मैनिट के रिसर्च स्काॅलर्स की बड़ी जीत

कड़े संघर्ष और मेहनत के बाद आखिरकार पीएचडी छात्रों की मेहनत रंग लाई
भोपाल। मैनिट प्रंबधन द्वारा अकादमिक संत्र 2019-20 में प्रवेशित पीएचडी स्काॅलर्स को एचआरए की राशि दिये जाने के प्रस्ताव को मान लिया गया है। पीएचडी स्काॅलर्स द्वारा दिये गये प्रस्ताव को फायनेंस कमेटी द्वारा स्वीकार करते हुऐ बोर्ड को अप्रुवल के लिये भेज दिया गया है। मैनिट प्रबंधन के इस आदेश के बाद पीएचडी रिसर्च स्कालर्स में खुशी का माहौल छाया हुआ है। प्रस्ताव के सभी बिन्दुओं को मैनिट प्रबंधन द्वारा स्वीकार किया गया हैं, जिसे स्कालर्स अपनी बड़ी जीत बता रहे है।
प्रस्ताव के प्रमुख बिन्दु में:-
– विवाहित रिसर्च स्कालर्स जो कि अपने परिवार के साथ मैनिट परिसर के बाहर किराये से रह रहे है, उन्हें एचआरए की राशि दी जायेगी।
– अविवाहित रिसर्च स्कालर्स जो कि मैनिट परिसर के होस्टल में रह रहे है, उनसे होस्टल फीस नही ली जायेगी और दो वर्ष में ली गई फीस को वापस किया जायेगा।
– अविवाहित रिसर्च स्काॅलर्स जो कि मैनिट परिसर के बाहर किराये से रह रहे है उन्हें एचआरए की राशि दी जायेगी।
भारत सरकार के एचआरए के प्रावधानों के अनुसार इन सभी रिसर्च स्कालर्स को जुलाई 2019 से अब तक की एचआरए की राशि का भुगतान भी मैनिट प्रबंधन द्वारा किया जायेगा। इस पूरे प्रकरण का नेतृत्व कर रहे राजकुमार मालवीय बताते है कि पूर्व मंे भी मैनिट के छात्रों की विभिन्न समस्याओं के निराकरण के लिये प्रयासरत रहे है, फिर चाहे एससी-एसटी की ट्यूशन फीस का मामला हो या हाॅस्टल में रहने वाले विद्यार्थियों की समस्याओं का। उसी कड़ी में आज कोरोना के कारण वित्तीय मार झेल रहे रिसर्च स्काॅलर्स के पक्ष में मैनिट प्रबंधन का यह निर्णय स्वागत योग्य है। श्री मालवीय ने बताया कि स्काॅलर्स का प्रतिनिधि मण्डल मैनिट प्रबंधन के सभी अधिकारियों को अपनी इस समस्या से समय-समय पर अवगत कराता रहा। दिल्ली जाकर भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों को भी इस संबंध में अवगत कराया गया। शिक्षा मंत्री और भोपाल सांसद से भी प्रतिनिधि मण्डल मिला और दोनों ने ही संबंधित अधिकारियों को रिसर्च स्कालर्स के हितों का ध्यान रखते हुये उचित निर्णय लेने के लिये निर्देशित किया। आखिरकार रिसर्च स्कालर्स द्वारा किये गये सार्थक प्रयासों की जीत हुई। इसके लिये फिर चाहे उन्हें कई प्रदर्शन करने पडे़ हो या फिर शासन प्रशासन के जिम्मेदार  अधिकारियों और मंत्रियों के समक्ष अपनी बात को बार-बार रखना पड़ा हो।

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