महराजगंज के परतावल क्षेत्र के रेहान ने अब बेहतरीन शायरी और ग़ज़ल कारी की दुनिया में भी कदम रखने लगे हैं।

महराजगंज: परतावल क्षेत्र के जद्दूपिपरा के रेहान ने,ना सिर्फ़ जद्दूपिपरा से दिल्ली विश्वविध्यालय तक पहुँचने का सफ़र तय किया बल्कि अब एक बेहतरीन शायरी और ग़ज़ल कारी की दुनियाँ में भी कदम रखने लगे हैं ।
बात दूँ कि जद्दूपिपरा के मो० रेहान पुत्र साजिद अली ने अपनी १२वीं तक की पढ़ायी चोख राज तुलस्यान सिसवां बाज़ार से करने के बाद -आगे की पढ़ायी के लिए दिल्ली विश्वविध्यालय के ज़ाकिर हुसैन कॉलेज में दाख़िला लिए और वहाँ के विध्यार्थी रहते हुए अब बेहतरीन शायरी और बेहतरीन ग़ज़ल कारी भी शुरू कर दिए हैं ।
कुछ इस तरह….।
मुर्दों में जान डालने का एरादा है क्या
एक बार फिर उन्हें मारने का एरादा है क्या।

मेरे आँख से नज़र अपना बदलने का एरादा है क्या
इस रक़ीब को भी मारने का एरादा है क्या।

दे के झाँसा अपनी गलियों में बुला तो लिया,फिर से
अब यहाँ से कभी ना जाने देने का एरादा है क्या तो ठीक है…

मेरा लाश भी भेजवाना इन्हीं गलियों से ही
या कि,पहचानने से मुकर जाने का एरादा है क्या।

और ये जो लोग हैं क्यूँ देंगे,गवाही तेरी
हाँ हाँ,इनपे भी अपना जादू चलाने का एरादा है क्या।

माँ ये कहती थी कि,हर निशा माँ नहीं होती
रेहान कभी पूछा?मिट्टी में मिलाने का एरादा है क्या। मो०रेहान(जामी)

तेरी ज़ुल्फ़ों को उँगलियों से कुरेदूँ,इजाज़त है क्या
तेरी गलियों में टहल जाऊँ,इजाज़त है क्या।

लोग मुझको ही कहते हैं,अनाब-शनाब,जाएज है क्या
कुछ बन के जमानें को दिखाना,वाजिद है क्या।

तुम तो कहते थे,कि तुम जैसे हो-मेरे हो
तो फिर अपना के,जताना भी-फ़साना है क्या।

तुम तो कहते थे,कि मेरे मरने पे एक अश्क़ ना गिरने दोगे
हो गए गूँगे,ऐसा रोना भी-कोई रोना है क्या।

क्यूँ दिया खौलता हुआ पानी,हरे सब्ज़ों को
रेहान पूछ:,तेरा नामों-निशाँ मिटाना है क्या। मो०रेहान(जामी)

About नवरत्न गुप्त जिला संवाददाता महराजगंज

पत्रकार
View all posts by नवरत्न गुप्त जिला संवाददाता महराजगंज →

Leave a Reply