नवनियुक्त केंद्रीय सतर्कता आयुक्त (सीवीसी) सुरेश एन. पटेल ने केंद्रीय मंत्री डॉ जितेंद्र सिंह से मुलाकात की और उन्हें हाल के वर्षों में लगातार घटते मामलों की जानकारी दी

सीवीसी के साथ दो सतर्कता आयुक्त, अरविंद कुमार और प्रवीण कुमार श्रीवास्तव ने केंद्र सरकार के कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के समय पर निपटान की पुष्टि करते हुए विस्तृत आंकड़े प्रस्तुत किए
2020 में आयोग द्वारा शुरू किए गए एक विशेष अभियान के कारण दिसंबर 2018 से पहले की अवधि के लिए लंबित 2,099 अनुशासनात्मक मामलों को 30 जून 2022 तक घटाकर 227 कर दिया गया है: डॉ जितेंद्र सिंह
2019 में अनुशासनात्मक मामलों की संख्या लगभग 5000 थी, जो अब विभिन्न स्तरों पर अधिकारियों के सहयोग के कारण 1700 के दायरे में आ गई है- केंद्रीय सतर्कता आयोग
नवनियुक्त केंद्रीय सतर्कता आयुक्त (सीवीसी) सुरेश एन पटेल ने केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी एवं पृथ्वी विज्ञान राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और पीएमओ, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह से मुलाकात की और उन्हें हाल के वर्षों में लगातार घटते मामलों के बारे में जानकारी दी।

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बाद में सीवीसी के साथ दो सतर्कता आयुक्त, अरविंद कुमार और प्रवीण कुमार श्रीवास्तव ने केंद्र सरकार के कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के समय पर निपटान की पुष्टि करते हुए विस्तृत आंकड़े प्रस्तुत किए।

सीवीसी पटेल ने आंकड़ों का हवाला देते हुए डॉ जितेंद्र सिंह को बताया कि आयोग द्वारा 2020 में शुरू किए गए एक विशेष अभियान के कारण दिसंबर 2018 से पहले की अवधि के लिए 2,099 अनुशासनात्मक मामलों की पेंडेंसी को 30 जून 2022 तक घटाकर 227 कर दिया गया है। इसी तरह, कुल बचे अनुशासनात्मक मामले जो कि दिसंबर 2019 तक एक निश्चित समय में औसतन लगभग 5,000 हुआ करते थे, विभिन्न स्तरों पर अधिकारियों के सहयोग के कारण अब 1,700 की रेंज से भी कम हो गया है।

डॉ जितेंद्र सिंह ने कहा, इस महीने के पहले सप्ताह में ही सीवीसी और दो सतर्कता आयुक्तों को कानून के तहत अनिवार्य रूप से नियुक्त करके, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने भ्रष्टाचार के लिए जीरो टॉलरेंस की नीति का संदेश दिया है। उन्होंने अक्टूबर, 2021 में गुजरात के केवड़िया में सीवीसी सम्मेलन में पीएम मोदी के संबोधन का भी हवाला दिया, जिसमें उन्होंने कहा, “पिछले 6-7 वर्षों में, सरकार यह विश्वास जगाने में सफल रही है कि भ्रष्टाचार को रोकना संभव है। आज भ्रष्टाचार पर प्रहार करने की राजनीतिक इच्छाशक्ति है और प्रशासनिक स्तर पर भी निरंतर सुधार किया जा रहा है।”

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आयोग ने जानकारी दी कि लंबित अनुशासनात्मक मामलों की समीक्षा करने के लिए 2020 में अभ्यास शुरू किया था ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सभी मामले उचित समय के भीतर तार्किक अंत तक पहुंचें। इस कार्य को एक अभियान मोड में चलाया गया ताकि दोषी पाए जाने वालों को बिना देरी के दंडित किया जा सके ताकि उन्हें और गलत काम करने से रोका जा सके और जो निर्दोष पाए गए उन्हें अनावश्यक तनाव से बचने के लिए बरी कर दिया जाए। सभी अनुशासनिक प्राधिकारियों, पूछताछ/प्रस्तुत करने वाले प्राधिकारियों, मुख्य सतर्कता अधिकारियों और आयोग के कर्मचारियों का सहयोग पुराने मामलों को निपटाने में प्राप्त हुआ।

पटेल ने कहा कि यह तब हुआ जब अभियान के दौरान कोविड महामारी फैल चुकी थी। शेष मामलों के लिए भी सीवीओ के साथ निरंतर निगरानी के माध्यम से प्रत्येक मामले के लिए समय-सीमा निर्धारित की गई है।

डॉ जितेंद्र सिंह ने आयोग के विशेष प्रयासों की सराहना की और कहा कि इससे सरकारी कर्मचारियों में सकारात्मकता आई है जो उन्हें अनुचित अनुशासनात्मक कार्रवाई के डर के बिना प्रक्रियाओं का पालन करते हुए संगठन के हित में निर्णय लेने के लिए प्रोत्साहित करेगी। इसके अलावा मंत्री ने यह भी कहा कि समय पर अनुशासनात्मक कार्रवाई उन लोगों के लिए एक उदाहरण का काम करेगी जिनके इरादे या कार्य संगठन के हित में नहीं हैं और जिन्हें सजा मिलना जरूरी है।

केंद्रीय सतर्कता आयोग पीएसबी, पीएसयू और केंद्रशासित प्रदेशों सहित केंद्र सरकार और केंद्र सरकार के नियंत्रित संगठनों के कर्मचारियों के खिलाफ शिकायतों से निपटता है। विभिन्न संगठनों में मुख्य सतर्कता अधिकारियों (सीवीओ) के माध्यम से की गई जांच से जहां भी इस तरह की सतर्कता संबंधी खामियां उजागर होती हैं, वहां आयोग अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने की सलाह देता है।

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