुद की ज़मीन खुद की मेहनत खुद का अनाज फैसला अपनी मर्ज़ी से दूसरा करेगा फैसला लेना था तो किसान हित का लिया जाता पूंजीवादी हित का नही
सब का साथ सबका विकास की तर्ज पर चलने वाले सबका साथ तो chate है मगर विकास सिर्फ अपना
एक वर्ग को आंतकवादी नाम दूसरे को खालिस्तानी इस देश मे हिंदुस्तानी बचे कितने इनके हिसाब से

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