मुख्यमंत्री श्री चौहान ने मौलश्री और गुलमोहर का पौधा लगाया

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने स्मार्ट उद्यान में मौलश्री और गुलमोहर का पौधा लगाया। मुख्यमंत्री श्री चौहान अपने संकल्प के क्रम में पौध-रोपण कर रहे हैं। पौध-रोपण को जन-अभियान बनाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री श्री चौहान सामाजिक संस्थाओं, स्वयंसेवी संस्थाओं और जन-सामान्य को पौध-रोपण के लिए प्रोत्साहित करने वाली संस्थाओं एवं व्यक्तियों के साथ पौध-रोपण करते हैं। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने आज टी.वी. न्यूज चैनल आई.बी.सी-24 के श्री वत्सल श्रीवास्तव, श्री सुधीर दण्डोतिया, श्री नवीन सिंह, श्री विवेक पटैया और श्री शिखिल ब्यौहार के साथ पौध-रोपण किया।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने पौध-रोपण के बाद न्यूज चैनल से चर्चा में कहा कि जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग के दुष्प्रभावों को कम करने के लिए पौध-रोपण आवश्यक है। इस दिशा में राज्य सरकार निरंतर प्रयासरत है। साथ ही ऊर्जा साक्षरता के विस्तार के लिए भी गतिविधियाँ संचालित की जा रही हैं। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि हमें जन-जन को यह बताना होगा कि बिजली बचाना बिजली बनाने के बराबर है। थर्मल पॉवर प्लांट से पर्यावरण बिगड़ता है। यदि हम बिजली बचाएंगे तो बिजली बनाने की आवश्यकता कम होगी। इस प्रकार बिजली बचाने के प्रयास से भी हम पर्यावरण संरक्षण के लिए योगदान दे सकते हैं। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि वे स्वयं भी मुख्यमंत्री निवास में बिजली बचाने के लिए निरंतर सक्रिय और सजग रहते हैं। सौर ऊर्जा से बिजली का उत्पादन करने से प्रदूषण नहीं फैलता है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि राज्य सरकार ऊर्जा साक्षरता और नवकरणीय ऊर्जा को प्रोत्साहित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि सौर ऊर्जा के लिए आगर-मालवा, नीमच और शाजापुर में प्लांट का शिलान्यास किया जा चुका है। ओंकारेश्वर में फ्लोटिंग पॉवर प्लांट का निर्माण जारी है। राज्य सरकार सौर ऊर्जा, विंड एनर्जी और बॉयोमास से बिजली उत्पादन को प्रोत्साहित कर रही है। थर्मल पॉवर प्लांट से विद्युत उत्पादन का प्रतिशत कम हो, यह हमारा प्रयास है। भारतीय संस्कृति में पेड़-पौधों को बहुत महत्व दिया गया है। हम भारतीय संस्कृति के भाव के अनुरूप प्रकृति का शोषण नहीं, दोहन के सिद्धांत पर विश्वास रखते हैं।

पौधों का महत्व

आज लगाए गए मौलश्री को संस्कृत में केसव, हिन्दी में मोलसरी या बकूल भी कहा जाता है। यह औषधीय महत्व का वृक्ष है, जिसका सदियों से आयुर्वेद में उपयोग होता आ रहा है। गुलमोहर विश्व के सुंदरतम वृक्षों में से एक माना जाता है। गुलमोहर की पत्तियों के बीच बड़े-बड़े गुच्छों में खिले फूल, इस वृक्ष को अलग ही आकर्षण प्रदान करते हैं। गर्मी के दिनों में गुलमोहर के पेड़, पत्तियों की जगह फूलों से लदे हुए रहते हैं। यह औषधीय गुणों से भी समृद्ध है।

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