आज रायगढ़ (छत्तीसगढ़) में दिनांक 10-12-2021को होने वाले विश्व मानवाधिकार आयोग दिवस मनाया गया

डीजी न्यूज इंडिया
मंदसौर से ब्यूरो चीफ
मंगल देव राठोर की
खास
रिपोर्ट
मो. +918305357955

आज रायगढ़ (छत्तीसगढ़) में दिनांक 10-12-2021को होने वाले विश्व मानवाधिकार आयोग दिवस के अवसर पर माननीय जतिन्दर पाल सिंह प्रदेश अध्यक्ष छत्तीसगढ़ के द्वारा प्रदेश स्तर पर राष्ट्रीय मानवाधिकार के प्रचार-प्रसार एवं जागरूकता से संबंधित कार्यक्रम किया जा रहा है । जिसमे राष्ट्रीय अध्यक्ष माननीय डॉ रणधीर कुमार वर्मा व माननीय प्रदेश अध्यक्ष मध्यप्रदेश डॉ राहुल सिंह चौहान जी ने आगे अपनी बात को कहते हुए कहा कि….

आजादी के इतने वर्षो के बाद भी छत्तीसगढ़ के दत्तक पुत्र पंडो जनजाति के लोगों को सरकार की समस्त योजना के मुख्य धारा से जोड़ने की कोशिश की जानी चाहिए
अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार विशेष
हर साल 10 दिसंबर को अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस या विश्व में रहने वाले हर नागरिक के अधिकार दिवस को मनाया जाता है. दरअसल 1948 में आज ही के दिन संयुक्त राष्ट्र सामान्य महासभा द्वारा मानव अधिकारों को अपनाने की घोषणा की गई थी लेकिन आधिकारिक तौर पर 1950 में संयुक्त राष्ट्र संघ ने 10 दिसंबर के दिन मानवाधिकार दिवस मनाने की घोषणा की थी मानवाधिकार दिवस को मनाने का उद्देश्य है कि विश्व के सभी लोग सुरक्षित महसूस कर सकें और भेदभाव रहित स्वतंत्रतापूर्ण जीवन जी सके मानवाधिकार में स्वास्थ्य, आर्थिक सामाजिक व शिक्षा का अधिकार भी शामिल है
शुरुआत
10 दिसम्बर, 1948 को ‘संयुक्त राष्ट्र महासभा’ ने विश्व मानवाधिकार घोषणा पत्र जारी कर प्रथम बार मानवाधिकार व मानव की बुनियादी मुक्ति पर घोषणा की थी। वर्ष 1950 में ‘संयुक्त राष्ट्र’ ने हर वर्ष की 10 दिसम्बर की तिथि को ‘विश्व मानवाधिकार दिवस’ तय किया। 71 वर्ष से पहले हुआ पारित ‘विश्व मानवाधिकार घोषणा पत्र’ एक मील का पत्थर है, जिसने समृद्धि, प्रतिष्ठा व शांतिपूर्ण सह अस्तित्व के प्रति मानव की आकांक्षा प्रतिबिंबित की है। आज यही घोषणा पत्र ‘संयुक्त राष्ट्र संघ’ का एक बुनियादी भाग है। क्या है ‘मानव अधिकार’ किसी भी इंसान की ज़िंदगी, आज़ादी, बराबरी और सम्मान का अधिकार है- “मानवाधिकार”। ‘भारतीय संविधान’ इस अधिकार की न सिर्फ़ गारंटी देता है, बल्कि इसे तोड़ने वाले को अदालत सजा देती है। भारत में 28 सितंबर, 1993 से मानव अधिकार क़ानून अमल में आया। 12 अक्टूबर, 1993 में सरकार ने ‘राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग’ का गठन किया। आयोग के कार्यक्षेत्र में नागरिक और राजनीतिक के साथ आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक अधिकार भी आते हैं, जैसे- बाल मज़दूरी, एचआईवी/एड्स, स्वास्थ्य, भोजन, बाल विवाह, महिला अधिकार, हिरासत और मुठभेड़ में होने वाली मौत, अल्पसंख्यकों और अनुसूचित जाति और जनजाति के अधिकार आदि। ‘विश्व मानवाधिकार घोषणा पत्र’ का मुख्य विषय शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगारी, आवास, संस्कृति, खाद्यान्न व मनोरंजन से जुड़ी मानव की बुनयादी मांगों से संबंधित है। विश्व के बहुत से क्षेत्र ग़रीबी से पीड़ित है, जो बड़ी संख्या वाले लोगों के प्रति बुनियादी मानवाधिकार प्राप्त करने की सबसे बड़ी बाधा है। उन क्षेत्रों में बच्चे, वरिष्ठ नागरिकों व महिलाओं के बुनियादी हितों को सुनिश्चित नहीं किया जा सकता। इस के अलावा नस्लवाद व नस्लवाद भेद मानवाधिकार कार्य के विकास को बड़ी चुनौती दे रहा है।

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