प्रदेश के किसानों की बर्बाद होती फसल का जिम्मेदार कौन?

ऊर्जा मंत्री प्रद्युमन सिंह तोमर की लापरवाही के कारण 04 हजार करोड़ की मूंग पर लगा दांव
विजया पाठक। मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार भले ही खुद को किसान हितैषी सरकार बताने का गुणगान करती है, लेकिन अब इस सरकार की हकीकत सामने आना शुरू हो गई हैं। आलम यह है कि खुद को किसान पुत्र बताने वाले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कैबिनेट में बैठे मंत्रियों की लापरवाही का खामियाजा अब प्रदेश के लाखों किसानों को भुगतना पड़ रहा है। दरअसल अधिकतर किसानों ने अब खेती में दो की बजाय तीन फसलें लेना शुरू कर दिया है। किसानों ने यह फसलें प्रदेश सरकार के चौबीसों घंटे बिजली की व्यवस्था, सिंचाई के साधन के वायदे के चलते करना शुरू किया था। लेकिन अब जब किसानों के पसीने की कमाई खेतों में खड़ी हैं तो प्रदेश सरकार बिजली कटौती कर उन पर अत्याचार करने से पीछे नहीं हट रही है। प्रदेश में लगभग 04 हजार करोड़ की मूंग की फसल बर्बाद होने की कगार पर है।

इस तरह से लापरवाही हुई उजागर
प्रदेश के ऊर्जा विभाग द्वारा किसानों के साथ बरती जा रही लापरवाही का पर्दाफाश बीते दिनों तब हुआ जब होशंगाबाद इलाके में पहुंचे कृषि मंत्री कमल पटेल से स्थानीय किसानों ने बिजली कटौती की शिकायत की। इस पर कमल पटैल ने उर्जा मंत्री से बात की और कहा कि अगर किसान निपटा तो वह हमें निपटा देंगे। किसानों ने बताया कि प्रदेश में करोड़ों रुपये की मूंग खेतों में खड़ी लेकिन बिजली विभाग द्वारा जारी कटौती के कारण करोडों रुपये की मूंग की खेती पर बहुत जल्द बर्बाद हो जायेगी। किसानों की समस्या को सुन कमल पटेल ने ऊर्जा मंत्री प्रद्युमन सिंह तोमर को फोन कर इस पूरे मामले से अवगत कराते हुए कहा कि अगर किसानों की फसलें बर्बाद हुईं तो किसान हमें बर्बाद कर देंगे।
04 हजार करोड़ की मूंग हो जायेगी बर्बाद
अगर समय रहते शिवराज सरकार ने किसानों को बिजली उपलब्ध नहीं कराई तो वो दिन दूर नहीं जब 04 हजार करोड़ रुपये की मूंग बर्बाद हो जायेगी। अभी की स्थिति में बताया जा रहा है कि कभी एक तो कहीं सिर्फ दो घंटे ही बिजली उपबल्ध कराई जा रही है और बिजली का फेस कम कर देते है जिससे किसानों की पानी की मोटर खराब हो रही है। ऐसा पानी मूंग की फसल के लिए पर्याप्त नहीं है। नर्मदापुरम, हरदा, नरसिंहपुर और रायसेन में 70 प्रतिशत रकबा मूंग का है। वहीं, प्रदेश में लगभग 8.5 लाख हेक्टेयर में मूंग खड़ी है। इसमें 5.98 लाख हेक्टेयर फसल इन्हीं चार जिलों में है। बाकी 46 जिलों में मूंग का लगभग 500 हेक्टेयर से ज्यादा रकबा है।
अखबारों में बयां हो रही हकीकत
प्रदेश की शिवराज सरकार की बड़ी लापरवाही अब न सिर्फ गांवों तक सीमित है बल्कि प्रदेश के प्रतिष्ठित अखबारों में भी अब यह लापरवाही उजागर होने लगी है। बावजूद उसके अब तक मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस दिशा में कोई कड़े कदम नहीं उठाये हैं। देखा जाये तो कुछ समय पूर्व तक यही शिवराज सरकार और इनके मंत्री कांग्रेस सरकार को लालटेन सरकार की उपमा देने में नहीं चूकते थे। लेकिन अब लालटेन सरकार की उपमा शिवराज सरकार पर सटीक बैठती दिखाई पड़ रही है।
सर्वे में किसानों ने की अपनी दास्‍तान बयां
जगत विजन की टीम ने कुछ इलाकों में जाकर हकीकत देखी है तो बिजली कटौती के कारण किसानों की हालत बहुत खराब है। होशंगाबाद जिले की तहसील पिपरिया के खैरा गांव के किसान संतराम अहिरवार का कहना है कि मैंने लगभग 09 एकड़ में मूंग की बोवनी की है। वर्तमान में बिजली कटौती के कारण फसल खराब होने की स्थिति में है। लगभग 01 लाख रूपये का खर्चा हो चुका है। वहीं रायसेन जिले के किसान दीपेश स्‍वामी का कहना है कि मैंने 10 एकड़ जमीन में मूंग की फसल खराब हो गई है क्‍योंकि सिंचाई न होने के कारण फसल सूखने लगी है। वहीं हरदा जिले के टिमरनी विकासखंड के गांव नयागांव एवं अन्‍य गांवों में सैकड़ों किसानों की फसल खराब हो रही है। कलेक्‍टर ने भी इस क्षेत्र का सर्वे किया है। इन किसानों का लाखों रूपये इन फसलों में लग चुका है। यदि ऐसा ही रहा तो आने वाले दिनों में इनकी हालत और खराब हो जायेगी।


जारी है कटौती का सिलसिला
बिजली कटौती का यह सिलसिला न सिर्फ ग्रामीण इलाकों में बल्कि शहरी इलाकों में भी देखने को मिल रहा है। मध्यप्रदेश के कई ऐसे इलाके हैं जिसमें पिछले एक महीने से बेतहाशा बिजली कटौती हो रही है। कभी देर रात, कभी अल सुबह तो कभी भरी तपती दोपहर में ही बिजली कटौती की जा रही है। अफसरों की इस लापरवाही का खामियाजा प्रदेश और भोपाल की जनता को भुगतना पड़ रहा है।

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